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Bombay High Court: हाईकोर्ट से अबू सलेम की पारोल याचिका खारिज, पुलिस एस्कॉर्ट शुल्क देने में जताई थी असमर्थता
Thu, 05 Feb 2026 07:33 PM IST
शिवम गर्ग
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: शिवम गर्ग
Updated Thu, 05 Feb 2026 07:33 PM IST
सार
बॉम्बे हाईकोर्ट ने 1993 मुंबई ब्लास्ट के आरोपी अबू सलेम की पारोल याचिका खारिज कर दी, क्योंकि वह पुलिस एस्कॉर्ट शुल्क भरने में असमर्थ थे।
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बॉम्बे हाईकोर्ट
- फोटो : एएनआई
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विस्तार
बॉम्बे हाईकोर्ट ने गुरुवार को 1993 मुंबई ब्लास्ट के आरोपी और कैदी अबू सलेम की पारोल याचिका खारिज कर दी। सलेम ने अदालत से आपातकालीन पारोल की मांग की थी ताकि वह अपने पैतृक स्थान उत्तर प्रदेश जाकर अपने भाई अबू हकीम अंसारी के निधन पर शोक व्यक्त कर सकें।
अबू सलेम के वकील ने अदालत को बताया कि वह उच्च सुरक्षा एस्कॉर्ट शुल्क देने में असमर्थ हैं। इससे पहले सुनवाई में अदालत ने कहा था कि पारोल लेने के लिए अनिवार्य शुल्क का भुगतान करना जरूरी है और कोई मोलभाव नहीं हो सकता।
17 लाख से ज्यादा का एस्कॉर्ट खर्च
सलेम इस समय नासिक रोड सेंट्रल जेल में बंद है। जेल प्रशासन ने अदालत को बताया था कि अगर सलेम को पुलिस एस्कॉर्ट के साथ पैरोल दी जाती है, तो उसे 17 लाख रुपये से अधिक की राशि एस्कॉर्ट टीम के खर्च के तौर पर जमा करनी होगी। मंगलवार को सुनवाई के दौरान सलेम की वकील फरहाना शाह ने अदालत को बताया था कि यह राशि बेहद ज्यादा है और उनका मुवक्किल वर्षों से जेल में बंद होने के कारण आर्थिक रूप से बेहद कमजोर हालत में है। उन्होंने कहा कि सलेम एक लाख रुपये से अधिक भुगतान करने की स्थिति में नहीं है।
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ये भी पढ़ें:- हाईकोर्ट की टिप्पणी के अगले ही दिन मेघालय कोयला खदान विस्फोट: दस के मरने की आशंका, युद्ध स्तर पर राहत-बचाव
पहले भी खारिज हो चुकी है मांग
अबू सलेम ने दिसंबर 2025 में हाईकोर्ट का रुख किया था। उसने बताया था कि भाई की मौत नवंबर में हुई थी, लेकिन क्रिसमस अवकाश के कारण याचिका दाखिल करने में देरी हुई। सलेम के अनुसार, उसने 15 नवंबर को 14 दिन की आपात पैरोल के लिए जेल प्रशासन को आवेदन दिया था, ताकि अंतिम संस्कार और अन्य रस्मों में शामिल हो सके। हालांकि, जेल अधिकारियों ने 20 नवंबर 2025 को उसका आवेदन खारिज कर दिया था।
अब तक सीमित पैरोल
अपनी याचिका में सलेम ने यह भी कहा कि नवंबर 2005 में गिरफ्तारी के बाद से उसे केवल कुछ ही बार, वह भी मां और सौतेली मां के निधन पर, सीमित अवधि की पैरोल दी गई है। गौरतलब है कि अबू सलेम को पुर्तगाल से प्रत्यर्पित कर 11 नवंबर 2005 को भारत लाया गया था। वह 1993 मुंबई धमाकों के मामले में 25 साल की सजा काट रहा है। इसके अलावा, 1995 में मुंबई के बिल्डर प्रदीप जैन की हत्या के मामले में एक विशेष TADA अदालत ने उसे आजीवन कारावास की सजा भी सुनाई है।
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अबू सलेम के वकील ने अदालत को बताया कि वह उच्च सुरक्षा एस्कॉर्ट शुल्क देने में असमर्थ हैं। इससे पहले सुनवाई में अदालत ने कहा था कि पारोल लेने के लिए अनिवार्य शुल्क का भुगतान करना जरूरी है और कोई मोलभाव नहीं हो सकता।
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17 लाख से ज्यादा का एस्कॉर्ट खर्च
सलेम इस समय नासिक रोड सेंट्रल जेल में बंद है। जेल प्रशासन ने अदालत को बताया था कि अगर सलेम को पुलिस एस्कॉर्ट के साथ पैरोल दी जाती है, तो उसे 17 लाख रुपये से अधिक की राशि एस्कॉर्ट टीम के खर्च के तौर पर जमा करनी होगी। मंगलवार को सुनवाई के दौरान सलेम की वकील फरहाना शाह ने अदालत को बताया था कि यह राशि बेहद ज्यादा है और उनका मुवक्किल वर्षों से जेल में बंद होने के कारण आर्थिक रूप से बेहद कमजोर हालत में है। उन्होंने कहा कि सलेम एक लाख रुपये से अधिक भुगतान करने की स्थिति में नहीं है।
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पहले भी खारिज हो चुकी है मांग
अबू सलेम ने दिसंबर 2025 में हाईकोर्ट का रुख किया था। उसने बताया था कि भाई की मौत नवंबर में हुई थी, लेकिन क्रिसमस अवकाश के कारण याचिका दाखिल करने में देरी हुई। सलेम के अनुसार, उसने 15 नवंबर को 14 दिन की आपात पैरोल के लिए जेल प्रशासन को आवेदन दिया था, ताकि अंतिम संस्कार और अन्य रस्मों में शामिल हो सके। हालांकि, जेल अधिकारियों ने 20 नवंबर 2025 को उसका आवेदन खारिज कर दिया था।
अब तक सीमित पैरोल
अपनी याचिका में सलेम ने यह भी कहा कि नवंबर 2005 में गिरफ्तारी के बाद से उसे केवल कुछ ही बार, वह भी मां और सौतेली मां के निधन पर, सीमित अवधि की पैरोल दी गई है। गौरतलब है कि अबू सलेम को पुर्तगाल से प्रत्यर्पित कर 11 नवंबर 2005 को भारत लाया गया था। वह 1993 मुंबई धमाकों के मामले में 25 साल की सजा काट रहा है। इसके अलावा, 1995 में मुंबई के बिल्डर प्रदीप जैन की हत्या के मामले में एक विशेष TADA अदालत ने उसे आजीवन कारावास की सजा भी सुनाई है।
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