आंध्र प्रदेश: निकाय चुनाव नामांकन में हिंसा, 54 नामजद; सुप्रीम कोर्ट के दखल से रुके चुनाव; पूरा मामला क्या?
आंध्र प्रदेश में निकाय चुनाव नामांकन के दौरान हुई हिंसा के कारण चर्चा में है। 45 अलग-अलग घटनाओं में 54 लोगों को नामजद किया गया है। कई दलों प्रत्याशियों ने नामांकन चोरी या नामांकन हाईजैक करने का आरोप लगाया है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के सख्त रुख के बाद राज्य चुनाव आयोग ने चुनाव प्रक्रिया पर रोक लगा दी है। क्या है पूरा मामला
विस्तार
आंध्र प्रदेश में स्थानीय निकाय चुनावों की नामांकन प्रक्रिया के दौरान दो दिनों में बड़े पैमाने पर हिंसा, तोड़फोड़ और पथराव की घटनाएं सामने आई हैं। राज्य के पुलिस महानिदेशक हरीश कुमार गुप्ता के अनुसार, दो दिन में चुनावी हिंसा की 45 घटना दर्ज की गईं। इसमें बृहस्पतिवार को 13 जिलों में 31 घटना और शुक्रवार को आठ जिलों में 14 घटना दर्ज की गई। इनमें से 22 हिंसा और कानून-व्यवस्था बिगाड़ने जबकि 9 नामांकन पत्रों को छीनने या फाड़ने की घटना से जुड़ी हैं। संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त बल तैनात कर दिया गया है।
कई जगहों पर पथराव
हिंसा का सबसे ज्यादा असर अनंतपुर जिले में दिखा, जहां घटना दर्ज हुई। इसके अलावा अन्नमैया, कडप्पा, प्रकाशम और तिरुपति में 3-3, जबकि चित्तूर, श्री सत्य साईं और पलनाडु में 2-2 मामले सामने आए। उपद्रवियों ने 4 वाहनों को आग के हवाले कर दिया और दो मकानों को नुकसान पहुंचाया। जिनमें से एक को बुलडोजर से ढहा दिया गया। छह स्थानों पर पथराव भी किया गया। पुलिस के मुताबिक, प्रत्याशियों को ले जा रहे एक पुलिस वाहन पर हमले में एक हेड कांस्टेबल गंभीर रूप से घायल हो गया, जबकि एक प्रत्याशी सहित दो लोग बुरी तरह जख्मी हो गए।
54 लोगों को नामजद आरोपी बनाया गया
बताया जाता है कि हिंसक झड़प में टीडीपी, वाईएसआरसीपी, माकपा और निर्दलीय प्रत्याशियों को निशाना बनाया गया। पुलिस ने बताया कि स्थिति को नियंत्रित करने के लिए तीन स्थानों पर लाठीचार्ज करना पड़ा और आंसू गैस के गोले दागे गए। पुलिस ने अब तक 16 प्राथमिकी दर्ज कर मौके से 4 लोगों को हिरासत में लिया है, जबकि 54 लोगों को नामजद आरोपी बनाया गया है। साथ ही 11 अन्य मामलों में रिपोर्ट दर्ज करने की प्रक्रिया जारी है। डीजीपी ने चेतावनी दी है कि राजनीतिक संबद्धता से परे सभी आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की गंभीर धाराओं के तहत कार्रवाई की जाएगी।
आंध्र में नामांकन चोरी का वीडियो वायरल, सुप्रीम कोर्ट के दखल के बाद चुनाव रुके
सोशल मीडिया प्लेटफाॅर्म एक्स पर आंध्र प्रदेश में स्थानीय निकाय और शहरी निकाय चुनावों के दौरान उम्मीदवारों के नामांकन पत्रों को छीने जाने और उन्हें नामांकन करने से रोकने के कई वीडियो वायरल हो रहे हैं। वाईएसआर कांग्रेस समेत विपक्षी दल सत्तारूढ़ तेलुगुदेशम पार्टी और भाजपा के गठबंधन पर वोट चोरी के बाद नामांकन चोरी या नामांकन हाईजैक करने का आरोप लगाया है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के सख्त रुख के बाद राज्य चुनाव आयोग ने चुनाव प्रक्रिया पर रोक लगा दी।
विपक्षी दलों के प्रत्याशियों को डराया-धमकाया गया, मारपीट भी हुई
राज्य में स्थानीय निकायों के चुनाव के लिए नामांकन की प्रक्रिया 18 अक्तूबर तक पूरी होनी थी। वाईएसआर कांग्रेस पार्टी और अन्य विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि राज्य की सत्ताधारी पार्टी टीडीपी और प्रशासन मिलकर विपक्ष के उम्मीदवारों को नामांकन पत्र दाखिल करने से बलपूर्वक रोक रहे हैं। विपक्षी दलों के प्रत्याशियों और उनके प्रस्तावकों का अपहरण किया गया, उन्हें डराया-धमकाया गया और कई जगहों पर उनके साथ मारपीट की गई। साथ ही आरोप लगाया कि कई जगहों पर उम्मीदवारों से जबरन पर्चे छीन लिए गए या उन्हें फाड़ दिया/नष्ट कर दिया गया, ताकि वे आधिकारिक रूप से चुनाव मैदान में उतर ही न सकें।
सत्ताधारी दल पर विपक्षी खेमे का गंभीर आरोप
विपक्षी दलों का दावा है कि सत्ताधारी दल की कोशिश अपने उम्मीदवारों को बिना चुनाव लड़े ही निर्विरोध विजेता घोषित करवाने की है। विपक्ष ने आरोप लगाया कि यदि चुनाव लड़ने का अधिकार ही छीन लिया जाए यानी विपक्षी प्रत्याशी को पर्चा ही न भरने दिया जाए तो यह खतरनाक कदम है। अगर इस प्रवृत्ति को आंध्र प्रदेश में नहीं रोका गया, तो यह लोकतंत्र के लिए एक खतरनाक मिसाल बन जाएगी जो आगे चलकर देश के अन्य हिस्सों में भी अपनाई जा सकती है।
सुप्रीम कोर्ट ने क्यों किया हस्तक्षेप?
इस मामले में वाईएसआर कांग्रेस पार्टी और अन्य प्रभावित पक्षों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट ने इस मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए आंध्र प्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग को निर्देश दिया कि वह उम्मीदवारों की अंतिम सूची का प्रकाशन तुरंत रोके। विपक्षी दलों और उम्मीदवारों की ओर से दर्ज कराई गई उन शिकायतों की निष्पक्ष जांच की जाए, जिनमें उन्हें हिंसा के जरिये नामांकन दाखिल करने से रोके जाने का दावा किया गया है। कोर्ट के सख्त निर्देशों के बाद राज्य निर्वाचन आयोग को चुनावी प्रक्रिया पर रोक लगानी पड़ी।