Ayushman Bharat Scheme: एआई ने पकड़ा आयुष्मान योजना में 655 करोड़ का फर्जीवाड़ा, अस्पतालों पर सख्त कार्रवाई
आयुष्मान भारत योजना के तहत कुछ अस्पताल कथित तौर पर फर्जी मेडिकल रिपोर्ट और दस्तावेजों के आधार पर बीमा क्लेम हासिल कर रहे थे। सरकार द्वारा अपनाई गई नई एआई आधारित तकनीक ने इस गड़बड़ी का खुलासा हुआ है।
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आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना में फर्जी मेडिकल रिपोर्ट्स के आधार पर अस्पताल बड़ा खेल कर रहे हैं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (एनएचए) ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और मशीन लर्निंग की मदद से 655.04 करोड़ का फर्जी क्लेम पकड़ा है। इसके तहत एक्स-रे रिपोर्ट, ब्लड टेस्ट रिपोर्ट, एमआरआई से सीटी स्कैन तक की फर्जी रिपोर्ट लगाकर अलग-अलग मरीजों के नाम से इस्तेमाल हुआ, मरीज की जानकारी में छेड़छाड़ की गई या एक ही मेडिकल दस्तावेज को अलग-अलग अस्पतालों में क्लेम के लिए लगाया गया। एनएचए के अनुसार, फर्जीवाड़ा करने वाले 2021 अस्पतालों को डिइम्पैनल्ड किया जा चुका है। 590 अस्पतालों को सस्पेंड किया गया और 26 पर एफआईआर दर्ज हुई है। सरकार ने अस्पतालों पर 263.71 करोड़ रुपये का पेनाल्टी भी लगाया है।
एआई आधारित इमेज एनालिटिक्स सिस्टम ने ऐसे मामले पकड़े, जिनमें एक ही एक्स-रे फिल्म को तीन अलग-अलग मरीजों के क्लेम में इस्तेमाल किया गया था। जांच में पाया गया कि केवल मरीज का नाम, आईडी और तारीख बदलकर दस्तावेज जमा किए गए थे। सिस्टम ने इसे "संभावित इमेज टैम्परिंग" के रूप में चिह्नित किया। ऐसे मामले भी पकड़े गए, जहां एक मरीज की रिपोर्ट का इस्तेमाल दो अलग-अलग मरीजों के क्लेम में किया गया। इमेज हैशिंग और डॉक्यूमेंट एनालिटिक्स तकनीक के जरिए समान दस्तावेजों की पहचान कर फर्जीवाड़े का पता लगाया गया।
मशीन लर्निंग आधारित सिस्टम ने घुटना प्रत्यारोपण से जुड़े मामलों में पाया कि एक ही इम्प्लांट बारकोड और विवरण अलग-अलग अस्पतालों के क्लेम में इस्तेमाल किए गए। इससे यह संदेह पैदा हुआ कि इलाज और बिलिंग से संबंधित रिकॉर्ड में हेरफेर किया गया है।
सोशल नेटवर्क एनालिसिस के जरिए एआई ने ऐसे संदिग्ध नेटवर्क भी चिन्हित किए, जहां एक ही यूजर के माध्यम से 20 से ज्यादा लाभार्थी कार्ड बनाए गए और सभी को एक ही अस्पताल में एक ही दिन भर्ती करा दिया गया और सभी की उसी दिन एंजियोप्लास्टी भी कर दी गई।
मेडिकल रिपोर्ट की भी हो रही जांच
ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकग्निशन और डीप लर्निंग तकनीक की मदद से लैब रिपोर्टों की जांच की जा रही है। इसके जरिए ऐसे मामलों को चिन्हित किया गया जहां रक्त में श्वेत रक्त कोशिकाओं (टीएलसी) की संख्या सामान्य सीमा में थी, लेकिन अस्पताल ने गंभीर संक्रमण दिखाकर अधिक राशि का क्लेम किया था।
इन तकनीक को एनएचए ने बनाया हथियार
- फेसियल कंपैरिजन से पहचान सत्यापन
- ऑब्जेक्ट डिटेक्शन से जरूरी दस्तावेजों की पहचान
- इमेज डिडुप्लिकेशन से दोहराए गए दस्तावेजों की पहचान
- फोर्ज्ड डॉक्यूमेंट सैंपलिंग
- डॉक्यूमेंट सिमिलैरिटी जांच
- सोशल नेटवर्क एनालिसिस से संदिग्ध नेटवर्क की पहचान