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एक्यूआई: बारिश थमी तो फिर बिगड़ी दिल्ली-एनसीआर की हवा, 48 घंटे में पीएम2.5 37.9 फीसदी बढ़ा

Thu, 01 Oct 2026 11:04 AM IST
संजय पांडे अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: संजय पांडे Updated Thu, 01 Oct 2026 11:04 AM IST
सार

मानसून के 92 दिनों में दिल्ली को सिर्फ एक दिन साफ हवा मिल सकी। 30 सितंबर को दिल्ली का एक्यूआई 129 और फरीदाबाद का 101 पहुंचा। हालांकि बारिश थमने के बाद अब फिर से हवा में एक्यूआई का स्तर बढ़ रहा है। 
 

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aqi increase in delhi ncr air after rain weather condition polluting environment
एक्यूआई - फोटो : एएनआई

विस्तार

मानसून की बारिश दिल्ली-एनसीआर की प्रदूषित हवा को कुछ समय के लिए जरूर राहत देती है, लेकिन यह असर ज्यादा देर नहीं टिकता। बारिश रुकने के बाद प्रदूषण फिर तेजी से बढ़ने लगता है। इस साल मानसून के 92 दिनों में दिल्ली को सिर्फ एक दिन अच्छी वायु गुणवत्ता मिली। बारिश के बाद पीएम2.5 का स्तर भी तेजी से बढ़ा और 48 घंटे में इसमें 37.9 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई। मानसून की विदाई के साथ अब सर्दियों में प्रदूषण बढ़ने की आशंका ने दिल्ली-एनसीआर के लिए चिंता बढ़ा दी है।
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सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट (सीएसई) की रिपोर्ट के अनुसार जून से अगस्त 2026 के दौरान दिल्ली में कुल 576.9 मिलीमीटर बारिश हुई, लेकिन 92 दिनों में केवल 9 जुलाई को हवा अच्छी श्रेणी में रही। उस दिन सफदरजंग और पालम मौसम केंद्रों पर बारिश का संयुक्त औसत 67.75 मिलीमीटर था। वहीं 8 अगस्त को मानसून की सबसे ज्यादा एक दिन की बारिश 101.05 मिलीमीटर दर्ज हुई, लेकिन इसके बावजूद उस दिन हवा केवल संतोषजनक रही।
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बारिश में घटा पीएम2.5, दो दिन बाद पहले से ज्यादा
विशेषज्ञों द्वारा बारिश की छह घटनाओं का विश्लेषण किया गया। इसके मुताबिक बारिश शुरू होने से पहले पीएम2.5 का औसत स्तर 40.6 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर था। बारिश के दौरान यह घटकर 32.7 माइक्रोग्राम रह गया। यानी बारिश के कारण पीएम2.5 में करीब 19.5 फीसदी की कमी आई।लेकिन बारिश खत्म होने के बाद यह राहत तेजी से खत्म हो गई। 24 घंटे बाद पीएम2.5 बढ़कर 36.2 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर हो गया। 48 घंटे बाद यह 45.1 माइक्रोग्राम तक पहुंच गया। यानी बारिश के दौरान आई कमी की तुलना में दो दिन बाद पीएम2.5 में 37.9 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। यह बारिश शुरू होने से पहले के स्तर से भी 11.1 फीसदी ज्यादा था।
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92 दिनों में 53 दिन हवा 'मध्यम'
मानसून के दौरान दिल्ली में पीएम2.5 का औसत स्तर 40.2 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रहा। अप्रैल-मई की गर्मियों में यह 60.2 माइक्रोग्राम था। यानी मानसून में पीएम2.5 का औसत स्तर गर्मियों के मुकाबले करीब 33.2 फीसदी कम रहा।इसके बावजूद हवा लगातार साफ नहीं हो सकी। मानसून के 92 दिनों में 53 दिन यानी 57.6 फीसदी दिन हवा मध्यम श्रेणी में रही। 35 दिन हवा संतोषजनक, तीन दिन खराब और केवल एक दिन अच्छी श्रेणी में दर्ज हुई।

बारिश रुकते ही क्यों लौटता है प्रदूषण
सीएसई की अर्बन लैब की डिप्टी प्रोग्राम मैनेजर शरणजीत कौर के मुताबिक दिल्ली में बारिश के दौरान प्रदूषण कम होने और बारिश रुकने के बाद तेजी से बढ़ने का स्पष्ट पैटर्न दिखाई देता है। बारिश पीएम2.5 जैसे कणों को वातावरण से नीचे बैठा देती है, लेकिन प्रदूषण के स्रोतों से उत्सर्जन जारी रहता है।वाहनों, उद्योगों, कचरा जलाने और बिजली उत्पादन से निकलने वाला प्रदूषण बारिश रुकने के बाद फिर वातावरण में जमा होने लगता है। बारिश के बाद जब पीएम2.5 घटता है, तब ओजोन, नाइट्रोजन डाइऑक्साइड और कार्बन मोनोऑक्साइड जैसे प्रदूषक भी एक्यूआई को प्रभावित करने लगते हैं। मानसून के दौरान 20 दिनों में ओजोन प्रमुख प्रदूषक रहा। नाइट्रोजन डाइऑक्साइड की प्रमुख प्रदूषक के रूप में मौजूदगी गर्मियों के तीन फीसदी दिनों से बढ़कर मानसून में 10 फीसदी दिनों तक पहुंच गई। कार्बन मोनोऑक्साइड भी मानसून के सात फीसदी दिनों में प्रमुख प्रदूषक रहा।

दिल्ली-एनसीआर में फिर बढ़ा एक्यूआई
मानसून की विदाई के बाद दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण बढ़ने के संकेत 30 सितंबर के आंकड़ों में भी दिखाई दिए। दिल्ली का एक्यूआई 29 सितंबर के 71 से बढ़कर 30 सितंबर को 129 पहुंच गया। यानी एक दिन में 58 अंकों की बढ़ोतरी हुई और हवा संतोषजनक से मध्यम श्रेणी में पहुंच गई।फरीदाबाद में भी एक्यूआई 97 से बढ़कर 101 हो गया। गाजियाबाद में 137, नोएडा में 138, ग्रेटर नोएडा में 123 और गुरुग्राम में 130 एक्यूआई दर्ज किया गया। इस तरह दिल्ली-एनसीआर के कई प्रमुख शहरों में हवा एक साथ मध्यम श्रेणी में पहुंच गई।

दिल्ली में जनवरी में एक्यूआई 440 तक पहुंचा था
वर्ष 2026 के दौरान दिल्ली में सबसे साफ हवा 9 जुलाई को दर्ज हुई थी, जब एक्यूआई 48 रहा। इसके बाद 8 जुलाई को 59 और 6 सितंबर को 55 एक्यूआई दर्ज हुआ। 4 अगस्त और 22 जुलाई को यह 64 रहा।इसके उलट 18 जनवरी को दिल्ली में साल का सबसे खराब एक्यूआई दर्ज किया गया था। उस दिन एक्यूआई 440 तक पहुंच गया था, जो ‘गंभीर’ श्रेणी में आता है। यह अंतर बताता है कि मौसम बदलने के साथ दिल्ली की वायु गुणवत्ता में कितना बड़ा उतार-चढ़ाव हो सकता है।

एनसीआर में पीएम10 और पीएम2.5 का दबाव
दिल्ली-एनसीआर के अलग-अलग शहरों में प्रदूषण के स्रोतों और प्रमुख प्रदूषकों का स्वरूप भी अलग है। 30 सितंबर के आंकड़ों में बड़ौत, गुरुग्राम, नोएडा और गाजियाबाद समेत कई एनसीआर क्षेत्रों में पीएम2.5 का प्रभाव दिखाई दिया।
वहीं दिल्ली, फरीदाबाद, नोएडा, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा और आसपास के कई इलाकों में पीएम10 भी प्रमुख प्रदूषकों में शामिल रहा। इसका मतलब है कि एनसीआर में वाहनों के धुएं के साथ सड़क और निर्माण गतिविधियों से उठने वाली धूल भी हवा की गुणवत्ता को प्रभावित कर रही है।

मानसून की विदाई के बाद सर्दियों की चुनौती
भारत मौसम विज्ञान विभाग के मुताबिक दक्षिण-पश्चिम मानसून 23 सितंबर को दिल्ली से लौट गया, जबकि इसकी सामान्य वापसी की तारीख 25 सितंबर है। इसके साथ बारिश से मिलने वाली प्राकृतिक सफाई का दौर भी समाप्त हो गया है।अब पोस्ट-मानसून के बाद सर्दियों की स्थितियां बनने लगेंगी। इस दौरान हवा की ऊपरी परत की ऊंचाई कम होने, तापमान में उलटफेर और हवा के ठहराव जैसी परिस्थितियों में प्रदूषक जमीन के करीब फंस सकते हैं।दिल्ली- एनसीआर में पहले से मौजूद प्रदूषण स्रोतों के साथ यह मौसम प्रदूषण की समस्या को और बढ़ा सकता है।सीएसई की कार्यकारी निदेशक अनुमिता रॉयचौधरी के मुताबिक बारिश से मिलने वाली राहत अस्थायी है। यदि भारी बारिश भी दिल्ली को लगातार ‘अच्छी’ हवा नहीं दे पा रही और बारिश खत्म होने के 48 घंटे के भीतर पीएम2.5 फिर बढ़ रहा है, तो यह शहर के ऊंचे आधारभूत प्रदूषण स्तर की ओर संकेत करता है।


सिर्फ आपतकालीन प्रतिबंधों से काम नहीं चलेगा 
दिल्ली-एनसीआर की वायु प्रदूषण समस्या से निपटने के लिए केवल सर्दियों में आपातकालीन प्रतिबंध लगाने से काम नहीं चलेगा। वाहनों, उद्योगों, निर्माण गतिविधियों, कचरा जलाने और डीजल जनरेटर जैसे स्रोतों से होने वाले उत्सर्जन को पूरे साल नियंत्रित करना जरूरी है।इसके लिए सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करने, इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने, माल ढुलाई में शून्य-उत्सर्जन विकल्प बढ़ाने, उद्योगों में स्वच्छ ईंधन और विद्युतीकरण, खुले में कचरा जलाने पर रोक, निर्माण कचरे के बेहतर प्रबंधन और डीजल जनरेटर पर निर्भरता कम करने जैसे उपायों की जरूरत है।अध्ययन में यह भी स्पष्ट किया गया है कि बारिश और पीएम2.5 के संबंध का आकलन किया गया है, लेकिन बारिश के प्रभाव को हवा की गति, दिशा, मिक्सिंग हाइट, आर्द्रता और स्थानीय उत्सर्जन में बदलाव जैसे दूसरे मौसम संबंधी कारकों से पूरी तरह अलग करके नहीं देखा गया है।

एक्यूआई की छह श्रेणियां
0-50 : अच्छी
51-100 : संतोषजनक
101-200 : मध्यम
201-300 : खराब
301-400 : बहुत खराब
401-500 : गंभीर
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