Women In Army: 'इन्फैंट्री में महिलाओं की भर्ती को सेना तैयार', सेना प्रमुख बोले- फैसला समाज की सोच पर निर्भर
सेना प्रमुख ने कहा कि भारतीय सेना महिलाओं को इन्फैंट्री में शामिल करने के लिए तैयार है, लेकिन यह समाज की स्वीकार्यता और समान मानकों पर निर्भर करेगा। महिलाओं को कमजोर नहीं माना जाएगा और नई भूमिकाएं उनके प्रदर्शन के आधार पर चरणबद्ध तरीके से खोली जाएंगी।
विस्तार
भारतीय सेना इन्फैंट्री (पैदल सेना) में महिलाओं को शामिल करने के लिए पूरी तरह तैयार है, लेकिन यह फैसला समाज की स्वीकार्यता पर निर्भर करेगा। यह बात जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कही।
महिलाओं को कमजोर वर्ग के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए
जनरल द्विवेदी ने कहा कि मैंने पहले भी कहा है कि महिलाएं काली माता का स्वरूप है उन्हें किसी भी तरह से कमजोर वर्ग के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि सेना की सोच पूरी तरह जेंडर न्यूट्रल है और महिलाओं-पुरुषों के बीच किसी तरह का भेदभाव नहीं किया जाता।
#WATCH | Delhi: Indian Army Chief General Upendra Dwivedi says, "... Women cannot be seen as a vulnerable commodity, it has to be strong enough. If we look at our society as of today, the society still has girls' schools, boys' schools, girls' colleges, and boys' colleges and the… pic.twitter.com/i7ZZifwgUN
— ANI (@ANI) January 13, 2026
उन्होंने कहा कि अगर मानक एक जैसे हों, क्षमताएं समान हों और एक राष्ट्र के रूप में हमारा समाज इसे स्वीकार करने के लिए तैयार हो, तो महिलाओं को लड़ाकू भूमिका में शामिल किया जा सकता है और यह कल से भी संभव है।
महिलाओं के प्रदर्शन पर नए सैन्य खोले जाएंगे
जनरल द्विवेदी ने कहा है कि सेना में एक समान मानक अनिवार्य हैं, लेकिन चिकित्सा और संचालन से जुड़ी व्यावहारिक चुनौतियों के कारण इन्हें लागू करना आसान नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि महिलाओं के लिए नए सैन्य रोल खोलने का फैसला उनके प्रदर्शन के आंकड़ों के आधार पर किया जाएगा।
महिलाओं के लिए भूमिकाएं चरणबद्ध तरीके से खुलेंगी
सेना प्रमुख ने कहा कि महिलाओं की भूमिका का विस्तार क्रमिक प्रक्रिया होगी। इसकी शुरुआत सहायक बलों से होगी, इसके बाद लड़ाकू बलों और अंततः स्पेशल फोर्सेज तक रास्ता खुलेगा। उन्होंने इसे क्रमबद्ध और स्वागत योग्य सामाजिक बदलाव बताया।
सेना में महिलाओं की मौजूदा स्थिति
महिलाओं की संख्या को लेकर सेना प्रमुख ने जानकारी दी कि:
- भारतीय सेना में इस समय करीब 8,000 महिला अधिकारी कार्यरत हैं।
- एनडीए में फिलहाल 60 महिला सेना कैडेट हैं और हर साल 20 महिला कैडेट शामिल करने की योजना है।
- अधिकारी प्रशिक्षण अकादमी (ओटीए) में हर साल 120 महिला अधिकारियों की भर्ती की जा रही है।
- प्रादेशिक सेना में भी महिलाओं के लिए दरवाजे खोले गए हैं, जहां 110 पद उपलब्ध कराए जाएंगे।
- हालांकि, प्रादेशिक सेना (ओआरएल) में महिलाओं की भर्ती के लिए आर्मी एक्ट की धारा 12 में संशोधन जरूरी होगा। सेना का लक्ष्य 2032 तक ओआरएल में महिलाओं की भर्ती को 12 गुना बढ़ाने का है।
भविष्य की जंग के लिए सेना का आधुनिकीकरण
वैश्विक संघर्षों से सबक लेते हुए जनरल द्विवेदी ने कहा कि भारतीय सेना का आधुनिकीकरण अब सर्वोच्च प्राथमिकता बन चुका है। उन्होंने बताया कि:
- उन्नत क्षमताओं वाली ड्रोन रेजीमेंट्स तैयार की जा रही हैं।
- रॉकेट-सह-मिसाइल बल, लोइटरिंग म्यूनिशन और नई तकनीक से लैस यूनिट्स पर काम हो रहा है।
- 90 प्रतिशत से अधिक गोला-बारूद अब स्वदेशी है, जो आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ी उपलब्धि है।
- ड्रोन और नई सैन्य इकाइयों पर फोकस
ऑपरेशन सिंदूर के बाद सेना की ताकत बढ़ी
ऑपरेशन सिंदूर के बाद ड्रोन क्षमताओं को नई गति मिली है। सेना प्रमुख के अनुसार:
- प्रत्येक कमांड में 5,000 ड्रोन तक निर्माण की क्षमता विकसित की गई है।
- खतरे की स्थिति में यह क्षमता 20,000 से लेकर एक लाख ड्रोन तक बढ़ाई जा सकती है।
उन्होंने बताया कि अब तक 13 भैरव बटालियनें खड़ी की जा चुकी हैं, जो पैदल सेना की घातक टुकड़ियों और स्पेशल फोर्सेज के बीच की खाई को पाटेंगी। इसके अलावा, आर्टिलरी में दिव्यास्त्र बैटरी बनाई गई है, जो डिवीजन कमांडर को ड्रोन और आधुनिक प्रणालियों से लैस समर्थन देगी। काउंटर-ड्रोन सिस्टम के लिए भी नई रेजीमेंट्स तैयार की जा रही हैं।
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