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हिमाचल प्रदेश: कच्चा माल व भाड़ा महंगा होने से कई उद्योग बंदी के कगार पर, कुछ ने दवाओं के ऑर्डर किए रद्द

ओमपाल सिंह, बद्दी (सोलन)। Published by: Ankesh Dogra Updated Wed, 01 Apr 2026 10:51 AM IST
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सार

हिमाचल प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्र बीबीएन में कई छोटे उद्योग 15-15 दिन का शटडाउन कर रहे हैं। वजह है कच्चे माल के दाम बढ़ना, कुछ सामान न मिलना, मालभाड़ा महंगा होना। पढ़ें पूरी खबर...
 

Himachal Rising Raw Material and Freight Costs Push Several Industries to the Brink of Closure
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार

हिमाचल प्रदेश के सबसे बड़े औद्योगिक क्षेत्र बीबीएन में कच्चे माल के दाम बढ़नेकुछ सामान न मिलने, मालभाड़ा महंगा होने से कई उद्योग बंदी के कगार पर हैं। कई छोटे उद्योग 15-15 दिन का शटडाउन कर रहे हैं। कच्चे माल के दाम इतने बढ़ गए हैं कि दवा उद्योग सिर्फ सरकार के ऑर्डर को पूरा कर रहे हैं।

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पब्लिक के ऑर्डर को इन्कार कर रहे हैं। पैकिंग मेटीरियल के दामों में भी उछाल आ गया है। प्लास्टिक दाना का दाम दोगुना से ज्यादा हो गया है। पहले 80 रुपये किलो था अब यह 190 रुपये किलो हो गया। इससे प्लास्टिक बोतलों के दाम भी डबल हो गए हैं। एल्यूमीनियम फ्लॉयल के दाम भी 400 से बढ़कर 550 रुपये हो गए हैं। पैकिंग का सामान दोगुना हो गया है। गत्ते में 40 फीसदी तक तेजी आई है। पीवीसी 115 से 170 रुपये हो गई है। दवा उद्योगों के कच्चे माल में 30 से 50 फीसदी तक बढ़ोतरी हुई है। 
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फाइन ड्रग एंड स्किन केयर के संचालक चिरंजीव ठाकुर ने बताया कि छोटे दवा उद्योग न तो कोई माल खरीद रहे और न ही बेच रहे। सरकारी ऑर्डर भी इसलिए दवा उद्योग पूरे कर रहे हैं, ताकि पैनल्टी न लगे। पोलो फार्मा के संचालक सुरेश कुमार गर्ग ने बताया कि कच्चे माल के दाम आसमान छू रहे हैं। उन्होंने अपने उद्योग को 15 दिन के लिए बंद कर दिया है। केवल सरकारी ऑर्डर ही पूरे कर रहे हैं।

उधर, लघु उद्योग भारती के प्रदेश महासचिव संजीव शर्मा ने बताया कि व्यावसायिक एलपीजी नहीं मिल रही है। कैंटीन चलाना कठिन हो गया है। जो कामगार कमरे में रहते हैं, उन्हें भी गैस नहीं मिल रही। भाड़े में 700 रुपये क्विंटल तक बढ़ोतरी हुई है। दुर्गापुर से पहले 3500 रुपये क्विंटल स्क्रैप आता था, अब 4200 रुपये में आ रहा है। गत्ता उद्योग संघ के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुरेंद्र जैन ने बताया कि 19 किलो का एलपीजी गैस सिलेंडर पहले 1600 रुपये में मिलता था, अब 2000 रुपये में मिल रहा है। पेपर के दाम में उछाल आने से गत्ता संचालकों को डिब्बे के दाम भी बढ़ाने पड़ेंगे। इसके अलावा इंजन आयल, गियर ऑयल, ग्रीस, हाइड्रोलिक ऑयल के दाम 10 से 15 फीसदी बढ़ गई है। ऐसी स्थिति में उद्योग चलाना अभी घाटे का सौदा बन गया है। 

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