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Bombay High Court: नरेंद्र दाभोलकर हत्या मामले के दोषी शरद कलस्कर को बॉम्बे हाईकोर्ट से मिली जमानत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई।
Published by: Nirmal Kant
Updated Wed, 29 Apr 2026 03:57 PM IST
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Bombay High court
- फोटो : ANI
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बॉम्बे हाई कोर्ट ने बुधवार को 2013 में तर्कवादी नरेंद्र दाभोलकर की हत्या मामले में दोषी ठहराए गए शरद कलस्कर को जमानत दी। अदालत ने हमलावर के रूप में उनकी पहचान को लेकर संदेह जताया।
पिछले साल अदालत ने वाम नेता गोविंद पंसारे की हत्या के मामले में भी कलस्कर को जमानत दी थी। तब अदालत ने कहा था कि वह करीब सात साल से जेल में है और मुकदमे को पूरा होने में काफी समय लग रहा है।
नरेंद्र दाभोलकर कौन थे और कैसे हत्या हुई थी?
67 साल के दाभोलकर अंधविश्वास के खिलाफ काम करने वाले प्रमुख कार्यकर्ता थे। उन्होंने महाराष्ट्र अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति की स्थापना की थी। 20 अगस्त 2013 को पुणे में मोटरसाइकिल पर आए दो हमलावरों ने उन्हें गोली मार दी थी। 2014 में बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश के बाद जांच अपने हाथ में लेने वाली सीबीआई ने अंडुरे और कलस्कर को इस अपराध का आरोपी बताया था।
ये भी पढ़ें: 26/11 केस में हुए थे बरी फहीम अंसारी: नहीं मिला ऑटो का परमिट, बॉम्बे हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका
साल 2024 में एक विशेष अदालत ने इस मामले में कलस्कर और सचिन प्रकाशराव अंडुरे को दोषी ठहराया। अदालत ने हत्या के लिए उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई थी। कलस्कर ने हाईकोर्ट में अपील दायर की थी। उसने अपील पर अंतिम सुनवाई और फैसले तक जमानत देने की मांग की थी।
हाईकोर्ट ने क्या कहा?
जस्टिस अजय गडकरी और जस्टिस रणजीत सिंह भोंसले की खंडपीठ ने रिहाई का आदेश देते हुए कलस्कर को 50 हजार रुपये का जमानत बांड भरने का निर्देश दिया।
अदालत ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की उस मांग को भी खारिज कर दिया, जिसमें जमानत आदेश को चार हफ्ते तक रोकने की मांग की गई थी। जस्टिस गडकरी ने कहा, जब हम पहले ही याचिकाकर्ता कलस्कर की हमलावर के रूप में पहचान पर संदेह जता चुके हैं, तो इस आदेश पर रोक लगाने का सवाल ही नहीं उठता। फिलहाल इस आदेश की विस्तृत प्रति उपलब्ध नहीं है।
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पिछले साल अदालत ने वाम नेता गोविंद पंसारे की हत्या के मामले में भी कलस्कर को जमानत दी थी। तब अदालत ने कहा था कि वह करीब सात साल से जेल में है और मुकदमे को पूरा होने में काफी समय लग रहा है।
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नरेंद्र दाभोलकर कौन थे और कैसे हत्या हुई थी?
67 साल के दाभोलकर अंधविश्वास के खिलाफ काम करने वाले प्रमुख कार्यकर्ता थे। उन्होंने महाराष्ट्र अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति की स्थापना की थी। 20 अगस्त 2013 को पुणे में मोटरसाइकिल पर आए दो हमलावरों ने उन्हें गोली मार दी थी। 2014 में बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश के बाद जांच अपने हाथ में लेने वाली सीबीआई ने अंडुरे और कलस्कर को इस अपराध का आरोपी बताया था।
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साल 2024 में एक विशेष अदालत ने इस मामले में कलस्कर और सचिन प्रकाशराव अंडुरे को दोषी ठहराया। अदालत ने हत्या के लिए उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई थी। कलस्कर ने हाईकोर्ट में अपील दायर की थी। उसने अपील पर अंतिम सुनवाई और फैसले तक जमानत देने की मांग की थी।
हाईकोर्ट ने क्या कहा?
जस्टिस अजय गडकरी और जस्टिस रणजीत सिंह भोंसले की खंडपीठ ने रिहाई का आदेश देते हुए कलस्कर को 50 हजार रुपये का जमानत बांड भरने का निर्देश दिया।
अदालत ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की उस मांग को भी खारिज कर दिया, जिसमें जमानत आदेश को चार हफ्ते तक रोकने की मांग की गई थी। जस्टिस गडकरी ने कहा, जब हम पहले ही याचिकाकर्ता कलस्कर की हमलावर के रूप में पहचान पर संदेह जता चुके हैं, तो इस आदेश पर रोक लगाने का सवाल ही नहीं उठता। फिलहाल इस आदेश की विस्तृत प्रति उपलब्ध नहीं है।
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