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Solan News: एक शिक्षक के भरोसे स्कूल, बच्चों की पढ़ाई पर संकट
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शेरला में शिक्षकों की कमी और भवन निर्माण में देरी पर ग्रामीणों का फूटा गुस्सा
जमीन दान मिलने के बावजूद एक साल से शुरू नहीं हुआ निर्माण कार्य
बच्चों की पढ़ाई के लिए शहरों की ओर पलायन को मजबूर हो रहे ग्रामीण
मलबे में दबे भवन का साल भर बाद भी नहीं हुआ निर्माण
संवाद न्यूज एजेंसी
रामशहर (सोलन)। शिक्षा खंड पट्टा महलोग के तहत आने वाले शेरला गांव की माध्यमिक और प्राथमिक पाठशाला की खस्ताहाल व्यवस्था को लेकर ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा है। मंगलवार को स्कूल प्रबंधन समिति की अध्यक्ष पूजा देवी की अध्यक्षता में बैठक हुई।
बैठक में ग्रामीणों ने स्कूल के शिक्षकों को जनगणना कार्य में लगाए जाने और एक वर्ष से स्कूल भवन का निर्माण न होने पर गहरा रोष प्रकट किया। बैठक में ग्रामीणों ने बताया कि शेरला में पहले से ही केवल दो अध्यापक कार्यरत थे। उनमें से एक अध्यापक का तबादला हो चुका है, जबकि दूसरे इकलौते अध्यापक की ड्यूटी प्रशासन द्वारा जनगणना कार्य में लगा दी गई है। इसके चलते अब स्कूल में केवल एक ही शिक्षक बचा है। ग्रामीणों का साफ कहना है कि इस लचर व्यवस्था के कारण बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह चौपट हो रही है और स्कूल का सुचारू संचालन करना नामुमकिन हो गया है। ग्रामीण श्रवण कुमार ने बैठक में एक गंभीर मुद्दा उठाते हुए बताया कि पिछले वर्ष हुई भारी बारिश के कारण राजकीय प्राथमिक पाठशाला का भवन मलबे की चपेट में आकर पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था। इसके बाद स्कूल की मदद के लिए आगे आते हुए गांव के ही एक जागरूक नागरिक ने मानवता की मिसाल पेश की और नए स्कूल भवन के लिए अपनी पांच बिस्वा भूमि दान में दे दी। ग्रामीणों ने दुख जताते हुए कहा कि जमीन उपलब्ध होने के बावजूद एक साल का लंबा समय बीत चुका है, लेकिन विभाग द्वारा अभी तक नए भवन का निर्माण कार्य शुरू नहीं करवाया गया है।
शहरों की ओर पलायन को मजबूर ग्रामीण
बैठक में गांव की बदहाल सड़कों का मुद्दा भी गरमाया। ग्रामीणों ने बताया कि बरसात के दिनों में गांव को जोड़ने वाले मुख्य मार्ग क्षतिग्रस्त हो जाते हैं, जिससे कई दिनों तक यातायात पूरी तरह ठप रहता है। लोक निर्माण विभाग को बार-बार अवगत कराने के बाद भी इस समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया है। शिक्षा और सड़क जैसी मूलभूत सुविधाओं की कमी के कारण गांव के करीब 50 फीसदी लोग पलायन करने को मजबूर हैं। वे अपने बच्चों के भविष्य के लिए शहरों में किराये के कमरों में रहकर उन्हें पढ़ाने को विवश हैं।
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सरकार और प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की मांग
स्कूल प्रबंधन समिति और समस्त ग्रामीणों ने प्रदेश सरकार तथा संबंधित विभागों से पुरजोर मांग की है कि बच्चों की पढ़ाई को ध्यान में रखते हुए शिक्षकों को तुरंत जनगणना ड्यूटी से मुक्त किया जाए। दान में मिली भूमि पर स्कूल के नए भवन का निर्माण कार्य युद्धस्तर पर शुरू करवाया जाए। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इन मांगों पर सकारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो वे उग्र आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।
जमीन दान मिलने के बावजूद एक साल से शुरू नहीं हुआ निर्माण कार्य
बच्चों की पढ़ाई के लिए शहरों की ओर पलायन को मजबूर हो रहे ग्रामीण
मलबे में दबे भवन का साल भर बाद भी नहीं हुआ निर्माण
संवाद न्यूज एजेंसी
रामशहर (सोलन)। शिक्षा खंड पट्टा महलोग के तहत आने वाले शेरला गांव की माध्यमिक और प्राथमिक पाठशाला की खस्ताहाल व्यवस्था को लेकर ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा है। मंगलवार को स्कूल प्रबंधन समिति की अध्यक्ष पूजा देवी की अध्यक्षता में बैठक हुई।
बैठक में ग्रामीणों ने स्कूल के शिक्षकों को जनगणना कार्य में लगाए जाने और एक वर्ष से स्कूल भवन का निर्माण न होने पर गहरा रोष प्रकट किया। बैठक में ग्रामीणों ने बताया कि शेरला में पहले से ही केवल दो अध्यापक कार्यरत थे। उनमें से एक अध्यापक का तबादला हो चुका है, जबकि दूसरे इकलौते अध्यापक की ड्यूटी प्रशासन द्वारा जनगणना कार्य में लगा दी गई है। इसके चलते अब स्कूल में केवल एक ही शिक्षक बचा है। ग्रामीणों का साफ कहना है कि इस लचर व्यवस्था के कारण बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह चौपट हो रही है और स्कूल का सुचारू संचालन करना नामुमकिन हो गया है। ग्रामीण श्रवण कुमार ने बैठक में एक गंभीर मुद्दा उठाते हुए बताया कि पिछले वर्ष हुई भारी बारिश के कारण राजकीय प्राथमिक पाठशाला का भवन मलबे की चपेट में आकर पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था। इसके बाद स्कूल की मदद के लिए आगे आते हुए गांव के ही एक जागरूक नागरिक ने मानवता की मिसाल पेश की और नए स्कूल भवन के लिए अपनी पांच बिस्वा भूमि दान में दे दी। ग्रामीणों ने दुख जताते हुए कहा कि जमीन उपलब्ध होने के बावजूद एक साल का लंबा समय बीत चुका है, लेकिन विभाग द्वारा अभी तक नए भवन का निर्माण कार्य शुरू नहीं करवाया गया है।
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शहरों की ओर पलायन को मजबूर ग्रामीण
बैठक में गांव की बदहाल सड़कों का मुद्दा भी गरमाया। ग्रामीणों ने बताया कि बरसात के दिनों में गांव को जोड़ने वाले मुख्य मार्ग क्षतिग्रस्त हो जाते हैं, जिससे कई दिनों तक यातायात पूरी तरह ठप रहता है। लोक निर्माण विभाग को बार-बार अवगत कराने के बाद भी इस समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया है। शिक्षा और सड़क जैसी मूलभूत सुविधाओं की कमी के कारण गांव के करीब 50 फीसदी लोग पलायन करने को मजबूर हैं। वे अपने बच्चों के भविष्य के लिए शहरों में किराये के कमरों में रहकर उन्हें पढ़ाने को विवश हैं।
सरकार और प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की मांग
स्कूल प्रबंधन समिति और समस्त ग्रामीणों ने प्रदेश सरकार तथा संबंधित विभागों से पुरजोर मांग की है कि बच्चों की पढ़ाई को ध्यान में रखते हुए शिक्षकों को तुरंत जनगणना ड्यूटी से मुक्त किया जाए। दान में मिली भूमि पर स्कूल के नए भवन का निर्माण कार्य युद्धस्तर पर शुरू करवाया जाए। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इन मांगों पर सकारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो वे उग्र आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।