Apache Helicopter: जोधपुर में आर्मी एविएशन स्क्वाड्रन को जल्द मिलने वाला है टैंक किलर! पाकिस्तान की आएगी शामत
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विस्तार
जोधपुर में तैनात भारतीय सेना की 451 आर्मी एविएशन स्क्वाड्रन पिछले छह माह से 'टैंक किलर' के नाम से मशहूर AH-64E अपाचे अटैक हेलीकॉप्टर के 'उतरने' का इंतजार कर रही है। लेकिन कहते हैं कि सब्र का फल मीठा होता है। आर्मी एविएशन स्क्वाड्रन का ये इंतजार जल्द ही पूरा हो सकता है। भारतीय सेना को दिसंबर में बोइंग से तीन एएच-64ई अपाचे अटैक हेलीकॉप्टरों का पहला बैच मिलने वाला है। वहीं, बाकी के तीन हेलीकॉप्टर अगले तीन महीनों में डिलीवर किए जाएंगे। पहले इन हेलीकॉप्टरों की डिलीवरी इस साल मई से जुलाई के बीच होनी थी।
451 आर्मी एविएशन स्क्वाड्रन में अपाचे होंगे तैनात
इस साल 15 मार्च को पाकिस्तान को देखते हुए भारतीय सेना की आर्मी एविएशन कॉर्प ने जोधपुर के नजदीक नागतलाओ में 451 आर्मी एविएशन स्क्वाड्रन बनाई गई थी। यहां पर भारतीय सेना के पहले अपाचे स्क्वाड्रन की तैनाती की जानी थी। यह बेस अपाचे के ऑपरेशंस के लिए पूरी तरह से तैयार है। यहां तक कि बोइंग की टेक्निकल टीम भी वहां ग्राउंड और मेंटेनेंस एयर स्टाफ को ट्रेनिंग दे चुकी है। सूत्रों ने बताया कि जिस वक्त ये स्क्वाड्रन बनाई गई थी, उस वक्त यह अनुमान लगाया गया था कि अमेरिकी एरोस्पेस कंपनी बोइंग इसके कुछ सप्ताह बाद ही अपाचे हेलीकॉप्टरों की डिलीवरी शुरू कर देगी। लेकिन अपाचे की डिलीवरी में लगातार देरी होती रही। बता दें कि देश में ही बने लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर (LCH) प्रचंड के बाद अपाचे सेना में दूसरा अटैक हेलीकॉप्टर है। 2020 में, रक्षा मंत्रालय ने लगभग 4100 करोड़ रुपये की कीमत में छह अपाचे अटैक हेलीकॉप्टर की खरीद का ऑर्डर दिया था। इस समझौते के तहत, बोइंग को वायुसेना के छह पायलटों और 24 तकनीशियनों को भी अमेरिका में ट्रेनिंग देने का फैसला हुआ था।
सप्लाई चेन में दिक्कत
भारतीय सेना के सूत्रों ने बताया कि सेना को दिसंबर में बोइंग से तीन एएच-64ई अपाचे अटैक हेलीकॉप्टरों का पहला बैच मिलने वाला है। बोइंग की तरफ से देरी के चलते इनकी डिलीवरी में देरी हो रही है। सूत्रों का कहना है कि बोइंग की तरफ से सप्लाई चेन में दिक्कत होने की बात कही गई है, जिसके चलते इनकी मैन्युफैक्चरिंग में देरी हुई है। बोइंग से हुए समझौते के मुताबिक पहले तीन बैच में छह अपाचे की डिलीवरी होनी थी। इनमें से पहले तीन हेलीकॉप्टर मई से जून के बीच में और बाकी तीन हेलीकॉप्टरों की डिलीवरी जुलाई में की जानी थी। सूत्रों का कहना है कि अगस्त में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के दौरे के दौरान अपाचे की डिलीवरी में देरी का मुद्दा अमेरिकी अधिकारियों के सामने उठाया गया था और प्राथमिकता के आधार पर अपाचे को जल्द से जल्द भेजे जाने की बात कही गई। सूत्रों ने खुलासा किया कि इससे पहले अमेरिकी रक्षा प्राथमिकताएं और आवंटन प्रणाली कार्यक्रम में भारत की रेटिंग कम होना भी देरी की वजह थी, हालांकि इस मुद्दे को इस साल अप्रैल में सुलझा लिया गया था।
लद्दाख में सेना को चाहिए LCH
भारतीय वायु सेना के पास पहले से ही 22 अपाचे हेलीकॉप्टर हैं। वहीं भारतीय सेना ने भी अपाचे हेलीकॉप्टरों की मांग की थी। जिसके तहत रेगिस्तानी इलाकों में अपाचे की तैनाती की योजना बनाई गई और पहली 451 आर्मी एविएशन स्क्वाड्रन की स्थापना की गई। पश्चिमी मोर्चे पर पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब देने के लिए इन हेलीकॉप्टरों की तैनाती बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। सूत्रों ने बताया कि रेगिस्तानी इलाकों में अपाचे पहले ही अपनी क्षमताओं को अफगानिस्तान और खाड़ी युद्ध में साबित कर चुका है। लेकिन ये हेलीकॉप्टर लद्दाख के हाई एल्टीटयूड इलाकों में ज्यादा कारगर नहीं है। जिसे देखते हुए सेना लद्दाख में लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर प्रचंड की तैनाती की योजना बना रही है, जिसे अगले साल तक तैनात कर दिया जाएगा। हालांकि सेना 11 और अपाचे हेलीकॉप्टरों की मांग कर रही है।
351 आर्मी एविएशन मिसामारी में पहला एलसीएच स्क्वाड्रन
इस साल जून में ही रक्षा मंत्रालय ने सेना और वायुसेना के लिए एचसीएल को 156 एलसीएच प्रचंड की खरीद के लिए 50,000 करोड़ रुपये का टेंडर जारी किया था। जिसके तहत सेना के लिए 90 और वायुसेना के लिए 66 नए एलसीएच प्रचंड की खरीद की जानी थी। भारतीय सेना की आर्मी एविएशन के पास लंबे समय से यूटिलिटी हेलीकॉप्टरों हैं। लेकिन 2020 में गलवां हिंसा के बाद भारतीय सेना ने 2021 में तीन आर्मी एविएशन ब्रिगेड बनाई थीं, जो जोधपुर, लेह और मिसामारी, असम में हैं। वहीं आर्मी एविएशन में पहले एलसीएच प्रचंड का पहला स्क्वाड्रन जून 2022 में 351 आर्मी एविएशन मिसामारी में बनाया गया था। वहां पांच एलसीएच प्रचंड ऑपरेशन में हैं। इससे पहले वायुसेना ने अक्तूबर में जोधपुर में अपना पहला एलसीएच का स्क्वाड्रन बनाया था।
लद्दाख में पांच महीने तक पड़ा रहा था अपाचे
2015 में 14,910 करोड़ रुपये की कीमत में 22 अपाचे खरीदने का फैसला हुआ, जो भारतीय वायुसेना को डिलीवर किए गए। 11 मई 2019 को पहला अपाचे हेलिकॉप्टर मिला, जिसके बाद सितंबर 2019 में 9 अपाचे एलओसी के पास मौजूद इंडियन एयरफोर्स के पठानकोट एयरबेस पर तैनात किए गये। वहीं, 2020 में पूर्वी लद्दाख में चीन के साथ सैन्य गतिरोध शुरू होने के बाद से कुछ अपाचे हेलीकॉप्टर लद्दाख में तैनात हैं। इनमें से एक अपाचे ने इसी साल अप्रैल में एक ट्रेनिंग के दौरान हाई एल्टीट्यूड इलाके खारदुंग ला के उत्तर में 12000 फीट पर आपातकालीन लैंडिंग की थी। जिसे पिछले महीने 22 सितंबर को ही रिकवर किया गया था।
ये हैं अपाचे की खूबियां
AH-64E अपाचे हेलीकॉप्टर में जनरल इलेक्ट्रिक के 2 टी700-जीई-701 टर्बोशिफ्ट इंजन लगे हैं, जो इसे 1409 किलोवॉट की पावर देते हैं। इसकी अधिकतम रफ्तार 293 किलोमीटर प्रतिघंटा है। इसे उड़ाने के लिए दो पायलट की जरूरत होती है। इसकी लंबाई 58.2 फीट और ऊंचाई 12.8 फीट है। बिना पेलोड के इसका वजन 5165 किलोग्राम होता है। उड़ान के समय यह 10,433 किलोग्राम वजन उठा कर ले जा सकता है। इसकी खूबियों की बात करें, तो इस हेलीकॉप्टर के साथ ड्रोंस भी उड़ाए जा सकते हैं। यानी एक हेलीकॉप्टर से कई ड्रोन को कंट्रोल करके उनसे दुश्मन के इलाके को तबाह किया जा सकता है। इसमें 114 हेलफायर और स्टिंगर मिसाइलों के साथ-साथ हाइड्रा रॉकेट भी लगाए जा सकते हैं। हेलीकॉप्टर में 1,200 राउंड वाली 30 एमएम की चेन गन भी है। इसमें नाइटविजन सिस्टम के लिए नोज माउंटेड सेंसर सूट है, जो इसकी क्षमता को और बढ़ाता है।