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Una News: दूसरे के नाम पर बैंक से वाहन ऋण लेने की कोशिश, तीन साल की सजा
Thu, 13 Aug 2026 08:32 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
Updated Thu, 13 Aug 2026 08:32 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। दूसरे व्यक्ति के नाम पर बैंक में पहुंचकर जाली दस्तावेजों के सहारे वाहन ऋण लेने का प्रयास करने के मामले में अदालत ने आरोपी करनैल सिंह को दोषी करार देते हुए तीन साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई।
न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी कोर्ट नंबर-दो ऊना की अदालत ने दोषी को भारतीय दंड संहिता की धारा 419, 467 और 468 के तहत तीन-तीन साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई। तीनों सजाएं एक साथ चलेंगी। अदालत ने दोषी पर कुल 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना अदा न करने पर उसे एक माह का अतिरिक्त कठोर कारावास भुगतना होगा।
26 जुलाई 2014 को केसीसी बैंक बंगाणा के शाखा प्रबंधक ने पुलिस थाना बंगाणा में शिकायत दर्ज करवाई थी। शिकायत के अनुसार 24 जुलाई को एक व्यक्ति खुद को विपिन कुमार बताकर वाहन ऋण लेने के इरादे से बैंक पहुंचा था।
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अगले दिन उसने पहचान संबंधी दस्तावेज और अन्य जरूरी कागजात जमा करवाए। ऋण की प्रक्रिया के तहत उसने 1.55 लाख रुपये मार्जिन मनी भी जमा करवाई। दस्तावेजों की जांच के दौरान बैंक अधिकारियों को कागजात जाली होने का संदेह हुआ।
इसके बाद शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। जांच के दौरान गवाहों के बयान दर्ज किए गए। पुलिस जांच में सामने आया कि करनैल सिंह ने कथित साजिश के तहत दूसरे व्यक्ति की पहचान का इस्तेमाल किया और जाली दस्तावेजों को असली बताकर बैंक से ऋण हासिल करने का प्रयास किया था।
पुलिस ने जांच पूरी करने के बाद उसके खिलाफ आरोप पत्र अदालत में दाखिल किया। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 13 गवाह पेश किए।
अदालत ने साक्ष्यों के आधार पर करनैल सिंह को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई। जिला न्यायवादी एकलव्य ने बताया कि मामले की पैरवी सहायक जिला न्यायवादी राजीव कुमार चौधरी ने की।
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ऊना। दूसरे व्यक्ति के नाम पर बैंक में पहुंचकर जाली दस्तावेजों के सहारे वाहन ऋण लेने का प्रयास करने के मामले में अदालत ने आरोपी करनैल सिंह को दोषी करार देते हुए तीन साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई।
न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी कोर्ट नंबर-दो ऊना की अदालत ने दोषी को भारतीय दंड संहिता की धारा 419, 467 और 468 के तहत तीन-तीन साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई। तीनों सजाएं एक साथ चलेंगी। अदालत ने दोषी पर कुल 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना अदा न करने पर उसे एक माह का अतिरिक्त कठोर कारावास भुगतना होगा।
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26 जुलाई 2014 को केसीसी बैंक बंगाणा के शाखा प्रबंधक ने पुलिस थाना बंगाणा में शिकायत दर्ज करवाई थी। शिकायत के अनुसार 24 जुलाई को एक व्यक्ति खुद को विपिन कुमार बताकर वाहन ऋण लेने के इरादे से बैंक पहुंचा था।
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अगले दिन उसने पहचान संबंधी दस्तावेज और अन्य जरूरी कागजात जमा करवाए। ऋण की प्रक्रिया के तहत उसने 1.55 लाख रुपये मार्जिन मनी भी जमा करवाई। दस्तावेजों की जांच के दौरान बैंक अधिकारियों को कागजात जाली होने का संदेह हुआ।
इसके बाद शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। जांच के दौरान गवाहों के बयान दर्ज किए गए। पुलिस जांच में सामने आया कि करनैल सिंह ने कथित साजिश के तहत दूसरे व्यक्ति की पहचान का इस्तेमाल किया और जाली दस्तावेजों को असली बताकर बैंक से ऋण हासिल करने का प्रयास किया था।
पुलिस ने जांच पूरी करने के बाद उसके खिलाफ आरोप पत्र अदालत में दाखिल किया। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 13 गवाह पेश किए।
अदालत ने साक्ष्यों के आधार पर करनैल सिंह को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई। जिला न्यायवादी एकलव्य ने बताया कि मामले की पैरवी सहायक जिला न्यायवादी राजीव कुमार चौधरी ने की।