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बंगाल की सियासत में नया मोड़: 20 एनसीपीआई सांसदों से मिलेंगे सीएम शुभेंदु; कहां होगी यह बैठक?
Mon, 03 Aug 2026 05:40 PM IST
प्रशांत तिवारी
पीटीआई, कोलकाता
पीटीआई, कोलकाता
Published by: प्रशांत तिवारी
Updated Mon, 03 Aug 2026 05:40 PM IST
सार
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी 4 अगस्त को नई दिल्ली में एनसीपीआई के 20 लोकसभा सांसदों से मुलाकात करेंगे। बैठक में सांसदों के क्षेत्रों के विकास, विस्थापित कार्यकर्ताओं के पुनर्वास, संसद में रणनीति और राज्य सरकार के साथ समन्वय जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी।
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मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी मंगलवार, 4 अगस्त को नई दिल्ली में नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) के 20 लोकसभा सांसदों के साथ बैठक करेंगे। टीएमसी से अलग होकर एनसीपीआई में शामिल हुए इन सांसदों के एनडीए का हिस्सा बनने के बाद दोनों पक्षों के बीच यह पहली औपचारिक मुलाकात होगी। इस बैठक को राज्य की बदलती राजनीतिक परिस्थितियों के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।
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बैठक का मुख्य एजेंडा क्या रहेगा?
एनसीपीआई संसदीय दल के नेता सुदीप बंद्योपाध्याय ने बताया कि बैठक का मुख्य फोकस सांसदों के संसदीय क्षेत्रों के विकास से जुड़े मुद्दों पर रहेगा। इसके अलावा सरकार बदलने के बाद अपने घर छोड़ने को मजबूर हुए पार्टी कार्यकर्ताओं के पुनर्वास पर भी चर्चा की जाएगी। उन्होंने कहा कि हमारे संसदीय क्षेत्रों के विकास से जुड़े मुद्दे बैठक के एजेंडे में हैं। सरकार बदलने के बाद हमारे बड़ी संख्या में कार्यकर्ता बेघर हो गए हैं। हम चाहते हैं कि उन्हें सुरक्षित तरीके से उनके घरों तक वापस पहुंचाया जाए।
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बैठक कहां और कब होगी?
यह बैठक नई दिल्ली स्थित बंगा भवन में आयोजित होगी। इससे पहले भी पिछले सप्ताह ऐसी बैठक प्रस्तावित थी, लेकिन किसी आधिकारिक कारण के बिना उसे टाल दिया गया था। ऐसे में इस बार की बैठक पर राजनीतिक हलकों की खास नजर बनी हुई है। सुदीप बंद्योपाध्याय के बयान से साफ संकेत मिलता है कि पार्टी नेतृत्व इस बैठक को राजनीतिक पुनर्संरेखण के बजाय प्रशासनिक समन्वय और विकास से जुड़ी बैठक के रूप में पेश करना चाहता है। हालांकि एनसीपीआई के भविष्य और भाजपा के साथ उसके रिश्तों को लेकर अटकलें लगातार जारी हैं।
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एनडीए में शामिल होने के बाद बैठक क्यों अहम मानी जा रही है?
यह बैठक ऐसे समय हो रही है जब कुछ दिन पहले ही एनसीपीआई के सांसद पहली बार एनडीए संसदीय दल की साप्ताहिक 'मंगल मिलन' बैठक में शामिल हुए थे। इसे केंद्र की सत्तारूढ़ गठबंधन में उनकी बढ़ती सक्रियता और भूमिका का संकेत माना जा रहा है।
एनसीपीआई में ये सांसद कैसे पहुंचे?
टीएमसी से अलग हुए 20 लोकसभा सांसदों ने इस साल की शुरुआत में अपेक्षाकृत कम चर्चित राजनीतिक दल नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) का दामन थाम लिया था। बाद में एनसीपीआई ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) में शामिल होने का फैसला किया।
क्या सांसदों की सदस्यता पर अभी भी संकट बना हुआ है?
हालांकि संसद के भीतर ये सांसद अब एनडीए के सहयोगी के रूप में काम कर रहे हैं, लेकिन टीएमसी द्वारा दायर दलबदल विरोधी कानून के तहत अयोग्यता संबंधी याचिकाओं पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला का अंतिम फैसला अभी आना बाकी है।
राजनीतिक जानकार इस बैठक को किस नजर से देख रहे हैं?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बैठक भाजपा सरकार और एनसीपीआई सांसदों के बीच संसदीय क्षेत्रों के विकास, संसद की रणनीति और संगठनात्मक समन्वय को और मजबूत करने की दिशा में अहम कदम साबित हो सकती है।
क्या इससे टीएमसी की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं?
इस बैठक को मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की उस रणनीति का हिस्सा भी माना जा रहा है, जिसके जरिए वे टीएमसी से अलग हुए सांसदों को एकजुट बनाए रखना चाहते हैं। इन सांसदों के अलग होने से पश्चिम बंगाल में लोकसभा की राजनीतिक तस्वीर बदल गई है और टीएमसी की पहले जैसी मजबूत संसदीय स्थिति कमजोर हुई है।
क्या एनसीपीआई का भाजपा में विलय होने वाला है?
पिछले कुछ हफ्तों से एनसीपीआई के भाजपा में विलय की चर्चाएं लगातार सामने आती रही हैं। हालांकि अब तक किसी भी पक्ष ने आधिकारिक तौर पर ऐसे किसी प्रस्ताव की पुष्टि नहीं की है।
इस बीच सुदीप बंद्योपाध्याय ने पीटीआई से कहा कि फिलहाल ऐसी किसी बात पर कोई चर्चा नहीं हो रही है।
पिछली बैठक क्यों टल गई थी?
सुवेंदु अधिकारी और एनसीपीआई सांसदों की एक बैठक पिछले सप्ताह भी प्रस्तावित थी, लेकिन बिना किसी आधिकारिक कारण के उसे स्थगित कर दिया गया। उस समय पार्टी सूत्रों ने बताया था कि बैठक में सांसद निधि (एमपीलैड) के उपयोग, राज्य सरकार के साथ विकास परियोजनाओं में समन्वय और संसद के मानसून सत्र में उठाए जाने वाले मुद्दों पर चर्चा हो सकती है।
क्या इससे पहले दोनों पक्षों की मुलाकात हुई थी?
सुवेंदु अधिकारी ने 8 जून को उस समय टीएमसी से अलग हुए सांसदों से मुलाकात की थी, जब पार्टी में टूट की प्रक्रिया चल रही थी। हालांकि सांसदों के औपचारिक रूप से एनसीपीआई में शामिल होने और पार्टी के एनडीए का हिस्सा बनने के बाद यह दोनों पक्षों की पहली महत्वपूर्ण बैठक होगी।
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आगे की राजनीतिक दिशा क्या हो सकती है?
मंगलवार की यह बैठक इस बात का संकेत दे सकती है कि पश्चिम बंगाल की भाजपा सरकार और उसकी नई संसदीय सहयोगी एनसीपीआई आने वाले महीनों में विकास, संगठन और राजनीतिक रणनीति के मोर्चे पर किस तरह मिलकर आगे बढ़ने की तैयारी कर रही हैं।