{"_id":"69b69e924ed2cc0bbc08286c","slug":"paramjit-singh-strengthened-his-financial-situation-by-cultivating-strawberries-una-news-c-93-1-ssml1047-184805-2026-03-15","type":"story","status":"publish","title_hn":"Una News: परमजीत सिंह ने स्ट्राबेरी की खेती कर मजबूत की आर्थिक स्थिति","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Una News: परमजीत सिंह ने स्ट्राबेरी की खेती कर मजबूत की आर्थिक स्थिति
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
Updated Mon, 16 Mar 2026 05:26 AM IST
विज्ञापन
विज्ञापन
गांव के कुछ लोगों और प्रवासी मजदूरों को रोजगार भी उपलब्ध करवाया
संवाद न्यूज एजेंसी
नंगल (ऊना)। श्री आनंदपुर साहिब के गांव नंगल अवियाणा के किसान परमजीत सिंह अन्य किसानों के लिए मिसाल बन चुके हैं। लगभग 16 वर्ष पहले परमजीत सिंह ने पारंपरिक फसल चक्र को छोड़कर नई फसलों की खेती करने का फैसला किया। उनकी मेहनत धीरे-धीरे रंग लाती गई और आज वे आर्थिक रूप से काफी मजबूत हो चुके हैं। साथ ही पर्यावरण संरक्षण में भी अहम भूमिका निभा रहे हैं।
16 साल पहले परमजीत सिंह ने गेहूं-धान की खेती छोड़कर अपने खेतों में स्ट्रॉबेरी की खेती शुरू की। शुरुआत में उन्हें काफी मेहनत करनी पड़ी, लेकिन बाद में उन्हें पारंपरिक फसलों की तुलना में कई गुना अधिक लाभ मिलने लगा। यही कारण है कि आज परमजीत सिंह और उनका परिवार अपने खेतों में लगातार स्ट्रॉबेरी की खेती कर रहे हैं। इसके साथ ही गांव के कुछ लोगों और प्रवासी मजदूरों को भी उन्होंने रोजगार उपलब्ध करवाया है।
वर्तमान में उन्होंने लगभग आठ एकड़ भूमि में स्ट्रॉबेरी की खेती की है। इसके साथ-साथ वे मिर्च की खेती भी कर रहे हैं और दोनों फसलों से उन्हें अच्छा मुनाफा मिल रहा है। परमजीत सिंह से प्रेरित होकर कई अन्य किसान भी इस खेती को अपना चुके हैं। उनका कहना है कि आज समय की सबसे बड़ी जरूरत है कि किसान पारंपरिक फसल चक्र से बाहर निकलें। नई फसलों की खेती को बढ़ावा देने के लिए सरकारी विभागों की ओर से सब्सिडी और ऋण भी उपलब्ध करवाए जा रहे हैं।
बाजार में स्ट्रॉबेरी की मांग इतनी अधिक है कि उसकी पूर्ति करना भी मुश्किल हो जाता है। वे स्वयं नंगल, ऊना, होशियारपुर और जालंधर की मंडियों में स्ट्रॉबेरी की आपूर्ति करते हैं और यह फसल नकद भुगतान पर बेची जाती है। कहा कि वे स्ट्रॉबेरी के साथ-साथ मिर्च, प्याज, लहसुन, खरबूजा और तरबूज की खेती भी कर रहे हैं। उन्होंने किसानों से अपील की है कि यदि वे पारंपरिक फसलों से परेशान हो चुके हैं तो इस तरह की खेती को अपनाकर अपनी आय बढ़ा सकते हैं। इनसे प्रेरित होकर फरीदकोट, समाना और पटियाला के कई किसान भी स्ट्रॉबेरी की खेती शुरू कर चुके हैं और अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं।
Trending Videos
संवाद न्यूज एजेंसी
नंगल (ऊना)। श्री आनंदपुर साहिब के गांव नंगल अवियाणा के किसान परमजीत सिंह अन्य किसानों के लिए मिसाल बन चुके हैं। लगभग 16 वर्ष पहले परमजीत सिंह ने पारंपरिक फसल चक्र को छोड़कर नई फसलों की खेती करने का फैसला किया। उनकी मेहनत धीरे-धीरे रंग लाती गई और आज वे आर्थिक रूप से काफी मजबूत हो चुके हैं। साथ ही पर्यावरण संरक्षण में भी अहम भूमिका निभा रहे हैं।
16 साल पहले परमजीत सिंह ने गेहूं-धान की खेती छोड़कर अपने खेतों में स्ट्रॉबेरी की खेती शुरू की। शुरुआत में उन्हें काफी मेहनत करनी पड़ी, लेकिन बाद में उन्हें पारंपरिक फसलों की तुलना में कई गुना अधिक लाभ मिलने लगा। यही कारण है कि आज परमजीत सिंह और उनका परिवार अपने खेतों में लगातार स्ट्रॉबेरी की खेती कर रहे हैं। इसके साथ ही गांव के कुछ लोगों और प्रवासी मजदूरों को भी उन्होंने रोजगार उपलब्ध करवाया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
वर्तमान में उन्होंने लगभग आठ एकड़ भूमि में स्ट्रॉबेरी की खेती की है। इसके साथ-साथ वे मिर्च की खेती भी कर रहे हैं और दोनों फसलों से उन्हें अच्छा मुनाफा मिल रहा है। परमजीत सिंह से प्रेरित होकर कई अन्य किसान भी इस खेती को अपना चुके हैं। उनका कहना है कि आज समय की सबसे बड़ी जरूरत है कि किसान पारंपरिक फसल चक्र से बाहर निकलें। नई फसलों की खेती को बढ़ावा देने के लिए सरकारी विभागों की ओर से सब्सिडी और ऋण भी उपलब्ध करवाए जा रहे हैं।
बाजार में स्ट्रॉबेरी की मांग इतनी अधिक है कि उसकी पूर्ति करना भी मुश्किल हो जाता है। वे स्वयं नंगल, ऊना, होशियारपुर और जालंधर की मंडियों में स्ट्रॉबेरी की आपूर्ति करते हैं और यह फसल नकद भुगतान पर बेची जाती है। कहा कि वे स्ट्रॉबेरी के साथ-साथ मिर्च, प्याज, लहसुन, खरबूजा और तरबूज की खेती भी कर रहे हैं। उन्होंने किसानों से अपील की है कि यदि वे पारंपरिक फसलों से परेशान हो चुके हैं तो इस तरह की खेती को अपनाकर अपनी आय बढ़ा सकते हैं। इनसे प्रेरित होकर फरीदकोट, समाना और पटियाला के कई किसान भी स्ट्रॉबेरी की खेती शुरू कर चुके हैं और अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं।