Arunachal-Assam: अरुणाचल-असम सीमा विवाद सुलझाने की दिशा में बड़ा कदम, बाउंड्री पिलर लगाने का काम शुरू
अरुणाचल प्रदेश के पक्के केस्सांग और असम के बिस्वनाथ जिले की सीमा विवाद को खत्म करने के लिए औपचारिक रूप से बाउंड्री पिलर लगाने का काम शुरू हुआ। दोनों राज्यों और सर्वे ऑफ इंडिया के प्रतिनिधि इसे देख रहे हैं। यह कदम शांतिपूर्ण समाधान और स्थानीय स्थिरता की दिशा में महत्वपूर्ण है।
विस्तार
अरुणाचल प्रदेश के पक्के केस्सांग जिले और असम के बिस्वनाथ जिले के बीच लंबे समय से चल रहे सीमा विवाद को सुलझाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। अधिकारियों के अनुसार, दोनों राज्यों के बीच बाउंड्री पिलर लगाने का औपचारिक का लगभग-लगभग शुरू हो गया है। यह काम सोमवार से शुरू हुआ और इसे दोनों राज्यों के अधिकारियों के साथ-साथ केंद्र सरकार के सर्वे ऑफ इंडिया के प्रतिनिधि भी देख रहे हैं।
अधिकारियों ने बताया कि यह कदम एक समझौते के बाद उठाया गया है, जिसे विवाद को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने के लिए किया गया था। इसका उद्देश्य सीमा के पास रहने वाले लोगों के लिए स्पष्टता और स्थिरता लाना और दोनों राज्यों के बीच शांति, सहयोग और भाईचारे को बढ़ावा देना है।
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मंत्री बियूराम वहगे ने कदम को बताया एतिहासिक
राज्य के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री बियूराम वहगे ने इस कदम को ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया में दोनों राज्यों के अधिकारियों और केंद्र सरकार के प्रतिनिधियों की भागीदारी है। वहगे का कहना है कि यह कदम उस ऐतिहासिक समझौते के बाद उठाया गया है, जो लंबे समय से लंबित सीमा विवाद को सुलझाने का मार्ग प्रशस्त करता है। इससे स्थायी शांति, सहयोग और भाईचारे को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने इस पहल को आगे बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री पेमा खांडू और असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा का भी धन्यवाद दिया।
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कैसे शुरू हआ विवाद, जानिए पूरा मामला
बता दें कि यह विवाद जुलाई 2022 में हुए नमसाई घोषणा-पत्र के बाद तेजी से हल होने की ओर बढ़ा। इस समझौते ने विवाद को शांतिपूर्ण और स्थायी तरीके से सुलझाने की नींव रखी। दोनों राज्यों ने मिलकर कदम-दर-कदम और सहयोगी दृष्टिकोण अपनाया। सबसे पहले आसान और कम जटिल क्षेत्रों से काम शुरू किया गया।
इसके लिए क्षेत्रीय समितियां बनाई गईं, जिनमें दोनों राज्यों के मंत्री और अधिकारी शामिल थे। ये समितियां मैदानी दौरे, ऐतिहासिक दस्तावेजों की जाँच और स्थानीय समुदायों से बातचीत कर रही हैं, ताकि सभी के लिए स्वीकार्य समाधान निकाला जा सके। ऐसे में अब इस पहल से न सिर्फ सीमा पर रहने वाले लोगों को फायदा होगा, बल्कि अरुणाचल प्रदेश और असम के बीच दोस्ती और सहयोग भी मजबूत होगा।
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