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Sabarimala Verdict: 'सुधार के नाम पर धर्म की मूल भावना से छेड़छाड़ नहीं कर सकते', सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Shivam Garg
Updated Wed, 29 Apr 2026 01:23 PM IST
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सुप्रीम कोर्ट (फाइल तस्वीर)
- फोटो : ANI
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केरल के सबरीमाला मंदिर समेत विभिन्न धार्मिक स्थलों पर महिलाओं के प्रवेश से जुड़े मामलों पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान अहम टिप्पणियां सामने आईं। अदालत ने स्पष्ट किया कि सामाजिक सुधार के नाम पर धर्म की मूल संरचना को कमजोर नहीं किया जा सकता।
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इतिहास और परंपरा को नजरअंदाज नहीं कर सकते
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना ने कहा कि भारत की सभ्यता और धार्मिक इतिहास को नजरअंदाज करना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 भी इसी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि से विकसित हुए हैं। अदालत के मुताबिक, वर्तमान को समझने के लिए अतीत को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
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इंदिरा जयसिंह ने रखा पक्ष
वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह ने दलील दी कि सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को लेकर सुप्रीम कोर्ट का पूर्व फैसला अब भी प्रभावी है और उस पर कोई रोक नहीं लगी है। इसके बावजूद महिलाओं को मंदिर में प्रवेश नहीं मिल पा रहा, जिसका कारण राज्य सरकार का पर्याप्त सहयोग न होना बताया गया। उन्होंने यह भी कहा कि अदालत धर्म की परिभाषा तय नहीं करती, बल्कि यह तय करना धार्मिक परंपराओं और मान्यताओं का विषय है।
सुनवाई के दौरान यह भी चर्चा हुई कि क्या संविधान को पूरी तरह नए दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए या फिर ऐतिहासिक संदर्भों को ध्यान में रखते हुए इसकी व्याख्या की जानी चाहिए। इस पर दोनों पक्षों के बीच गहन बहस हुई।

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