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Solan News: टैरिफ घटाने से प्रदेश के धागा मिलों का बढ़ेगा उत्पादन
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एक्सक्लूसिव
प्रति माह उत्पादन 700 से एक हजार टन बढ़ने की उम्मीद
देश की नामी कंपनियां अमेरिका भेजती है सूती और दूसरे वस्त्र
50 फीसदी टैरिफ से भारतीय कपड़े के बढ़ गए थे दाम
बाजार में सूती वस्त्र निर्माता फिर कर पाएंगे प्रतिस्पर्धा
डॉ. ओमपाल सिंह
बद्दी (सोलन)। अमेरिका की ओर से भारत से आयात होने वाले उत्पादों पर टैरिफ 50 से घटाकर 18 फीसदी किए जाने से प्रदेश की धागा मिलों को बड़ी राहत मिली है। बीते एक वर्ष से इन कंपनियों पर मंदी की मार पड़ी हुई थी। अब अमेरिकी बाजार के दोबारा खुलने से उत्पादन बढ़ने की उम्मीद जगी है। अनुमान है कि प्रदेश भर में प्रति माह 700 से एक हजार टन तक अतिरिक्त धागे की आपूर्ति हो सकती है।
प्रदेश के ऊना, बद्दी, बरोटीवाला, कालाअंब और पांवटा साहिब क्षेत्रों में डेढ़ दर्जन से अधिक धागा मिलें संचालित हैं। इन इकाइयों से कॉटन, ब्लेंड, मेलांज और प्लास्टिक धागा वस्त्र निर्माण करने वाली नामी कंपनियों को सप्लाई किया जाता है। इन कंपनियों में तौलिए, कंबल, टी-शर्ट, जींस, पेंट, कमीज और अंडर गारमेंट्स जैसे उत्पाद तैयार कर निर्यात किए जाते हैं। सूती वस्त्रों की अमेरिका और यूरोप में सबसे अधिक मांग रहती है।
रूस-यूक्रेन युद्ध और अमेरिका की ओर से 50 फीसदी टैरिफ लगाए जाने के बाद भारत से सूती वस्त्रों की सप्लाई में भारी गिरावट आई थी। इसका सीधा असर प्रदेश की धागा मिलों पर पड़ा और उत्पादन 30 से 40 फीसदी तक घट गया। कुछ बड़ी कंपनियों ने डिस्काउंट देकर किसी तरह उत्पादन जारी रखा, लेकिन यह व्यवस्था लंबे समय तक टिकाऊ नहीं थी।
50 फीसदी टैरिफ के चलते भारतीय वस्त्र अमेरिका में करीब डेढ़ गुना महंगे हो गए थे। इससे वहां की वस्त्र कंपनियों ने धागे की खरीद कम कर दी थी। इससे प्रदेश की धागा मिलों को दोहरी मार झेलनी पड़ी। अब टैरिफ घटने से बाजार के फिर से खुलने की उम्मीद है।
पूरे प्रदेश में करीब एक हजार टन अतिरिक्त धागे की मांग बढ़ने की संभावना है। यहां से धागा वस्त्र निर्माण करने वाली कंपनियों को भेजा जाता है। ये कंपनियां कपड़ा तैयार कर अमेरिका को सप्लाई करती हैं। बीते समय में अमेरिकी बाजार में ऊंचे दामों के कारण माल नहीं बिक पा रहा था। इससे धागे की मांग घट गई थी। अब स्थिति में सुधार की उम्मीद है।
रोहित अरोड़ा, कार्यकारी अध्यक्ष, बिरला कंपनी बद्दी
वर्धमान में गैप, पीवीएच, टारगेट और हैंस जैसी नामी कंपनियों के लिए धागा तैयार किया जाता था। अमेरिका में मांग कम होने के कारण उत्पादन घटाना पड़ा था। टैरिफ कम होने से अब 30 से 35 फीसदी तक उत्पादन बढ़ने की संभावना है।
मुकेश बंसल, फैब्रिक हेड, वर्धमान
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देश की नामी कंपनियां अमेरिका भेजती है सूती और दूसरे वस्त्र
50 फीसदी टैरिफ से भारतीय कपड़े के बढ़ गए थे दाम
बाजार में सूती वस्त्र निर्माता फिर कर पाएंगे प्रतिस्पर्धा
डॉ. ओमपाल सिंह
बद्दी (सोलन)। अमेरिका की ओर से भारत से आयात होने वाले उत्पादों पर टैरिफ 50 से घटाकर 18 फीसदी किए जाने से प्रदेश की धागा मिलों को बड़ी राहत मिली है। बीते एक वर्ष से इन कंपनियों पर मंदी की मार पड़ी हुई थी। अब अमेरिकी बाजार के दोबारा खुलने से उत्पादन बढ़ने की उम्मीद जगी है। अनुमान है कि प्रदेश भर में प्रति माह 700 से एक हजार टन तक अतिरिक्त धागे की आपूर्ति हो सकती है।
प्रदेश के ऊना, बद्दी, बरोटीवाला, कालाअंब और पांवटा साहिब क्षेत्रों में डेढ़ दर्जन से अधिक धागा मिलें संचालित हैं। इन इकाइयों से कॉटन, ब्लेंड, मेलांज और प्लास्टिक धागा वस्त्र निर्माण करने वाली नामी कंपनियों को सप्लाई किया जाता है। इन कंपनियों में तौलिए, कंबल, टी-शर्ट, जींस, पेंट, कमीज और अंडर गारमेंट्स जैसे उत्पाद तैयार कर निर्यात किए जाते हैं। सूती वस्त्रों की अमेरिका और यूरोप में सबसे अधिक मांग रहती है।
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रूस-यूक्रेन युद्ध और अमेरिका की ओर से 50 फीसदी टैरिफ लगाए जाने के बाद भारत से सूती वस्त्रों की सप्लाई में भारी गिरावट आई थी। इसका सीधा असर प्रदेश की धागा मिलों पर पड़ा और उत्पादन 30 से 40 फीसदी तक घट गया। कुछ बड़ी कंपनियों ने डिस्काउंट देकर किसी तरह उत्पादन जारी रखा, लेकिन यह व्यवस्था लंबे समय तक टिकाऊ नहीं थी।
50 फीसदी टैरिफ के चलते भारतीय वस्त्र अमेरिका में करीब डेढ़ गुना महंगे हो गए थे। इससे वहां की वस्त्र कंपनियों ने धागे की खरीद कम कर दी थी। इससे प्रदेश की धागा मिलों को दोहरी मार झेलनी पड़ी। अब टैरिफ घटने से बाजार के फिर से खुलने की उम्मीद है।
पूरे प्रदेश में करीब एक हजार टन अतिरिक्त धागे की मांग बढ़ने की संभावना है। यहां से धागा वस्त्र निर्माण करने वाली कंपनियों को भेजा जाता है। ये कंपनियां कपड़ा तैयार कर अमेरिका को सप्लाई करती हैं। बीते समय में अमेरिकी बाजार में ऊंचे दामों के कारण माल नहीं बिक पा रहा था। इससे धागे की मांग घट गई थी। अब स्थिति में सुधार की उम्मीद है।
रोहित अरोड़ा, कार्यकारी अध्यक्ष, बिरला कंपनी बद्दी
वर्धमान में गैप, पीवीएच, टारगेट और हैंस जैसी नामी कंपनियों के लिए धागा तैयार किया जाता था। अमेरिका में मांग कम होने के कारण उत्पादन घटाना पड़ा था। टैरिफ कम होने से अब 30 से 35 फीसदी तक उत्पादन बढ़ने की संभावना है।
मुकेश बंसल, फैब्रिक हेड, वर्धमान
