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Kolkata: 'विपक्षी नेताओं की सुरक्षा राज्य सरकार की जिम्मेदारी', जानें हाई कोर्ट ने क्यों की यह टिप्पणी

अमर उजाला ब्यूरो, कोलकाता Published by: रिया दुबे Updated Mon, 02 Feb 2026 05:55 PM IST
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सार

कलकत्ता हाईकोर्ट ने कहा है कि पश्चिम बंगाल में विपक्षी नेताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना राज्य सरकार की संवैधानिक जिम्मेदारी है। यह टिप्पणी विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी की याचिका पर सुनवाई के दौरान की गई।

Security of opposition leaders is the responsibility of the state government', know why the High Court made
शुभेंदु अधिकारी, नेता प्रतिपक्ष, पश्चिम बंगाल - फोटो : ANI
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विस्तार
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कलकत्ता हाईकोर्ट ने पश्चिम बंगाल में विपक्षी नेताओं की सुरक्षा को लेकर राज्य सरकार की जिम्मेदारी स्पष्ट करते हुए कहा है कि किसी भी विपक्षी नेता पर हमला न हो, यह सुनिश्चित करना राज्य का दायित्व है। अदालत ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में राजनीतिक मतभेद के बावजूद नेताओं की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता।

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सुरक्षा सुनिश्चित करना राज्य सरकार की जिम्मेदारी

यह टिप्पणी कोर्ट ने विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान की गई। मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पाल की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि विपक्षी दलों के नेताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना राज्य सरकार की सांविधानिक जिम्मेदारी है।

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अधिकारी ने काफिले पर हमले का लगाया आरोप

हाल ही में पुरुलिया में एक जनसभा के बाद लौटते समय पश्चिम मेदिनीपुर के चंद्रकोणा रोड इलाके में शुभेंदु अधिकारी ने अपने काफिले पर हमले का आरोप लगाया गया है। शुभेंदु अधिकारी का कहना है कि रात के समय कुछ असामाजिक तत्वों ने लाठियों से उनके काफिले पर हमला किया और वाहनों के शीशे तोड़ने की कोशिश की, जिससे इलाके में तनाव की स्थिति पैदा हो गई।

थाने के सामने धरना प्रदर्शन

इस घटना के बाद स्थानीय स्तर पर तृणमूल कांग्रेस और भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच झड़प भी हुई, जिसे बाद में पुलिस ने नियंत्रित किया। हमले के विरोध में और आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर शुभेंदु अधिकारी ने थाने के सामने धरना प्रदर्शन भी किया था।

पश्चिम बंगाल में विपक्षी नेताओं पर हमले का आरोप

याचिका में यह भी उल्लेख किया गया कि राज्य के विभिन्न हिस्सों में विपक्षी नेताओं पर लगातार हमले हो रहे हैं। उत्तर बंगाल के दौरे के दौरान भाजपा सांसद खगेन मुर्मू पर हुए हमले का हवाला दिया गया, जिसमें उनकी आंख के नीचे की हड्डी टूट गई थी और उन्हें लंबे समय तक दिल्ली के एम्स में इलाज कराना पड़ा।

भाजपा विधायक शंकर घोष पर हुए हमले का भी जिक्र किया गया। इन सभी घटनाओं को ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि विपक्षी नेताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी राज्य सरकार की है और इस दिशा में प्रभावी कदम उठाए जाने चाहिए।

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