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लोकसभा में अमित शाह बोले: परिसीमन का विरोध SC-ST सीटों का विरोध, मुझे लगा विपक्ष बिल का समर्थन देगा इसलिए लाए
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: Rahul Kumar
Updated Fri, 17 Apr 2026 06:20 PM IST
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सार
संसद के विशेष सत्र में महिला आरक्षण संशोधन विधेयक और परिसीमन बिल का केंद्रीय गृह मंत्री ने जवाब दिया। उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि परिसीमन के चलते जिस वर्ग यानी एससी और एसटी, जिसकी संख्या बढ़ती है , सीटें भी बढ़ती है। जो परिसीमन का विरोध कर रहे है वह एससी-एसटी का विरोध कर रहे हैं।
गृह मंत्री अमित शाह
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
लोकसभा में परिसीमन और महिला आरक्षण पर शुक्रवार को जारी बहस के दौरान गृह मंत्री अमित शाह ने चर्चा का जवाब दिया। इस दौरान अमित शाह ने कहा कि, इस संशोधन विधेयक का विपक्ष विरोध कर रहा है। इससे पहले लोकसभा के विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सरकार को घेरते हुए कहा था कि पार्टी महिलाओं के मुद्दे के पीछे छिपकर देश के चुनावी नक्शे को बदलने की कोशिश कर रही है। महिलाओं को आरक्षण देने की बजाय असली मुद्दों से ध्यान भटकाया जा रहा है।
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एससी-एसटी की सीटें बढ़ाने का भी विरोध कर रहा विपक्ष
बिल पर चर्चा के दौरान जवाब देते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, बोलने के समय सबने कहा कि हम पक्ष में हैं। इंडी अलायंस के सदस्यों ने अगर-मगर, किंतु-परंतु करके महिला आरक्षण का विरोध किया है। मुझे लगा कि इम्प्लीमेंटेशन के तरीके का विरोध हो है, लेकिन नहीं। केवल और केवल महिला आरक्षण का विरोध है। ये तरीकों का नहीं, बिल का विरोध है। बिल का उद्देश्य महिला सशक्तिकरण है। किसी किसी संसदीय क्षेत्र में 39 लाख वोटर हैं। संविधान में इसका अधिकार सरकार के पास है। जो सीटें बढ़ाने का विरोध कर रहे हैं, वह ये ध्यान में रखें कि एससी-एसटी की सीटें बढ़ाने का भी विरोध कर रहे हैं। संविधान में परिसीमन का प्रावधान है।
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अमित शाह ने कहा, देश की जनता निर्णय करती है। जनता चुनकर सदन में भेजती है। परिसीमन के दौरान रोड, रेलवे आदि की स्थिति को भी सदन में बताया जाएगा। मोदी जी के नेतृत्व में सरकार यह संविधानिक सुधार लेकर आई है। साल 1971 में कांग्रेस सरकार थी। उस वक्त सीटों को फ्रीज कर दी गई थी। 71 से अबतक सीटों की संख्या अब तक फ्रीज रही। 127 सीटें ऐसी हैं जहां 20 लाख से ज्यादा मतदाता हैं। कोई मुझे बताए कि कोई भी सांसद इतने मतदाताओं वाले लोकसभा सीट को कैसे ठीक से देख सकता है।
50 वर्षों तक देश की जनता को जनसंख्या के अनुपात में अधिकार नहीं मिला- शाह
गृह मंत्री ने आगे कहा, 1976 में कांग्रेस पार्टी ने ही परिसीमन से जनता को वंचित रखा था। अब भी कांग्रेस ही जनता को इससे वंचित कर रही है। 50 वर्षों तक देश की जनता को जनसंख्या के अनुपात में अधिकार नहीं मिला। परिसीमन आयोग का एक नियम है, हर लोकसभा सीट पर जाकर एक-एक जनता से जानकारी लेती है। इसलिए इसमें समय लग सकता है। ये जरूरी है कि 2029 के लोकसभा चुनाव के दौरान ही इसे लागू किया जाए। 2029 में महिला आरक्षण देना है तो परिसीमन देना जरूरी है।
गृह मंत्री ने कहा, 1976 में देश की आबादी थी 56.79 अब आबादी काफी बढ़ गई है। सरकार का दायित्व है सदन के सदस्यों की संख्या बढ़े। अगर 2011 की जनगणना को आधार बनाया जाए तो हम 50 फीसदी हर राज्य में सीटें बढ़ाने की बात कर रहे हैं। कोरोना के कारण जनगणना नहीं हो पाया। कोरोना समाप्त होने के बाद देश को काफी समय लगा इससे उबरने में। 2024 लोकसभा चुनाव के बाद कई लोगों ने कहा कि जाति के आधार पर ही जनगणना कराया जाए। सरकार ने साल 2025 में कहा कि हम जाति जनगणना कराएंगे। आने वाले समय में जाति की गणना भी होगी।
अमित शाह ने कहा कि पीएम मोदी ने कैबिनेट में जातिगत जनगणना का प्रस्ताव पास कर दिया है। विपक्ष को जातिगत जनगणना से कोई लेना-देना नहीं है, वे बस सदन में बाधा डालना चाहते हैं। मोदी जी की कैबिनेट ने 2026 की जनगणना जाति के साथ कराने का निर्णय लिया है; इसमें अब कोई 'किंतु-परंतु' नहीं है। विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार जातिगत जनगणना को टालने के लिए यह संशोधन लेकर आई है, जबकि तीन महीने पहले ही इसका पूरा समय-सारणी जारी कर दिया गया था और उसका पहला चरण अभी जारी भी है। फिर विपक्ष ने आरोप लगाया कि इससे दक्षिण भारत की हिस्सेदारी कम हो जाएगी। इस पर मैं कहता हूँ कि दक्षिण तो क्या, छोटे-छोटे राज्यों को भी उनका पूरा अधिकार मिलेगा। सदन में बैठने वाला व्यक्ति क्या यह सोचता है कि वह किस राज्य से आता है? जो भी यहाँ आता है, वह पूरे भारत के लिए शपथ लेता है, किसी खास राज्य या लोकसभा क्षेत्र मात्र के लिए नहीं।
परिसीमन को लेकर भ्रम फैला रहा है- शाह
अमित शाह ने विपक्ष के आरोपों पर सफाई देते हुए कहा, परिसीमन आयोग और संवैधानिक सुधारों को लेकर यह भ्रामक नैरेटिव (फैलाया जा रहा है, जबकि सच्चाई यह है कि इससे किसी भी राज्य का नुकसान नहीं होगा। वर्तमान में कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और केरल जैसे राज्यों की सदन में कुल 129 सीटें हैं, जो परिसीमन और सुधारों के बाद बढ़कर 195 हो जाएंगी। प्रतिशत की दृष्टि से देखें तो यह हिस्सेदारी 23.76% से बढ़कर 23.87% हो जाएगी। इसमें किसी के अहित की कोई गुंजाइश नहीं है। यदि विपक्ष को '50 फीसदी' का प्रावधान लिखित में चाहिए, तो मैं प्रस्ताव देता हूँ कि सदन की कार्यवाही एक घंटे के लिए स्थगित की जाए। मैं इस विधेयक को आवश्यक सुधारों के साथ पुनः प्रस्तुत करने के लिए तैयार हूं।
शाह ने कहा, केसी वेणुगोपाल ने 50 प्रतिशत आरक्षण और 50 प्रतिशत सीटों की बात कही है। मैं इसके लिए पूरी तरह तैयार हूं; सदन की कार्यवाही को एक घंटे के लिए स्थगित किया जाए, मैं अभी इसमें सुधार कर सकता हूं। हमें न तो कोई चोरी करनी है और न ही कुछ लूटना है, इसलिए हमें इस पर कोई आपत्ति नहीं है। दूसरी शर्त के झांसे में नहीं आऊंगा। यह बिल को फिर से टालना चाहते हैं। विपक्ष वोट नहीं देगा तो बिल गिर जाएगा। देश की महिलाएं देख रही हैं कि उनकी राह का रोड़ा कौन है।
इस पर अखिलेश यादव ने पलटवार करते हुए कहा: अब तक का हमारा अनुभव यह रहा है कि यदि भाजपा लिखित में यह भी दे दे कि वे किसी महिला को प्रधानमंत्री बनाएंगे, तब भी हमें उन पर भरोसा नहीं होगा।
अमित शाह ने उत्तर दिया- राहुल गांधी ने जो प्रस्ताव रखा है, उस पर मैं कहना चाहता हूँ कि महिला आरक्षण 2029 से पहले ही लागू होना चाहिए। इस देश की महिलाएं भली-भाँति देख रही हैं कि उनके अधिकार के रास्ते में रोड़ा कौन अटका रहा है। आप शोर मचाकर आज तो बच सकते हैं, लेकिन चुनाव में माताएं और बहनें आपका हिसाब करेंगी।
धर्म के आधार पर आरक्षण नहीं देंगे- अमित शाह
अमित शाह ने कहा- मैं सरकार की, संविधान की और भाजपा की नीति साफ करना चाहता हूं। संविधान धर्म के आधार पर आरक्षण स्वीकार नहीं करता। संविधान में कहीं पर भी धर्म के आधार पर आरक्षण की मान्यता नहीं है। इंडी अलायंस ने तुष्टीकरण के कारण मुस्लिम आरक्षण की मांग खड़ी करना चाहते हैं। हमारी सरकार की नीति साफ है कि धर्म के आधार पर आरक्षण न आज देंगे न किसी को देने देंगे। ओबीसी आरक्षण पर- देश में ओबीसी का सबसे बड़ा कोई विरोध पार्टी है तो कांग्रेस है। इन्होंने चौधरी चरण सिंह और सीताराम केसरी, दोनों को कार्यकाल पूरा करने नहीं दिया। 1957 में काकासाहेब समिति के सुझाव आए, कांग्रेस ने सुझाव को ठंडे बस्ते में डाल दिया। इंदिरा सरकार में मंडल आयोग के सुझान को ठंडे बस्ते में डाल दिया।
कांग्रेस पर निशान साधते हुए अमित शाह ने कहा- नेहरू, इंदिरा और राजीव ने जीवन का सबसे लंबा भाषण मंडल आयोग का विरोध करने में दिया। क्योंकि अब मेल नहीं खा रहा है। 15-20 बार चुनाव हार गए तो ओबीसी का हितैशी बन रहे हैं। अति पिछड़ा समाज के व्यक्ति को पीएम बनाया। किसी ओबीसी को पीएम नहीं बनाया। मोदी सरकार में 27 मंत्री ओबीसी समुदाय से हैं, 40 फीसदी हैं। मोदी सरकार ने ओबीसी कमीशन को मान्यता दी। ओबीसी की सूचियों को संशोधित करने का अधिकार राज्यों को दिया।
'मोदी सरकार ने महिलाओं को आगे बढ़ाया'
अमित शाह ने आगे कहा, वर्ष 1947 से लेकर 2014 तक विपक्ष ने निरंतर ओबीसी हितों का विरोध किया। लेकिन जब प्रधानमंत्री मोदी ने ओबीसी समाज को उनका वास्तविक हक दे दिया, तब आपको लगा कि चुनाव जीतने के लिए यह अनिवार्य है; इसीलिए अब आप ओबीसी के नाम की माला जप रहे हैं। इतिहास गवाह है कि जब एच.डी. देवेगौड़ा प्रधानमंत्री थे, तब 81वें संविधान संशोधन के लिए एक समिति बनी थी। जब उस समिति की रिपोर्ट आई, तो सदन में उसका कड़ा विरोध हुआ। विपक्ष ने बार-बार आरक्षण के मार्ग में बाधाएँ उत्पन्न कीं और आज एक बार फिर सदन में महिला आरक्षण का विरोध शुरू हो गया है। जब ये लोग चुनाव में जाएंगे, तब इन्हें महिलाओं के भारी आक्रोश का सामना करना पड़ेगा और तब इन्हें भागने के लिए रास्ता भी नहीं मिलेगा।
शाह ने कहा, "हमने सदैव महिला सशक्तिकरण का अनुसरण किया है। अखिलेश जी कह रहे थे कि हमने केवल एक महिला मुख्यमंत्री दी, जबकि सुषमा स्वराज और आनंदीबेन पटेल जैसी विभूतियों को मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी भाजपा ने ही दी थी। पिछले 70 वर्षों में कांग्रेस ने कई राज्यों में कभी किसी महिला को मुख्यमंत्री बनने का अवसर नहीं दिया, जबकि हमने इसे धरातल पर उतारा।" हमारी सरकार ने ही देश की पहली आदिवासी महिला, माननीय द्रौपदी मुर्मू जी को महामहिम राष्ट्रपति बनाया। विपक्ष ने पहले भी इस बिल का विरोध किया था और आज भी कर रहे हैं। आज गर्व का विषय है कि देश में 14 लाख महिलाएँ जनप्रतिनिधि के रूप में पंचायतों में सफलतापूर्वक कार्य कर रही हैं।

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