भारतीय प्राणी सर्वेक्षण: देश में तितलियों-पतंगों की 13,703 प्रजातियों का कैटलॉग तैयार, 12 साल तक चला शोध
भारतीय प्राणी सर्वेक्षण (जेडएसआई) ने 12 वर्षों के व्यापक शोध के बाद देश में पाई जाने वाली तितलियों और पतंगों (लेपिडोप्टेरा) का पहला समग्र राष्ट्रीय कैटलॉग तैयार किया है। शोधकर्ताओं का दावा है कि लगभग 150 वर्ष बाद इस स्तर पर देश की लेपिडोप्टेरा प्रजातियों का व्यवस्थित दस्तावेजीकरण किया गया है।
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भारत ने जैव विविधता संरक्षण और टैक्सोनॉमिक अनुसंधान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। भारतीय प्राणी सर्वेक्षण (जेडएसआई) ने 12 वर्षों के व्यापक शोध के बाद देश में पाई जाने वाली तितलियों और पतंगों (लेपिडोप्टेरा) का पहला समग्र राष्ट्रीय कैटलॉग तैयार किया है। शोधकर्ताओं का दावा है कि लगभग 150 वर्ष बाद इस स्तर पर देश की लेपिडोप्टेरा प्रजातियों का व्यवस्थित दस्तावेजीकरण किया गया है। इस उपलब्धि के साथ भारत अब दुनिया के उन चुनिंदा 8 से 10 देशों में शामिल हो गया है, जहां कीटों की सर्वाधिक प्रजातियां दर्ज की गई हैं। यह परियोजना पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के तहत पूरी की गई। शोध अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक पत्रिका जूटैक्सा में प्रकाशित हुआ है।
जेडएसआई सोलन के वैज्ञानिक डॉ. नवनीत सिंह और राहुल जोशी ने इस परियोजना में प्रमुख भूमिका निभाई। शोध के अनुसार भारत में लेपिडोप्टेरा की 13,703 प्रजातियां दर्ज की गई हैं। इनमें 3,705 वंश, 240 उप परिवार, 102 परिवार और 31 सुपर फैमिली शामिल हैं। इस कैटलॉग की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें पूर्व के प्रयासों में छूट गई 1,689 प्रजातियों को भी पहली बार शामिल किया गया है। साथ ही विभिन्न परिवारों के वर्गीकरण का पुनर्मूल्यांकन कर उन्हें वैज्ञानिक रूप से व्यवस्थित किया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार टैक्सोनॉमिक कैटलॉग जैव विविधता विज्ञान की आधारशिला होते हैं। इनके माध्यम से किसी क्षेत्र या जीव समूह की प्रजातियों, उनके वैज्ञानिक नाम, वर्गीकरण और अन्य महत्वपूर्ण जानकारियों का प्रमाणिक रिकॉर्ड तैयार होता है। ऐसे दस्तावेज पारिस्थितिकी, जैव-भूगोल, संरक्षण योजनाओं और भविष्य के वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
भारत की समृद्ध विविधता को समझने में करेगा मदद
जेडएसआई की महानिदेशक डॉ. धृति बनर्जी ने इस उपलब्धि पर शोधकर्ताओं को बधाई देते हुए कहा कि यह कैटलॉग देश की जैव विविधता अनुसंधान के लिए एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय संपत्ति साबित होगा। उनके अनुसार इससे न केवल भारत की समृद्ध जैव विविधता को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिलेगी बल्कि पारिस्थितिक निगरानी और वैश्विक संरक्षण रणनीतियों को भी मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के वैज्ञानिक दस्तावेज भविष्य की पीढ़ियों के लिए प्रजातियों का स्थायी अभिलेख तैयार करते हैं।
12 साल तक की मेहनत
इस परियोजना को पूरा करने में 12 वर्षों से अधिक समय लगा। भारत में पहली बार तितलियों और पतंगों की इतनी व्यापक और अद्यतन सूची तैयार की गई है। यह देश के वैज्ञानिक समुदाय के लिए बड़ी उपलब्धि है और कई विकसित देश भी अभी तक इस स्तर का समग्र कैटलॉग तैयार नहीं कर पाए हैं। -डॉ. नवनीत सिंह, वैज्ञानिक एवं प्रभारी जूलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया सोलन कार्यालय