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Una News: चौथे नवरात्र पर मंदिरों में लगी रही श्रद्धालुओं की भीड़
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संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी/चोलथरा। चौथे नवरात्र पर मंडी जिले के मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ रही। परिवार सहित लोग अपने ईष्ट-कुल देवी-देवताओं के दर्शन कर सुख-शांति की कामना कर रहे थे। कई श्रद्धालु मनोकामना पूर्ण होने पर जातर लेकर पहुंचे और भंडारे का आयोजन भी किया गया। दिन भर मंदिरों में भजन-कीर्तन और आरती का दौर चलता रहा। जिले के प्रमुख मंदिरों में कामाक्षा देवी करसोग, चिंढी माता, शिकारी देवी, महामाया (सुंदरनगर), शीतला व जालपा, बलद्वाड़ा में श्यामा काली, धर्मपुर में स्क्रैणी देवी, बसाही में माता चतुर्भुजा, सिमसा माता, अवाह देवी, मंडी शहर में भीमाकाली, टारना माता, सिद्धकाली आदि शामिल हैं। श्रद्धालुओं ने घरों में कलश की पूजा अर्चना कर व्रत रखा और संध्या में माता की आरती के साथ सात्विक भोजन ग्रहण कर व्रत समाप्त किया। मंदिरों में नौ दिनों तक दुर्गा स्तुति पाठ और भजन-कीर्तन का आयोजन रहेगा।
धर्मपुर के अवाह देवी मंदिर में चौथे दिन श्रीमद्भागवत कथा का वाचन हुआ। कथा वाचक पंडित संजीव शर्मा ने व्यास देव और शुकदेव ऋषि के जन्म और जीवन प्रसंग सुनाए। उन्होंने कहा कि जीवन को सार्थक बनाने के लिए भगवान के नाम का स्मरण और सत्कर्म अत्यंत आवश्यक हैं।
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मंडी/चोलथरा। चौथे नवरात्र पर मंडी जिले के मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ रही। परिवार सहित लोग अपने ईष्ट-कुल देवी-देवताओं के दर्शन कर सुख-शांति की कामना कर रहे थे। कई श्रद्धालु मनोकामना पूर्ण होने पर जातर लेकर पहुंचे और भंडारे का आयोजन भी किया गया। दिन भर मंदिरों में भजन-कीर्तन और आरती का दौर चलता रहा। जिले के प्रमुख मंदिरों में कामाक्षा देवी करसोग, चिंढी माता, शिकारी देवी, महामाया (सुंदरनगर), शीतला व जालपा, बलद्वाड़ा में श्यामा काली, धर्मपुर में स्क्रैणी देवी, बसाही में माता चतुर्भुजा, सिमसा माता, अवाह देवी, मंडी शहर में भीमाकाली, टारना माता, सिद्धकाली आदि शामिल हैं। श्रद्धालुओं ने घरों में कलश की पूजा अर्चना कर व्रत रखा और संध्या में माता की आरती के साथ सात्विक भोजन ग्रहण कर व्रत समाप्त किया। मंदिरों में नौ दिनों तक दुर्गा स्तुति पाठ और भजन-कीर्तन का आयोजन रहेगा।
धर्मपुर के अवाह देवी मंदिर में चौथे दिन श्रीमद्भागवत कथा का वाचन हुआ। कथा वाचक पंडित संजीव शर्मा ने व्यास देव और शुकदेव ऋषि के जन्म और जीवन प्रसंग सुनाए। उन्होंने कहा कि जीवन को सार्थक बनाने के लिए भगवान के नाम का स्मरण और सत्कर्म अत्यंत आवश्यक हैं।
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