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'लैला कौन, बी-टीम कौन?': AIMIM प्रमुख ओवैसी ने विपक्ष पर कसा तंज, बुलडोजर एक्शन और एसआईआर पर भी उठाए सवाल
एएनआई, हैदराबाद।
Published by: राकेश कुमार
Updated Thu, 25 Jun 2026 05:21 PM IST
सार
असदुद्दीन ओवैसी ने दल बदलने वाले नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा कि अब दूसरों में भाजपा की बी टीम बनने की होड़ है। इसके साथ ही उन्होंने फर्जी एनकाउंटर, बिना कानूनी प्रक्रिया के बुलडोजर चलाने और तेलंगाना में वोटर लिस्ट संशोधन के कारण आम जनता की नागरिकता पर आने वाले संकट को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने और क्या-क्या कहा है? जानिए...
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असदुद्दीन ओवैसी, एआईएमआईएम प्रमुख
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
एआईएमआईएम प्रमुख और हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने एक बार फिर देश की राजनीति, कानून व्यवस्था और नागरिकता से जुड़े मुद्दों पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने विपक्षी दलों के दलबदल पर तंज कसा और उत्तर प्रदेश व महाराष्ट्र की सरकारों को आड़े हाथों लिया।
'बी-टीम' कौन है? ओवैसी का पलटवार
शिवसेना-यूबीटी के सांसदों में हुई टूट पर बोलते हुए ओवैसी ने कहा कि आज हर कोई अपनी पार्टी छोड़कर भाग रहा है। उन्होंने याद दिलाया कि पहले विपक्षी दल एआईएमआईएम को भारतीय राजनीति की 'लैला' कहते थे। उन पर आरोप लगाया जाता था कि वे सिर्फ अपने फायदे के लिए या भाजपा को जिताने के लिए चुनाव लड़ते हैं। ओवैसी ने तंज कसते हुए कहा कि अब जब वे लोग खुद भाग रहे हैं, तो हमें क्या कहना चाहिए? ऐसा लगता है कि विपक्षी दलों में अब इस बात की होड़ मची है कि भाजपा की 'बी-टीम' कौन बनेगा। जो लोग कल तक हमें गाली दे रहे थे, वे आज भाजपा के साथ आराम से बैठे हैं।
'फर्जी एनकाउंटर' और 'बुलडोजर न्याय' पर जताई आपत्ति
28 साल के भारत भूषण तिवारी के कथित पुलिस एनकाउंटर पर ओवैसी ने कड़ा विरोध जताया। ओवैसी ने कहा कि पुलिस चाहती तो उन्हें आसानी से गिरफ्तार करके अदालत में पेश कर सकती थी। देश बंदूक की नोक से नहीं, बल्कि कानून के शासन से चलना चाहिए।
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उन्होंने सरकारों की ओर से बिना कानूनी प्रक्रिया के घर गिराने के लिए बुलडोजर के इस्तेमाल की भी निंदा की। ओवैसी ने कहा कि किसी को गिरफ्तार करके सीधे एनकाउंटर कर देना लोकतंत्र को कमजोर करता है। देश में स्वतंत्र अदालतें हैं और सजा तय करने का काम अदालतों का ही होना चाहिए।
यह भी पढ़ें: 'RSS से सवाल पर तड़प उठती है भाजपा': प्रियांक खरगे का बड़ा हमला, मोहन भागवत ने बताया राजनीतिक नाटक
तेलंगाना में वोटर लिस्ट और नागरिकता का खतरा
तेलंगाना में शुरू हुए वोटर लिस्ट के विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) पर ओवैसी ने जनता को सचेत किया। उन्होंने कहा कि पहले चुनाव आयोग ने कहा था कि अधिकारी मतदाताओं को पहले से भरा हुआ फॉर्म देंगे। लेकिन अब मतदाताओं को खुद दो फॉर्म भरने पड़ रहे हैं, जिसमें उन्हें 2002 की पुरानी वोटर लिस्ट से अपने और अपने परिवार के नाम ढूंढकर लिखने होंगे।
ओवैसी ने कहा कि तेलंगाना में स्थायी निवास प्रमाण पत्र और फैमिली रजिस्टर जैसे जरूरी दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं। साथ ही, सिर्फ आधार कार्ड के दम पर यह काम नहीं हो सकता। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि अंतिम वोटर लिस्ट में किसी का नाम छूट जाता है, तो सुप्रीम कोर्ट के नियम के अनुसार उनके नाम केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजे जाएंगे। इससे आम लोगों की नागरिकता पर सीधा सवाल खड़ा हो सकता है।
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'बी-टीम' कौन है? ओवैसी का पलटवार
शिवसेना-यूबीटी के सांसदों में हुई टूट पर बोलते हुए ओवैसी ने कहा कि आज हर कोई अपनी पार्टी छोड़कर भाग रहा है। उन्होंने याद दिलाया कि पहले विपक्षी दल एआईएमआईएम को भारतीय राजनीति की 'लैला' कहते थे। उन पर आरोप लगाया जाता था कि वे सिर्फ अपने फायदे के लिए या भाजपा को जिताने के लिए चुनाव लड़ते हैं। ओवैसी ने तंज कसते हुए कहा कि अब जब वे लोग खुद भाग रहे हैं, तो हमें क्या कहना चाहिए? ऐसा लगता है कि विपक्षी दलों में अब इस बात की होड़ मची है कि भाजपा की 'बी-टीम' कौन बनेगा। जो लोग कल तक हमें गाली दे रहे थे, वे आज भाजपा के साथ आराम से बैठे हैं।
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'फर्जी एनकाउंटर' और 'बुलडोजर न्याय' पर जताई आपत्ति
28 साल के भारत भूषण तिवारी के कथित पुलिस एनकाउंटर पर ओवैसी ने कड़ा विरोध जताया। ओवैसी ने कहा कि पुलिस चाहती तो उन्हें आसानी से गिरफ्तार करके अदालत में पेश कर सकती थी। देश बंदूक की नोक से नहीं, बल्कि कानून के शासन से चलना चाहिए।
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उन्होंने सरकारों की ओर से बिना कानूनी प्रक्रिया के घर गिराने के लिए बुलडोजर के इस्तेमाल की भी निंदा की। ओवैसी ने कहा कि किसी को गिरफ्तार करके सीधे एनकाउंटर कर देना लोकतंत्र को कमजोर करता है। देश में स्वतंत्र अदालतें हैं और सजा तय करने का काम अदालतों का ही होना चाहिए।
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तेलंगाना में वोटर लिस्ट और नागरिकता का खतरा
तेलंगाना में शुरू हुए वोटर लिस्ट के विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) पर ओवैसी ने जनता को सचेत किया। उन्होंने कहा कि पहले चुनाव आयोग ने कहा था कि अधिकारी मतदाताओं को पहले से भरा हुआ फॉर्म देंगे। लेकिन अब मतदाताओं को खुद दो फॉर्म भरने पड़ रहे हैं, जिसमें उन्हें 2002 की पुरानी वोटर लिस्ट से अपने और अपने परिवार के नाम ढूंढकर लिखने होंगे।
ओवैसी ने कहा कि तेलंगाना में स्थायी निवास प्रमाण पत्र और फैमिली रजिस्टर जैसे जरूरी दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं। साथ ही, सिर्फ आधार कार्ड के दम पर यह काम नहीं हो सकता। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि अंतिम वोटर लिस्ट में किसी का नाम छूट जाता है, तो सुप्रीम कोर्ट के नियम के अनुसार उनके नाम केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजे जाएंगे। इससे आम लोगों की नागरिकता पर सीधा सवाल खड़ा हो सकता है।