हिमाचल: आलू उत्पादक संकट में, लागत निकालनी भी मुश्किल; एक कनाल में 7,000 खर्च, जेब में आ रहे 2500 रुपये
हिमाचल प्रदेश के आलू उत्पादक संकट से जूझ रहे हैं। हाल ऐसे हैं कि एक कनाल में करीब 7,000 रुपये लागत लगाने के बाद किसानों को मुश्किल से 2,500 रुपये ही मिल पा रहे हैं। पढ़ें पूरी खबर...
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हिमाचल प्रदेश के आलू उत्पादकों के लिए इस बार आलू की फसल घाटे का सौदा बन गई है। बाजार में गिरते दामों ने किसानों की कमर तोड़ दी है। हालात यह हैं कि एक कनाल में करीब 7,000 रुपये लागत लगाने के बाद किसानों को मुश्किल से 2,500 रुपये ही मिल पा रहे हैं, इससे प्रति कनाल लगभग 4500 रुपये का सीधा नुकसान झेलना पड़ रहा है। किसानों का कहना है कि मौजूदा समय में आलू का भाव 230 से 270 रुपये प्रति क्विंटल के बीच चल रहा है, जो लागत के मुकाबले बेहद कम है। जमीन से एक क्विंटल आलू निकालने में ही करीब 100 रुपये मजदूरी खर्च हो रही है।
किसानों ने बताया कि आलू की फसल तैयार होने में करीब साढ़े तीन महीने का समय लगता है। इस दौरान बीज, खाद, कीटनाशक, सिंचाई और अन्य कृषि कार्यों पर हजारों रुपये खर्च करने पड़ते हैं। कई किसानों ने इस सीजन में लाखों रुपये निवेश किए, लेकिन फसल बेचने पर उन्हें लागत का भी पूरा पैसा नहीं मिल पा रहा है। ऊना जिले में करीब 1000 हेक्टेयर भूमि पर आलू की खेती की जाती है और यह जिला प्रदेश में आलू उत्पादन के लिए जाना जाता है। बावजूद पिछले कुछ वर्षों से लगातार किसानों को इस फसल में घाटा झेलना पड़ रहा है। किसान गुरपाल चौधरी का कहना है कि दिन-रात मेहनत करने के बाद भी जब फसल का सही मूल्य नहीं मिलता तो हिम्मत टूट जाती है।

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि इस समय देश की बड़ी मंडियों में आलू की फसल की भरमार है। उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल से बड़ी मात्रा में आलू की आपूर्ति हो रही। वहां तैयार होने वाला आलू ऊना के मुकाबले बेहतर गुणवत्ता का माना जा रहा। इसकी वजह यह कि ऊना में फसल बीमारी की चपेट में आ गई थी।
आलू की फसल पर मौसम की मार पड़ी है। इससे उत्पादन और गुणवत्ता दोनों में गिरावट आई है। किसान इस संबंध में किसी प्रकार के मार्गदर्शन या समस्या के लिए कृषि विभाग से संपर्क करें। -डॉ. प्रेम ठाकुर, उपनिदेशक, कृषि, विभाग ऊना

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