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दिशा सालियान मामला: बॉम्बे हाईकोर्ट के तीखे सवाल, पूछा- पिता को शक था तो एफआईआर दर्ज करने से किसने रोका?
Mon, 03 Aug 2026 05:17 PM IST
सुनील मेहरोत्रा
सुनील मेहरोत्रा, मुंबई
सुनील मेहरोत्रा, मुंबई
Published by: सुनील मेहरोत्रा
Updated Mon, 03 Aug 2026 05:17 PM IST
सार
बॉम्बे हाईकोर्ट ने दिशा सालियान मौत मामले की सुनवाई के दौरान मुंबई पुलिस की जांच पर कई अहम सवाल उठाए। अदालत ने पूछा कि पिता के संदेह के बावजूद एफआईआर क्यों दर्ज नहीं की गई और पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गंभीर चोटों का स्पष्ट उल्लेख क्यों नहीं है। राज्य सरकार ने जांच को आत्महत्या का मामला बताया, जबकि याचिकाकर्ता ने रिकॉर्ड में हेरफेर और प्रभावशाली लोगों को बचाने का आरोप लगाया। मामले की अगली सुनवाई 24 अगस्त को होगी।
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बॉम्बे हाईकोर्ट
- फोटो : एएनआई
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विस्तार
बॉम्बे हाईकोर्ट ने साल 2020 में पूर्व सेलिब्रिटी मैनेजर दिशा सालियान की मौत के मामले में मुंबई पुलिस की कार्रवाई पर सोमवार को कई अहम सवाल उठाए। अदालत ने पूछा कि जब दिशा के पिता ने शुरुआत से ही मौत की परिस्थितियों पर संदेह जताया था, तब पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर नियमित आपराधिक जांच क्यों नहीं की? अदालत ने यह भी सवाल किया कि 14वीं मंजिल से गिरने के बावजूद पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गंभीर चोटों का स्पष्ट उल्लेख क्यों नहीं दिखता।
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पिता के संदेह के बावजूद एफआईआर क्यों नहीं हुई?
न्यायमूर्ति भारती डांगरे और न्यायमूर्ति मंजूषा देशपांडे की पीठ दिशा के पिता सतीश सालियान की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। दिशा की 8 जून 2020 को मालाड स्थित एक आवासीय इमारत की 14वीं मंजिल से गिरने के बाद मौत हो गई थी। उस समय मुंबई पुलिस ने आकस्मिक मृत्यु (एडीआर) का मामला दर्ज कर जांच की थी और बाद में इसे आत्महत्या का मामला बताया था।
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आकस्मिक मृत्यु तक ही जांच क्यों सीमित रही?
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, सुनवाई के दौरान अदालत ने पुलिस से पूछा कि जब मृतका के पिता ने मौत को लेकर संदेह व्यक्त किया था, तब एफआईआर दर्ज कर विस्तृत जांच शुरू करने से पुलिस को किसने रोका? अदालत ने कहा कि केवल आकस्मिक मृत्यु की जांच तक ही मामला सीमित क्यों रखा गया।
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सरकार ने आत्महत्या की थ्योरी का क्या आधार बताया?
राज्य की ओर से विशेष सरकारी वकील शिशिर हिरे ने अदालत को बताया कि मामले की दो बार जांच की गई और दोनों बार यही निष्कर्ष निकला कि दिशा ने आत्महत्या की थी। उन्होंने कहा कि गवाहों के बयान और उपलब्ध साक्ष्य भी इसी निष्कर्ष की पुष्टि करते हैं।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गंभीर चोटों का उल्लेख क्यों नहीं?
इस दौरान हाईकोर्ट ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट का भी उल्लेख किया और पूछा कि इतनी ऊंचाई से गिरने के बावजूद शरीर पर गंभीर चोटों का उल्लेख क्यों नहीं है। इस पर सरकारी वकील ने कहा कि उपलब्ध तस्वीरों में दिशा के सिर पर चोट के निशान दिखाई देते हैं।
तस्वीरों में हेरफेर का आरोप क्यों लगा?
हालांकि, याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता नीलेश ओझा ने इसका विरोध करते हुए दावा किया कि शुरुआती तस्वीरों में ऐसी चोटें दिखाई नहीं देती थीं। उन्होंने आरोप लगाया कि बाद में पेश की गई तस्वीरों में सिर की चोटें दिखाकर रिकॉर्ड में हेरफेर किया गया है।
दस्तावेज देने में पुलिस को क्या आपत्ति थी?
अदालत ने याचिकाकर्ता को आकस्मिक मृत्यु रिपोर्ट से जुड़े सामान्य दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराने पर भी पुलिस को फटकार लगाई। पीठ ने कहा कि जब पुलिस स्वयं कह रही है कि मामला समाप्त हो चुका है, कोई एफआईआर दर्ज नहीं है और कोई जांच लंबित नहीं है, तब दस्तावेज देने में क्या आपत्ति है? हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 24 अगस्त को निर्धारित की है।
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याचिका में क्या मांग और पुलिस का क्या रुख है?
सतीश सालियान ने अपनी याचिका में बेटी की मौत की सीबीआई से जांच कराने और शिवसेना विधायक आदित्य ठाकरे के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। उनका आरोप है कि प्रभावशाली लोगों को बचाने के लिए उनकी बेटी की मौत के मामले को दबाने का प्रयास किया गया। दूसरी ओर, पुलिस का अब तक का आधिकारिक रुख यही है कि जांच में आत्महत्या की पुष्टि हुई है। मामले में अंतिम निर्णय अभी न्यायालय के विचाराधीन है।