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Una News: शांत झील, अशांत माहौल, गोबिंद सागर क्षेत्र बना नशे का अड्डा
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लोग बोले -रोजाना शाम के समय झील के आसपास हो रहा हुड़दंग
संवाद न्यूज एजेंसी
थानाकलां (ऊना)। बीबीएमबी की गोबिंद सागर झील से सटी पंचायत डोहगी के गांव कोटला खास–वेला क्षेत्र में नशे से जुड़ी गतिविधियां लगातार बढ़ती जा रही हैं। शांत झील के आसपास अशांत माहौल बनाया जा रहा है। हालात यह हैं कि शाम ढलते ही यहां युवाओं का जमावड़ा लगने लगता है और खुलेआम नशीले पदार्थों का सेवन किया जा रहा है। इससे न केवल क्षेत्र की शांति भंग हो रही है, बल्कि लोगों में भय का माहौल भी बन गया है।
स्थानीय निवासी अशोक कुमार के अनुसार रोजाना शाम के समय झील के आसपास हुड़दंग और शोर-शराबा आम हो गया है। नशे में धुत युवक शराब पीने के बाद खाली बोतलें वहीं तोड़ देते हैं, जिससे पूरे इलाके में कांच के टुकड़े बिखरे रहते हैं। इससे पर्यावरण को नुकसान पहुंचने के साथ-साथ दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ गया है।
अखिल ने बताया कि गोबिंद सागर झील के आसपास के गांवों के लोग अपने पशुओं को चराने के लिए इस क्षेत्र में लाते हैं, लेकिन नशे में संलिप्त युवाओं की मौजूदगी के कारण पशुओं को चराना मुश्किल हो गया है। कांच के टुकड़ों से पशुओं और राहगीरों के घायल होने की आशंका बनी रहती है, जिससे ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
अमित का कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन और पुलिस ने सख्त कदम नहीं उठाए तो आने वाले समय में गोबिंद सागर झील क्षेत्र पूरी तरह नशे का अड्डा बन सकता है।
वहीं आर्यन ने प्रशासन से मांग की है कि झील क्षेत्र में नियमित पुलिस गश्त बढ़ाई जाए और नशे में संलिप्त लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि गोबिंद सागर झील की प्राकृतिक सुंदरता के साथ-साथ क्षेत्र की शांति और सुरक्षा बनी रह सके।
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संवाद न्यूज एजेंसी
थानाकलां (ऊना)। बीबीएमबी की गोबिंद सागर झील से सटी पंचायत डोहगी के गांव कोटला खास–वेला क्षेत्र में नशे से जुड़ी गतिविधियां लगातार बढ़ती जा रही हैं। शांत झील के आसपास अशांत माहौल बनाया जा रहा है। हालात यह हैं कि शाम ढलते ही यहां युवाओं का जमावड़ा लगने लगता है और खुलेआम नशीले पदार्थों का सेवन किया जा रहा है। इससे न केवल क्षेत्र की शांति भंग हो रही है, बल्कि लोगों में भय का माहौल भी बन गया है।
स्थानीय निवासी अशोक कुमार के अनुसार रोजाना शाम के समय झील के आसपास हुड़दंग और शोर-शराबा आम हो गया है। नशे में धुत युवक शराब पीने के बाद खाली बोतलें वहीं तोड़ देते हैं, जिससे पूरे इलाके में कांच के टुकड़े बिखरे रहते हैं। इससे पर्यावरण को नुकसान पहुंचने के साथ-साथ दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ गया है।
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अखिल ने बताया कि गोबिंद सागर झील के आसपास के गांवों के लोग अपने पशुओं को चराने के लिए इस क्षेत्र में लाते हैं, लेकिन नशे में संलिप्त युवाओं की मौजूदगी के कारण पशुओं को चराना मुश्किल हो गया है। कांच के टुकड़ों से पशुओं और राहगीरों के घायल होने की आशंका बनी रहती है, जिससे ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
अमित का कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन और पुलिस ने सख्त कदम नहीं उठाए तो आने वाले समय में गोबिंद सागर झील क्षेत्र पूरी तरह नशे का अड्डा बन सकता है।
वहीं आर्यन ने प्रशासन से मांग की है कि झील क्षेत्र में नियमित पुलिस गश्त बढ़ाई जाए और नशे में संलिप्त लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि गोबिंद सागर झील की प्राकृतिक सुंदरता के साथ-साथ क्षेत्र की शांति और सुरक्षा बनी रह सके।