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Solan News: आचार्य ने भगवान गणेश की बताई महिमा
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दाड़लाघाट में श्री शिव महापुराण कथा को विराम
मंदिर में शिवलिंग की प्रतिष्ठा
संवाद न्यूज एजेंसी
दाड़लाघाट (सोलन)। श्री बाडूबाड़ा देव प्रांगण दाड़लाघाट में श्री शिव महापुराण कथा महायज्ञ, पूर्णाहुति एवं शिवलिंग प्रतिष्ठा के साथ बुधवार को संपन्न हो गई। कथा के अंतिम दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने शिव का आशीर्वाद प्राप्त किया।
आचार्य हरि जी महाराज ने भगवान गणेश की महिमा, उनकी प्रथम पूज्य होने की कथा तथा भगवान शिव और माता पार्वती से जुड़े प्रसंगों का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि भगवान गणेश बुद्धि, विवेक, ज्ञान और मंगल के अधिष्ठाता देव हैं। किसी भी शुभ कार्य से पूर्व उनकी पूजा करने का विधान है। उन्होंने गणेश जी और भगवान कार्तिकेय की परिक्रमा कथा का उल्लेख करते हुए कहा कि माता-पिता का सम्मान ही सच्चा धर्म है और बुद्धि तथा विवेक बल से भी श्रेष्ठ होते हैं।
आचार्य हरि जी महाराज ने भगवान गणेश के जन्म, शनिदेव की दृष्टि, गणेश जी को हाथी का मस्तक प्राप्त होने तथा प्रथम पूज्य बनने के प्रसंगों का वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को धर्म, संस्कार और पारिवारिक मूल्यों का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि भगवान गणेश की आराधना से विद्या, बुद्धि, सुख-समृद्धि और सफलता की प्राप्ति होती है तथा जीवन के विघ्न दूर होते हैं। विधि-विधान के साथ महायज्ञ एवं पूर्णाहुति हुई। नवनिर्मित मंदिर परिसर में शिवलिंग की प्रतिष्ठा की गई।
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मंदिर में शिवलिंग की प्रतिष्ठा
संवाद न्यूज एजेंसी
दाड़लाघाट (सोलन)। श्री बाडूबाड़ा देव प्रांगण दाड़लाघाट में श्री शिव महापुराण कथा महायज्ञ, पूर्णाहुति एवं शिवलिंग प्रतिष्ठा के साथ बुधवार को संपन्न हो गई। कथा के अंतिम दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने शिव का आशीर्वाद प्राप्त किया।
आचार्य हरि जी महाराज ने भगवान गणेश की महिमा, उनकी प्रथम पूज्य होने की कथा तथा भगवान शिव और माता पार्वती से जुड़े प्रसंगों का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि भगवान गणेश बुद्धि, विवेक, ज्ञान और मंगल के अधिष्ठाता देव हैं। किसी भी शुभ कार्य से पूर्व उनकी पूजा करने का विधान है। उन्होंने गणेश जी और भगवान कार्तिकेय की परिक्रमा कथा का उल्लेख करते हुए कहा कि माता-पिता का सम्मान ही सच्चा धर्म है और बुद्धि तथा विवेक बल से भी श्रेष्ठ होते हैं।
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आचार्य हरि जी महाराज ने भगवान गणेश के जन्म, शनिदेव की दृष्टि, गणेश जी को हाथी का मस्तक प्राप्त होने तथा प्रथम पूज्य बनने के प्रसंगों का वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को धर्म, संस्कार और पारिवारिक मूल्यों का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि भगवान गणेश की आराधना से विद्या, बुद्धि, सुख-समृद्धि और सफलता की प्राप्ति होती है तथा जीवन के विघ्न दूर होते हैं। विधि-विधान के साथ महायज्ञ एवं पूर्णाहुति हुई। नवनिर्मित मंदिर परिसर में शिवलिंग की प्रतिष्ठा की गई।