संसद में राहुल के 'चीन राग' पर भाजपा आक्रामक: रिजिजू बोले- स्पीकर का अपमान हुआ, कांग्रेस पाप के लिए माफी मांगे
संसद में राहुल गांधी के चीन से जुड़े बयान पर भाजपा आक्रामक हो गई है। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने लोकसभा अध्यक्ष के अपमान का आरोप लगाते हुए कांग्रेस से माफी की मांग की। जानिए किसने क्या कहा...
विस्तार
राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान लोकसभा में उस वक्त विवाद खड़ा हो गया जब विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने अपने संबोधन में कथित रूप से संसदीय नियमों की अनदेखी की। राहुल गांधी के चीन से जुड़े बयान को लेकर भाजपा ने सदन की मर्यादा तोड़ने और लोकसभा अध्यक्ष का अपमान करने का गंभीर आरोप लगाया। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की है।
राहुल गांधी को लोकसभा अध्यक्ष की सख्त चेतावनी
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने राहुल गांधी को सदन में नियमों के तहत बोलने की सख्त हिदायत दी। अध्यक्ष ने स्पष्ट कहा कि अगर कोई सदस्य तथ्यों और संसदीय नियमों के दायरे में बात नहीं रखता है, तो उन्हें दूसरे वक्ताओं को अवसर देने के लिए बाध्य होना पड़ेगा। यह चेतावनी उस वक्त दी गई जब राहुल गांधी ने चीन से जुड़े एक गैर-सूचीबद्ध मुद्दे को उठाने की कोशिश की।
राहुल गांधी देश से माफी मांगें- किरेन रिजिजू
केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने कहा कि राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा के लिए सभी सांसद सदन में मौजूद थे और राहुल गांधी को विपक्ष के नेता के तौर पर बोलने का अवसर दिया गया था। लेकिन शुरुआत से ही उन्होंने नियमों का उल्लंघन किया और एक ऐसी किताब से उद्धरण देने लगे, जिसकी न तो प्रामाणिकता स्पष्ट थी और न ही उसके प्रकाशन की कोई जानकारी दी गई। उन्होंने कहा राहुल गांधी बार-बार सदन के नियमों की अनदेखी करते हैं। यह बेहद शर्मनाक है। उन्हें देश से माफी मांगनी चाहिए। रिजिजू ने आगे कहा कि संसद किसी व्यक्ति की जागीर नहीं है, बल्कि यह नियमों और परंपराओं से चलती है। विपक्ष के नेता होने के नाते राहुल गांधी को इसका उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए था।
ये भी पढ़ें:- संसद में राहुल के 'चीन राग' पर भाजपा आक्रामक: रिजिजू बोले- स्पीकर का अपमान हुआ, कांग्रेस पाप के लिए माफी मांगे
सदन नियमों से चलता है, मनमर्जी से नहीं
किरण रिजिजू ने कहा कि राहुल गांधी ने लोकसभा में चीन जैसे संवेदनशील मुद्दे को बिना सूचीबद्ध कराए उठाया और एक पत्रिका के लेख से उद्धरण देने की कोशिश की, जो नियमों का सीधा उल्लंघन है। उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि जो सदस्य लोकसभा अध्यक्ष के फैसले का पालन नहीं करते, उनके खिलाफ क्या कार्रवाई होनी चाहिए इस पर भी चर्चा होनी चाहिए।
चीन सीमा मुद्दे पर कांग्रेस को घेरा
केंद्रीय मंत्री ने राहुल गांधी द्वारा चीन सीमा का मुद्दा उठाने पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस यह बताए कि क्या वह 1959 और 1962 में चीन द्वारा कब्जाई गई जमीन को वापस ला सकती है। रिजिजू ने कहा कि चीन सीमा से जुड़े मुद्दों पर कांग्रेस के पापों के लिए राहुल गांधी को देश से माफी मांगनी चाहिए। किरण रिजिजू ने तीखे शब्दों में कहा क्या किसी बड़े परिवार में जन्म लेने से कोई व्यक्ति संसद और नियमों से ऊपर हो जाता है? भारत एक लोकतांत्रिक देश है और यहां व्यवस्था नियमों से चलती है। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी खुद को संसद से ऊपर समझते हैं और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता उनके नियम उल्लंघन पर तालियां बजाते रहे।
नियमों की आड़ में राहुल गांधी की आवाज दबाई जा रही है- कांग्रेस का सरकार पर आरोप
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा भारत-चीन सीमा विवाद को लेकर पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज नरवणे की कथित आत्मकथा से संदर्भ दिए जाने पर उठे विवाद को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। कांग्रेस का कहना है कि मोदी सरकार ने जानबूझकर सदन के नियमों का इस्तेमाल कर राहुल गांधी को बोलने से रोका, क्योंकि सरकार को अपनी नाकामी की सच्चाई सामने आने का डर था।
कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा कि सरकार ने विपक्ष के नेता को चुप कराने के लिए वरिष्ठतम कैबिनेट मंत्रियों को आगे कर दिया और संसदीय नियमों की मनमानी व्याख्या की। केसी वेणुगोपाल ने सोशल मीडिया पर बयान जारी करते हुए कहा कि तथाकथित राष्ट्रवादी सरकार अपनी विफलताओं के उजागर होने से इतनी घबराई हुई है कि उसने राहुल गांधी को बोलने से रोकने के लिए हर संभव प्रयास किया। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व सेना प्रमुख जनरल नरवणे की किताब के प्रकाशन को रोकने की कोशिश भी इसी डर का हिस्सा थी, और अब जब उससे जुड़े अंश सामने आ रहे हैं, तो सरकार नेता प्रतिपक्ष को सदन में बोलने नहीं दे रही।
कांग्रेस नेता ने कहा कि सरकार ने संसदीय प्रक्रिया के नियमों की खुली गलत व्याख्या कर सदन और देश की जनता को यह जानने से वंचित किया कि चीन के साथ हुए संघर्ष में क्या गलतियां हुईं। उन्होंने इसे 21वीं सदी के फासीवाद का उदाहरण बताते हुए कहा कि पहले असहमति की आवाज दबाई जाती है और फिर नियमों का दुरुपयोग कर विपक्ष को और खामोश किया जाता है।
सदन ने अपने ही नियम छोड़ दिए- मनोज झा
राज्यसभा सांसद और आरजेडी नेता मनोज झा ने संसद की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि मौजूदा घटनाक्रम को देखकर ऐसा महसूस हो रहा है कि सदन ने अपने ही तय किए गए नियमों से दूरी बना ली है।
मनोज झा ने कहा कि उन्होंने कई मौकों पर सदन के भीतर पत्रिकाओं और अन्य प्रकाशित स्रोतों का हवाला दिया है और ऐसा पहले कभी आपत्तिजनक नहीं माना गया। लेकिन मौजूदा विवाद को देखते हुए उन्हें संदेह है कि क्या पूर्व सेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे (सेवानिवृत्त) की अप्रकाशित आत्मकथा ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ को भविष्य में प्रकाशित होने की अनुमति भी मिल पाएगी या नहीं।
संसद में सांसदों के अधिकार छीने जा रहे हैं- कल्याण बनर्जी
तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसद कल्याण बनर्जी ने संसद की कार्यप्रणाली और सत्ता पक्ष के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि बार-बार पंडित जवाहरलाल नेहरू का नाम लेकर विपक्ष के चरित्र, अस्तित्व और पहचान पर सवाल उठाए जा रहे हैं, जिससे संसदीय गरिमा को ठेस पहुंच रही है।
कल्याण बनर्जी ने कहा कि मौजूदा हालात देखकर ऐसा लगता है मानो संसद के भीतर सांसदों के लिए कुछ भी शेष नहीं बचा है। उनके मुताबिक, जनप्रतिनिधियों से धीरे-धीरे उनके सभी अधिकार छीने जा रहे हैं, जो लोकतंत्र के लिए सही दिशा नहीं है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह रास्ता ठीक नहीं है और आने वाले समय में देश की जनता इसका जवाब जरूर देगी।
राहुल के बयान पर संसद में हंगामा
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी राहुल गांधी के बयान पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि सदन में किसी अप्रकाशित किताब या संस्मरण के हवाले देना संसदीय नियमों के खिलाफ है। हालांकि, राहुल गांधी का दावा है कि उनका स्रोत भरोसेमंद है और उसमें एक पूर्व सेना अधिकारी के अप्रकाशित संस्मरणों के अंश शामिल हैं।

पहली बार ऐसा हुआ- जगदंबिका पाल
इस मुद्दे पर भाजपा सांसद जगदंबिका पाल ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा आजादी के बाद पहली बार ऐसा हुआ है कि किसी सांसद को एक ही बात दोहराने से पांच बार रोका गया। यह सब पूर्व नियोजित लग रहा था। उन्होंने राहुल गांधी के भाषण को शर्मनाक और निंदनीय बताते हुए कहा कि इस मामले में उचित कार्रवाई होनी चाहिए।
