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राजस्व रिकॉर्ड गुम होने से पैदा हुआ लालसिंगी में जमीन का विवाद : बलवीर
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कहा- फसलें और नस्लें बर्बाद करने के लिए खेतों में स्टोन क्रशर लगाया जा रहा
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। किसान योद्धा सरदार रुड़का सिंह कल्याण समिति के अध्यक्ष इंजीनियर बलवीर चौधरी ने रविवार को आयोजित पत्रकार वार्ता में कहा कि यदि राजस्व रिकाॅर्ड सही ढंग से सहेजा गया होता तो लाल सिंगी में भूमि विवाद उत्पन्न नहीं होता। यह भी आग्रह किया कि अदालत के फैसले तक विवादित जमीन से कोई सड़क न बनाई जाए। बलवीर चौधरी ने कहा कि खेतों में स्टोन क्रशर लगाने से फसलें और नस्लें बर्बाद हो रही हैं। 1984 में महाल लाल सिंगी का साबिका लट्ठा उपलब्ध था, जिसे विभाग ने 1980-84 के दौरान बख्तावर सिंह पटवारी के माध्यम से नया शजरा तैयार करवाने में इस्तेमाल किया था। इसके साथ ही फील्ड बुक और खतौनी भी तैयार करवाई गई थीं, जिनमें प्रत्येक मालिक और खरीदार का कब्जा दर्ज था।
भू-व्यवस्था विभाग ने महाल लाल सिंगी के बंदोबस्त के लिए उक्त राजस्व रिकॉर्ड का उपयोग नहीं किया, जिससे भूमि विवाद उत्पन्न होना स्वाभाविक था। जब लाल सिंगी के निवासियों ने उपरोक्त रिकॉर्ड की मांग की तो यह जानकारी मिली कि यह रिकॉर्ड राजस्व विभाग और भू व्यवस्था विभाग के कार्यालय में उपलब्ध नहीं है। यदि 1980-84 के दौरान तैयार किया गया नया राजस्व रिकॉर्ड मौजूद होता तो वर्तमान में यह विवाद न होता।
बलवीर चौधरी ने यह भी बताया कि भू व्यवस्था विभाग ने खसरा नंबर 2390 में कब्जा मौके के आधार पर रास्ता बनाया है, जबकि पटवारी द्वारा जारी किया गया खसरा नंबर 2390 का रास्ता अवैध है। इस रास्ते पर किसी व्यक्ति ने कब्जा कर लिया है और इस कारण सड़क निर्माण रोका गया है। यह रास्ता भू व्यवस्था विभाग की ओर से संदीप कुमार के खेत में बनाया गया है, जबकि संदीप कुमार का वर्षों से इस खेत पर कब्जा रहा है और उन्होंने वर्तमान में इस खेत में गेहूं बीज रखा है। यह भी कहा कि भू व्यवस्था विभाग को सचिव राजस्व के आदेशों के अनुसार कब्जा मौके के आधार पर बंदोबस्त करना था। संदीप कुमार के खेत से कागजात माल में रास्ता निकालना सचिव राजस्व के आदेशों की अवमानना है। इसके अलावा यह मामला सिविल कोर्ट ऊना में विचाराधीन है और कोर्ट ने रास्ते पर स्टे (रोक) लगा दिया है। इसलिए अदालत के फैसले तक विवादित जमीन से सड़क नहीं निकाली जानी चाहिए।
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संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। किसान योद्धा सरदार रुड़का सिंह कल्याण समिति के अध्यक्ष इंजीनियर बलवीर चौधरी ने रविवार को आयोजित पत्रकार वार्ता में कहा कि यदि राजस्व रिकाॅर्ड सही ढंग से सहेजा गया होता तो लाल सिंगी में भूमि विवाद उत्पन्न नहीं होता। यह भी आग्रह किया कि अदालत के फैसले तक विवादित जमीन से कोई सड़क न बनाई जाए। बलवीर चौधरी ने कहा कि खेतों में स्टोन क्रशर लगाने से फसलें और नस्लें बर्बाद हो रही हैं। 1984 में महाल लाल सिंगी का साबिका लट्ठा उपलब्ध था, जिसे विभाग ने 1980-84 के दौरान बख्तावर सिंह पटवारी के माध्यम से नया शजरा तैयार करवाने में इस्तेमाल किया था। इसके साथ ही फील्ड बुक और खतौनी भी तैयार करवाई गई थीं, जिनमें प्रत्येक मालिक और खरीदार का कब्जा दर्ज था।
भू-व्यवस्था विभाग ने महाल लाल सिंगी के बंदोबस्त के लिए उक्त राजस्व रिकॉर्ड का उपयोग नहीं किया, जिससे भूमि विवाद उत्पन्न होना स्वाभाविक था। जब लाल सिंगी के निवासियों ने उपरोक्त रिकॉर्ड की मांग की तो यह जानकारी मिली कि यह रिकॉर्ड राजस्व विभाग और भू व्यवस्था विभाग के कार्यालय में उपलब्ध नहीं है। यदि 1980-84 के दौरान तैयार किया गया नया राजस्व रिकॉर्ड मौजूद होता तो वर्तमान में यह विवाद न होता।
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बलवीर चौधरी ने यह भी बताया कि भू व्यवस्था विभाग ने खसरा नंबर 2390 में कब्जा मौके के आधार पर रास्ता बनाया है, जबकि पटवारी द्वारा जारी किया गया खसरा नंबर 2390 का रास्ता अवैध है। इस रास्ते पर किसी व्यक्ति ने कब्जा कर लिया है और इस कारण सड़क निर्माण रोका गया है। यह रास्ता भू व्यवस्था विभाग की ओर से संदीप कुमार के खेत में बनाया गया है, जबकि संदीप कुमार का वर्षों से इस खेत पर कब्जा रहा है और उन्होंने वर्तमान में इस खेत में गेहूं बीज रखा है। यह भी कहा कि भू व्यवस्था विभाग को सचिव राजस्व के आदेशों के अनुसार कब्जा मौके के आधार पर बंदोबस्त करना था। संदीप कुमार के खेत से कागजात माल में रास्ता निकालना सचिव राजस्व के आदेशों की अवमानना है। इसके अलावा यह मामला सिविल कोर्ट ऊना में विचाराधीन है और कोर्ट ने रास्ते पर स्टे (रोक) लगा दिया है। इसलिए अदालत के फैसले तक विवादित जमीन से सड़क नहीं निकाली जानी चाहिए।