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पूर्वोत्तर में ऐतिहासिक समझौता: असम-नागालैंड सीमा पर तेल-गैस खोज का रास्ता साफ, शाह ने की AFSPA हटाने की बात
पीटीआई, नई दिल्ली।
Published by: राकेश कुमार
Updated Thu, 11 Jun 2026 09:58 PM IST
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सार
असम और नागालैंड सीमा पर कच्चे तेल और गैस की खोज के लिए एक ऐतिहासिक त्रिपक्षीय समझौता हुआ है। दोनों राज्य 50-50 प्रतिशत के फॉर्मूले पर सहमत हुए हैं, जिसे गृहमंत्री अमित शाह ने 'राष्ट्र प्रथम' की भावना कहा है। यह समझौता पूर्वोत्तर में शांति और आफ्सपा हटाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
अमित शाह, केंद्रीय गृह मंत्री
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
पूर्वोत्तर भारत के विकास और शांति के लिए आज का दिन बेहद ऐतिहासिक रहा। दिल्ली में भारत सरकार, असम सरकार और नागालैंड सरकार के बीच एक बड़ा त्रिपक्षीय समझौता हुआ है। यह समझौता असम और नागालैंड की सीमा पर कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की संयुक्त खोज के लिए किया गया है। सीमावर्ती विवादों के सुलझने और इस तरह के शांति समझौतों से इस पूरे क्षेत्र से (आफ्सपा) सशस्त्र बल विशेष शक्ति अधिनियम को पूरी तरह हटाने की दिशा में भी रास्ते खुलेंगे।
गृह मंत्री अमित शाह ने क्या-क्या कहा?
इस मौके पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि यह पल इतिहास में दर्ज किया जाएगा। यह कदम पूर्वोत्तर की तस्वीर बदलने वाला साबित होगा। गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि इस समझौते के पीछे 'राष्ट्र प्रथम' की भावना है। आज पूरा पूर्वोत्तर देश के विकास के लिए एक साथ आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने समृद्ध और विवाद-मुक्त पूर्वोत्तर का जो सपना देखा था, यह समझौता उस दिशा में एक बहुत बड़ा कदम है। इससे पूरे क्षेत्र में विकास का एक नया सवेरा आएगा।
50-50 के फॉर्मूले पर बनी आपसी सहमति
दोनों राज्यों के बीच सीमा को लेकर कुछ पुरानी चिंताएं और शंकाएं जरूर हैं। लेकिन विकास को रफ्तार देने के लिए दोनों सरकारों ने परिपक्वता दिखाई है। दोनों राज्यों ने तय किया है कि सीमा विवाद का फैसला जब आएगा तब देखा जाएगा, लेकिन अभी काम नहीं रुकेगा। इसी सोच के साथ दोनों सरकारें 50-50 प्रतिशत के राजस्व साझाकरण फॉर्मूले पर सहमत हुई हैं।
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इस सहमति से देश में तेल और गैस की खोज का काम बिना किसी रुकावट के आगे बढ़ेगा। गृहमंत्री ने साफ कहा कि तेल और गैस एक राष्ट्रीय संपत्ति है, इसलिए इसे देश के हित में निकालना बेहद जरूरी है। इस समझौते से न केवल तेल और गैस की खोज बढ़ेगी, बल्कि भविष्य में खनिज खनन के नए रास्ते भी खुलेंगे।
यह भी पढ़ें: TMC में बगावत: काकोली घोष बोलीं- अभी भी संपर्क में हैं 20 सांसद, बढ़ सकता है आंकड़ा; कल्याण बनर्जी पर भड़कीं
छह तेल क्षेत्रों से आगे भी मिलेगा पूरा सहयोग
सहयोग का यह सिलसिला केवल यहीं तक सीमित नहीं रहने वाला है। गृहमंत्री अमित शाह ने बताया कि नागालैंड के मुख्यमंत्री ने इस मामले में आगे भी पूरा भरोसा दिया है। नागालैंड सरकार ने कहा है कि वर्तमान में तय किए गए छह तेल क्षेत्रों के अलावा भी वे हर संभव मदद के लिए तैयार हैं। इस बड़े कदम से दोनों राज्यों के बीच आपसी विश्वास मजबूत होगा, आफ्सपा जैसी व्यवस्थाओं की जरूरत खत्म होगी और भारत ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की ओर तेजी से कदम बढ़ाएगा।
गृह मंत्री अमित शाह ने क्या-क्या कहा?
इस मौके पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि यह पल इतिहास में दर्ज किया जाएगा। यह कदम पूर्वोत्तर की तस्वीर बदलने वाला साबित होगा। गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि इस समझौते के पीछे 'राष्ट्र प्रथम' की भावना है। आज पूरा पूर्वोत्तर देश के विकास के लिए एक साथ आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने समृद्ध और विवाद-मुक्त पूर्वोत्तर का जो सपना देखा था, यह समझौता उस दिशा में एक बहुत बड़ा कदम है। इससे पूरे क्षेत्र में विकास का एक नया सवेरा आएगा।
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50-50 के फॉर्मूले पर बनी आपसी सहमति
दोनों राज्यों के बीच सीमा को लेकर कुछ पुरानी चिंताएं और शंकाएं जरूर हैं। लेकिन विकास को रफ्तार देने के लिए दोनों सरकारों ने परिपक्वता दिखाई है। दोनों राज्यों ने तय किया है कि सीमा विवाद का फैसला जब आएगा तब देखा जाएगा, लेकिन अभी काम नहीं रुकेगा। इसी सोच के साथ दोनों सरकारें 50-50 प्रतिशत के राजस्व साझाकरण फॉर्मूले पर सहमत हुई हैं।
इस सहमति से देश में तेल और गैस की खोज का काम बिना किसी रुकावट के आगे बढ़ेगा। गृहमंत्री ने साफ कहा कि तेल और गैस एक राष्ट्रीय संपत्ति है, इसलिए इसे देश के हित में निकालना बेहद जरूरी है। इस समझौते से न केवल तेल और गैस की खोज बढ़ेगी, बल्कि भविष्य में खनिज खनन के नए रास्ते भी खुलेंगे।
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छह तेल क्षेत्रों से आगे भी मिलेगा पूरा सहयोग
सहयोग का यह सिलसिला केवल यहीं तक सीमित नहीं रहने वाला है। गृहमंत्री अमित शाह ने बताया कि नागालैंड के मुख्यमंत्री ने इस मामले में आगे भी पूरा भरोसा दिया है। नागालैंड सरकार ने कहा है कि वर्तमान में तय किए गए छह तेल क्षेत्रों के अलावा भी वे हर संभव मदद के लिए तैयार हैं। इस बड़े कदम से दोनों राज्यों के बीच आपसी विश्वास मजबूत होगा, आफ्सपा जैसी व्यवस्थाओं की जरूरत खत्म होगी और भारत ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की ओर तेजी से कदम बढ़ाएगा।