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तीस्ता सीतलवाड़ को नहीं मिला पासपोर्ट: सुप्रीम कोर्ट ने कहा- कब और कहां जाना है, पहले बताएं
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: राकेश कुमार
Updated Wed, 29 Apr 2026 05:30 PM IST
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सार
सुप्रीम कोर्ट ने तीस्ता सीतलवाड़ को साफ संदेश दिया है कि बिना ठोस यात्रा योजना के पासपोर्ट वापस नहीं मिलेगा। कानून के दायरे में राहत तभी संभव है जब यात्रा का उद्देश्य और गंतव्य स्पष्ट हो, तब तक पासपोर्ट कोर्ट की निगरानी में ही रहेगा।
सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया
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विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ की उस याचिका को निपटा दिया है, जिसमें उन्होंने अपना पासपोर्ट वापस करने की मांग की थी। अदालत ने कहा कि जब तीस्ता अपना विदेश यात्रा का कार्यक्रम तय कर लें, तब वह नई अर्जी दाखिल कर सकती हैं। फिलहाल उन्हें पासपोर्ट नहीं दिया जाएगा।
तीस्ता सीतलवाड़ का पासपोर्ट वर्तमान में एक निचली अदालत की कस्टडी में जमा है। उन पर 2002 के गुजरात दंगों के बाद निर्दोष लोगों को फंसाने के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार करने का आरोप है। उसी मामले में जमानत की एक शर्त के तौर पर पासपोर्ट जमा किया गया था।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या-क्या कहा?
यह मामला जस्टिस दीपांकर दत्ता, जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ के सामने सुनवाई के लिए आया। सुनवाई के दौरान तीस्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल पेश हुए। पीठ ने सिब्बल से पूछा, 'क्या आपकी जल्द ही कहीं बाहर जाने की योजना है? जैसे ही सीतलवाड़ अपना यात्रा कार्यक्रम तय कर लें, हमें बताएं। हम इस तरह पासपोर्ट वापस नहीं करेंगे।'
अदालत ने आगे कहा, 'आपको हमें बताना होगा कि आप किस देश की यात्रा करना चाहती हैं। विदेश यात्रा के लिए आपको अपना पासपोर्ट वापस चाहिए, तो इसके लिए आपको एक ठोस आधार और मामला पेश करना होगा।'
यह भी पढ़ें: 'ऐसा लोकतंत्र पहले नहीं देखा': बंगाल में मतदान के बीच CM ममता हमलावर, कहा- TMC कार्यकर्ताओं की हो रही पिटाई
'विदेश यात्रा से पहले अदालत से अनुमति लेना अनिवार्य'
वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने अदालत को जानकारी दी कि तीस्ता सीतलवाड़ को विदेश यात्रा करने के लिए पहले ही अदालत से अनुमति लेनी अनिवार्य है। इस पर पीठ ने आवेदन का निपटारा करते हुए कहा, 'हालांकि, जब भी याचिकाकर्ता विदेश यात्रा करना चाहती हैं, वह एक नया आवेदन दाखिल कर सकती हैं।'
इससे पहले 13 अप्रैल को शीर्ष अदालत ने निर्देश दिया था कि तीस्ता की अर्जी को तीन जजों की बेंच के सामने रखा जाए। पहले उन्हें जमानत भी तीन जजों की बेंच ने ही दी थी, इसलिए चीफ जस्टिस सूर्यकांत से आदेश प्राप्त कर इसे सूचीबद्ध किया गया। सिब्बल ने दलील दी थी कि जमानत की शर्तों के तहत उनका पासपोर्ट सेशन कोर्ट की कस्टडी में रखने का आदेश दिया गया था।
19 जुलाई, 2023 को सुप्रीम कोर्ट ने तीस्ता को इस मामले में नियमित जमानत दी थी। उस समय अदालत ने गुजरात हाईकोर्ट के उस आदेश को विरोधाभासी करार दिया था, जिसने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी। हाईकोर्ट के आदेश को रद्द करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने माना था कि तीस्ता से हिरासत में पूछताछ की जरूरत नहीं है, क्योंकि चार्जशीट दाखिल हो चुकी है और अधिकांश सबूत दस्तावेजी प्रकृति के हैं।
क्या है पूरा विवाद?
तीस्ता सीतलवाड़ के खिलाफ यह प्राथमिकी जून 2022 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद दर्ज की गई थी। यह फैसला जकिया जाफरी की याचिका पर आया था, जिन्होंने 2002 के दंगों के पीछे एक बड़ी साजिश का आरोप लगाया था। जकिया जाफरी पूर्व कांग्रेस सांसद एहसान जाफरी की पत्नी थीं, जिनकी गुलबर्ग सोसाइटी हत्याकांड में मृत्यु हो गई थी।
सुप्रीम कोर्ट ने जाफरी की याचिका खारिज करते हुए टिप्पणी की थी कि कुछ लोग निहित स्वार्थों के लिए इस मामले को गरमाए हुए हैं। अदालत ने कहा था कि प्रक्रिया का दुरुपयोग करने वालों को कानून के कटघरे में खड़ा किया जाना चाहिए। इसके अगले ही दिन तीस्ता को गिरफ्तार कर लिया गया था। इस मामले में पूर्व आईपीएस अधिकारी संजीव भट्ट और पूर्व डीजीपी आर बी श्रीकुमार भी आरोपी हैं।
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तीस्ता सीतलवाड़ का पासपोर्ट वर्तमान में एक निचली अदालत की कस्टडी में जमा है। उन पर 2002 के गुजरात दंगों के बाद निर्दोष लोगों को फंसाने के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार करने का आरोप है। उसी मामले में जमानत की एक शर्त के तौर पर पासपोर्ट जमा किया गया था।
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सुप्रीम कोर्ट ने क्या-क्या कहा?
यह मामला जस्टिस दीपांकर दत्ता, जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ के सामने सुनवाई के लिए आया। सुनवाई के दौरान तीस्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल पेश हुए। पीठ ने सिब्बल से पूछा, 'क्या आपकी जल्द ही कहीं बाहर जाने की योजना है? जैसे ही सीतलवाड़ अपना यात्रा कार्यक्रम तय कर लें, हमें बताएं। हम इस तरह पासपोर्ट वापस नहीं करेंगे।'
अदालत ने आगे कहा, 'आपको हमें बताना होगा कि आप किस देश की यात्रा करना चाहती हैं। विदेश यात्रा के लिए आपको अपना पासपोर्ट वापस चाहिए, तो इसके लिए आपको एक ठोस आधार और मामला पेश करना होगा।'
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'विदेश यात्रा से पहले अदालत से अनुमति लेना अनिवार्य'
वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने अदालत को जानकारी दी कि तीस्ता सीतलवाड़ को विदेश यात्रा करने के लिए पहले ही अदालत से अनुमति लेनी अनिवार्य है। इस पर पीठ ने आवेदन का निपटारा करते हुए कहा, 'हालांकि, जब भी याचिकाकर्ता विदेश यात्रा करना चाहती हैं, वह एक नया आवेदन दाखिल कर सकती हैं।'
इससे पहले 13 अप्रैल को शीर्ष अदालत ने निर्देश दिया था कि तीस्ता की अर्जी को तीन जजों की बेंच के सामने रखा जाए। पहले उन्हें जमानत भी तीन जजों की बेंच ने ही दी थी, इसलिए चीफ जस्टिस सूर्यकांत से आदेश प्राप्त कर इसे सूचीबद्ध किया गया। सिब्बल ने दलील दी थी कि जमानत की शर्तों के तहत उनका पासपोर्ट सेशन कोर्ट की कस्टडी में रखने का आदेश दिया गया था।
19 जुलाई, 2023 को सुप्रीम कोर्ट ने तीस्ता को इस मामले में नियमित जमानत दी थी। उस समय अदालत ने गुजरात हाईकोर्ट के उस आदेश को विरोधाभासी करार दिया था, जिसने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी। हाईकोर्ट के आदेश को रद्द करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने माना था कि तीस्ता से हिरासत में पूछताछ की जरूरत नहीं है, क्योंकि चार्जशीट दाखिल हो चुकी है और अधिकांश सबूत दस्तावेजी प्रकृति के हैं।
क्या है पूरा विवाद?
तीस्ता सीतलवाड़ के खिलाफ यह प्राथमिकी जून 2022 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद दर्ज की गई थी। यह फैसला जकिया जाफरी की याचिका पर आया था, जिन्होंने 2002 के दंगों के पीछे एक बड़ी साजिश का आरोप लगाया था। जकिया जाफरी पूर्व कांग्रेस सांसद एहसान जाफरी की पत्नी थीं, जिनकी गुलबर्ग सोसाइटी हत्याकांड में मृत्यु हो गई थी।
सुप्रीम कोर्ट ने जाफरी की याचिका खारिज करते हुए टिप्पणी की थी कि कुछ लोग निहित स्वार्थों के लिए इस मामले को गरमाए हुए हैं। अदालत ने कहा था कि प्रक्रिया का दुरुपयोग करने वालों को कानून के कटघरे में खड़ा किया जाना चाहिए। इसके अगले ही दिन तीस्ता को गिरफ्तार कर लिया गया था। इस मामले में पूर्व आईपीएस अधिकारी संजीव भट्ट और पूर्व डीजीपी आर बी श्रीकुमार भी आरोपी हैं।
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