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MEA: ईरान, ब्रुनेई और माइक्रोनेशिया के राजदूतों ने राष्ट्रपति को सौंपा परिचय, मजबूत होंगे द्विपक्षीय संबंध
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: अमन तिवारी
Updated Mon, 15 Dec 2025 07:15 PM IST
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सार
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक समारोह में तीन देशों के नवनियुक्त राजनयिक प्रतिनिधियों से परिचय पत्र स्वीकार किए। जिन देशों के राजदूतों ने राष्ट्रपति को परिचय पत्र दिया, उनमें ईरान, ब्रुनेई दारुस्सलाम और माइक्रोनेशिया शामिल हैं।
राष्ट्रपति ने स्वीकार किए परिचय पत्र
- फोटो : PTI
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विस्तार
राजधानी नई दिल्ली में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सोमवार को राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक समारोह में ईरान, ब्रुनेई दारुस्सलाम और माइक्रोनेशिया के नवनियुक्त राजदूतों से परिचय पत्र स्वीकार किए। यह प्रक्रिया इन तीनों देशों के साथ भारत के राजनयिक संबंधों को आधिकारिक रूप से मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
तीन देशों के प्रतिनिधियों ने सौंपे परिचय पत्र
राष्ट्रपति कार्यालय द्वारा जारी एक बयान में कहा गया है कि जिन तीन देशों ने अपने परिचय पत्र प्रस्तुत किए, उनमें इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के राजदूत मोहम्मद फथली, ब्रुनेई दारुस्सलाम की उच्चायुक्त सिटी अर्नीफरीजा हाजी मोहम्मद जैनी और फेडरेटेड स्टेट्स ऑफ माइक्रोनेशिया के राजदूत जॉन फ्रिट्ज शामिल थे।
राजनयिक प्रक्रिया का महत्व
परिचय पत्र प्रस्तुत करना एक औपचारिक राजनयिक प्रक्रिया है, जिसके तहत किसी देश का नया प्रतिनिधि मेजबान राज्य के प्रमुख को अपने आधिकारिक दस्तावेज सौंपता है, जिससे उनकी वैधता और अधिकार स्थापित होता है।
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द्विपक्षीय सहयोग को मिलेगा बढ़ावा
इन राजदूतों और उच्चायुक्तों की नियुक्ति से भारत और उनके संबंधित देशों के बीच राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक सहयोग को आगे बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है। इसे मैत्रीपूर्ण संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम के रूप में देखा जा रहा है।
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राष्ट्रपति कार्यालय द्वारा जारी एक बयान में कहा गया है कि जिन तीन देशों ने अपने परिचय पत्र प्रस्तुत किए, उनमें इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के राजदूत मोहम्मद फथली, ब्रुनेई दारुस्सलाम की उच्चायुक्त सिटी अर्नीफरीजा हाजी मोहम्मद जैनी और फेडरेटेड स्टेट्स ऑफ माइक्रोनेशिया के राजदूत जॉन फ्रिट्ज शामिल थे।
राजनयिक प्रक्रिया का महत्व
परिचय पत्र प्रस्तुत करना एक औपचारिक राजनयिक प्रक्रिया है, जिसके तहत किसी देश का नया प्रतिनिधि मेजबान राज्य के प्रमुख को अपने आधिकारिक दस्तावेज सौंपता है, जिससे उनकी वैधता और अधिकार स्थापित होता है।
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द्विपक्षीय सहयोग को मिलेगा बढ़ावा
इन राजदूतों और उच्चायुक्तों की नियुक्ति से भारत और उनके संबंधित देशों के बीच राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक सहयोग को आगे बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है। इसे मैत्रीपूर्ण संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम के रूप में देखा जा रहा है।
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