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Una News: लाखों की फूड टेस्टिंग वैन बिना स्टाफ के बनी सफेद हाथी
Fri, 31 Jul 2026 12:50 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
Updated Fri, 31 Jul 2026 12:50 AM IST
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क्षेत्रीय अस्पताल परिसर में खड़ी मोबाइल फूड टेस्टिंग वैन । संवाद
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ऊना। खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की मौके पर जांच और मिलावट पर प्रभावी अंकुश लगाने के उद्देश्य से लाखों रुपये की लागत से उपलब्ध कराई गई मोबाइल फूड टेस्टिंग वैन जिले में शोपीस बनकर रह गई है। पर्याप्त तकनीकी स्टाफ की नियुक्ति न होने के कारण यह अत्याधुनिक वैन क्षेत्रीय अस्पताल परिसर में लंबे समय से खड़ी धूल फांक रही है। वैन के उपयोग में नहीं आने से सरकार और संबंधित विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
मोबाइल फूड टेस्टिंग वैन के माध्यम से त्योहारों, मेलों, बाजारों और ग्रामीण क्षेत्रों में मौके पर खाद्य पदार्थों की जांच कर लोगों को तत्काल रिपोर्ट उपलब्ध कराने की योजना थी। इसके संचालन से मिलावटी खाद्य पदार्थ बेचने वालों पर भी प्रभावी निगरानी रखी जानी थी, लेकिन आवश्यक स्टाफ के अभाव में यह योजना धरातल पर नहीं उतर सकी है। जिले में खाद्य सुरक्षा विभाग पहले ही सीमित कर्मचारियों के सहारे काम कर रहा है। ऐसे में आधुनिक सुविधाओं से लैस वैन होने के बावजूद उसका लाभ आम लोगों तक नहीं पहुंच पा रहा। अस्पताल परिसर में खड़ी इस वैन का लंबे समय तक उपयोग न होने से सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग और रखरखाव को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।
त्योहारों के दौरान खाद्य पदार्थों की बिक्री बढ़ने पर मिलावट की आशंका भी बढ़ जाती है। ऐसे समय में यदि मोबाइल लैब सक्रिय हो तो विभिन्न स्थानों पर तुरंत सैंपल जांच कर मिलावटखोरों पर कार्रवाई की जा सकती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकार ने जनता की सुविधा के लिए करोड़ों और लाखों रुपये की आधुनिक मशीनें व वाहन तो उपलब्ध करा दिए लेकिन उन्हें संचालित करने के लिए आवश्यक मानव संसाधन की व्यवस्था नहीं की। उन्होंने मांग की है कि जल्द से जल्द तकनीकी स्टाफ की नियुक्ति कर मोबाइल फूड टेस्टिंग वैन को संचालित किया जाए।
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मोबाइल फूड टेस्टिंग वैन के संचालन के लिए स्टाफ की तैनाती के लिए उपायुक्त ऊना के माध्यम से उच्च अधिकारियों को सूचित किया गया है। विभाग के स्तर पर ही तैनाती की जाएगी।
जगदीश धीमान, सहायक आयुक्त खाद्य सुरक्षा ऊना
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मोबाइल फूड टेस्टिंग वैन के माध्यम से त्योहारों, मेलों, बाजारों और ग्रामीण क्षेत्रों में मौके पर खाद्य पदार्थों की जांच कर लोगों को तत्काल रिपोर्ट उपलब्ध कराने की योजना थी। इसके संचालन से मिलावटी खाद्य पदार्थ बेचने वालों पर भी प्रभावी निगरानी रखी जानी थी, लेकिन आवश्यक स्टाफ के अभाव में यह योजना धरातल पर नहीं उतर सकी है। जिले में खाद्य सुरक्षा विभाग पहले ही सीमित कर्मचारियों के सहारे काम कर रहा है। ऐसे में आधुनिक सुविधाओं से लैस वैन होने के बावजूद उसका लाभ आम लोगों तक नहीं पहुंच पा रहा। अस्पताल परिसर में खड़ी इस वैन का लंबे समय तक उपयोग न होने से सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग और रखरखाव को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।
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त्योहारों के दौरान खाद्य पदार्थों की बिक्री बढ़ने पर मिलावट की आशंका भी बढ़ जाती है। ऐसे समय में यदि मोबाइल लैब सक्रिय हो तो विभिन्न स्थानों पर तुरंत सैंपल जांच कर मिलावटखोरों पर कार्रवाई की जा सकती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकार ने जनता की सुविधा के लिए करोड़ों और लाखों रुपये की आधुनिक मशीनें व वाहन तो उपलब्ध करा दिए लेकिन उन्हें संचालित करने के लिए आवश्यक मानव संसाधन की व्यवस्था नहीं की। उन्होंने मांग की है कि जल्द से जल्द तकनीकी स्टाफ की नियुक्ति कर मोबाइल फूड टेस्टिंग वैन को संचालित किया जाए।
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मोबाइल फूड टेस्टिंग वैन के संचालन के लिए स्टाफ की तैनाती के लिए उपायुक्त ऊना के माध्यम से उच्च अधिकारियों को सूचित किया गया है। विभाग के स्तर पर ही तैनाती की जाएगी।
जगदीश धीमान, सहायक आयुक्त खाद्य सुरक्षा ऊना