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भाजपा के बाद अब कांग्रेस के लिए महामंथन का वक्त
ब्यूरो/ अमर उजाला, इलाहाबाद
Updated Wed, 15 Jun 2016 04:51 AM IST
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भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के बाद और अधिक सक्रिय हुई कांग्रेस
- फोटो : Getty Images
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संगम नगरी में भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की धमाकेदार परिवर्तन रैली ने कांग्रेस को सोचने पर मजबूर कर दिया है। अब कांग्रेस के लिए भी महामंथन का वक्त आ गया है। कांग्रेस के नए राष्ट्रीय महासिचव एवं यूपी प्रभारी गुलाम नबी आजाद 16 जून को लखनऊ आ रहे हैं।
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उनसे मिलने के लिए इलाहाबाद से उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी (यूपीसीसी) के सदस्यों एवं पदाधिकारियों को लखनऊ बुलाया गया है। इस बीच हाईकमान ने भी स्थानीय कार्यकर्ताओं से भाजपा के कार्यक्रम के बारे में फीडबैक लिया है। इस बारे में उन्हें एक रिपोर्ट भी भेजी जा रही है।
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भाजपा ने राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक और मोदी की परिवर्तन रैली के जरिये इलाहाबाद से यूपी में चुनावी अभियान का उद्घोष कर दिया है। नेहरू-गांधी की धरती से भाजपा का यह उद्घोष कांग्रेस को विचलित कर गया। पार्टी सूत्रों का कहना है कि जल्द ही प्रदेश से लेकर जिला स्तर कांग्रेस में बड़ा फेरबदल होने जा रहा है।
नए पदाधिकारियों के जरिये अब नई पारी खेलने की तैयारी हो रही है। 20 साल बाद यूपी के दोबारा प्रभारी बनाए गए गुलाम नबी आजाद का लखनऊ दौरान इसी से जोड़कर देखा जा रहा है। पार्टी अब भितरघातियों से भी सख्ती से निपटने की तैयारी कर रही है। सूत्रों ने बताया कि भाजपा कार्यकारिणी की बैठक में शामिल होने इलाहाबाद आए कांग्र्रेस के पूर्व नेता विजय बहुगुणा इलाहाबाद में कहां ठहरे और उन्होंने किस-किस कांग्रेसी से मुलाकात की, इसकी सूचना भी हाईकमान को भेजी जा रही है।
पार्टी को आशंका है कि विजय का इलाहाबाद दौरा पार्टी में सेंध लगा सकता है। इसके साथ ही संगठन में भी फेरबदल की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। सवर्णों को साधने के लिए किसी ब्राह्मण चेहरे को प्रदेश की कमान सौंपी जा सकती है। माना जा रहा है कि भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के बाद यूपी कांग्रेस में ऐसे ही कई चौंकाने वाले निर्णय सामने आ सकते हैं।
हालांकि कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता किशोर वार्ष्णेय गुलाम नबी आजाद के लखनऊ दौरे को सिर्फ एक परंपरा बता रहे हैं। उनका कहना है कि आजाद तजुर्बेकार नेता हैं। उनके नेतृत्व में पार्टी हमेशा आगे बढ़ी। 20 साल बाद उन्होंने दोबारा यूपी की जिम्मेदारी मिली है। जहां तक भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारणी की बैठक का सवाल है तो उसे अपनी झूठी उपलब्धियों के बखान से ज्यादा खामियों पर मंथन करने की जरूरत है।

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