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अनुच्छेद 370 भारत के संविधान में एक अस्थायी प्रावधान के रूप में शामिल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमर शर्मा
Updated Wed, 10 Jul 2019 06:35 PM IST
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जी किशन रेड्डी
- फोटो : PTI
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सरकार ने बुधवार को बताया कि जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाला अनुच्छेद 370 भारत के संविधान में एक अस्थायी प्रावधान के रूप में शामिल है।
गृह राज्य मंत्री जी किशन रेड्डी ने राज्यसभा को एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।
उन्होंने बताया ‘‘वर्तमान में अनुच्छेद 370 भारत के संविधान के भाग 21 (अस्थायी, संक्रमणकालीन और विशेष उपबंध) में जम्मू और कश्मीर के संबंध में एक अस्थायी प्रावधान के रूप में शामिल है।’’
रेड्डी ने बताया कि वर्तमान मे अनुच्छेद 35क, संविधान (जम्मू और कश्मीर पर लागू) आदेश, 1954 में निहित है जिसे भारत के राष्ट्रपति द्वारा अनुच्छेद 370 के अंतर्गत जारी संविधान आदेश के माध्यम से जोड़ा गया था।
उन्होने बताया ‘‘जम्मू और कश्मीर भारत का एक अभिन्न हिस्सा है। भारत के संविधान से संबंधित मामले आंतरिक विषय हैं और उस पर निर्णय लेने का अधिकार केवल भारतीय संसद का है। इस मामले में किसी विदेशी सरकार या संगठन को कुछ भी कहने का अधिकार नहीं है।’’
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एक अन्य प्रश्न के लिखित उत्तर में रेड्डी ने बताया ‘‘जम्मू कश्मीर राज्य सहित भारत का कोई भी नागरिक भारत के संविधान या जम्मू कश्मीर के संविधान के प्रावधानों के तहत दोहरी नागरिकता के लिए पात्र नहीं है।’’
गृह राज्य मंत्री जी किशन रेड्डी ने राज्यसभा को एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।
उन्होंने बताया ‘‘वर्तमान में अनुच्छेद 370 भारत के संविधान के भाग 21 (अस्थायी, संक्रमणकालीन और विशेष उपबंध) में जम्मू और कश्मीर के संबंध में एक अस्थायी प्रावधान के रूप में शामिल है।’’
रेड्डी ने बताया कि वर्तमान मे अनुच्छेद 35क, संविधान (जम्मू और कश्मीर पर लागू) आदेश, 1954 में निहित है जिसे भारत के राष्ट्रपति द्वारा अनुच्छेद 370 के अंतर्गत जारी संविधान आदेश के माध्यम से जोड़ा गया था।
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उन्होने बताया ‘‘जम्मू और कश्मीर भारत का एक अभिन्न हिस्सा है। भारत के संविधान से संबंधित मामले आंतरिक विषय हैं और उस पर निर्णय लेने का अधिकार केवल भारतीय संसद का है। इस मामले में किसी विदेशी सरकार या संगठन को कुछ भी कहने का अधिकार नहीं है।’’
एक अन्य प्रश्न के लिखित उत्तर में रेड्डी ने बताया ‘‘जम्मू कश्मीर राज्य सहित भारत का कोई भी नागरिक भारत के संविधान या जम्मू कश्मीर के संविधान के प्रावधानों के तहत दोहरी नागरिकता के लिए पात्र नहीं है।’’