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दाभोलकर हत्याकांड: हाई कोर्ट ने दूसरे आरोपी सचिन अंदुरे को दी जमानत, अप्रैल में पहले हत्यारोपी को मिली थी बेल
Tue, 18 Aug 2026 01:01 PM IST
Pavan
एएनआई, मुंबई
एएनआई, मुंबई
Published by: Pavan
Updated Tue, 18 Aug 2026 01:01 PM IST
सार
बॉम्बे हाई कोर्ट ने नरेंद्र दाभोलकर हत्याकांड में दोषी ठहराए गए सचिन अंदुरे को जमानत दे दी। 2024 में विशेष अदालत ने अंदुरे और शरद कलस्कर को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इससे पहले अप्रैल 2026 में हाई कोर्ट ने कलस्कर को भी जमानत दी थी। दाभोलकर की 20 अगस्त 2013 को पुणे में गोली मारकर हत्या की गई थी।
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बॉम्बे हाई कोर्ट
- फोटो : ANI
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विस्तार
बॉम्बे हाई कोर्ट ने डॉ. नरेंद्र दाभोलकर हत्याकांड के आरोपी सचिन अंदुरे को जमानत दे दी है। डॉ. नरेंद्र दाभोलकर की 20 अगस्त 2013 को पुणे में सुबह की सैर के दौरान गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। बता दें कि, इससे पहले पुणे की सेशंस कोर्ट ने इस मामले में शरद कलस्कर और सचिन अंदुरे को दोषी ठहराया था और 2024 में दोनों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
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अप्रैल में पहले आरोपी शरद को मिली थी जमानत
वहीं, अप्रैल महीने में बॉम्बे हाई कोर्ट ने 29 अप्रैल को 2013 में तर्कवादी नरेंद्र दाभोलकर की हत्या मामले में दोषी ठहराए गए शरद कलस्कर को जमानत दी। अदालत ने हमलावर के रूप में उनकी पहचान को लेकर संदेह जताया था। जबकि, पिछले साल अदालत ने वाम नेता गोविंद पंसारे की हत्या के मामले में भी कलस्कर को जमानत दी थी।
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नरेंद्र दाभोलकर कौन थे और कैसे हत्या हुई थी?
67 साल के दाभोलकर अंधविश्वास के खिलाफ काम करने वाले प्रमुख कार्यकर्ता थे। उन्होंने महाराष्ट्र अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति की स्थापना की थी। 20 अगस्त 2013 को पुणे में मोटरसाइकिल पर आए दो हमलावरों ने उन्हें गोली मार दी थी। 2014 में बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश के बाद जांच अपने हाथ में लेने वाली सीबीआई ने सचिन अंदुरे और शरद कलस्कर को इस अपराध का आरोपी बताया था। साल 2024 में एक विशेष अदालत ने इस मामले में शरद कलस्कर और सचिन अंदुरे को दोषी ठहराया। अदालत ने हत्या के लिए उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई थी। शरद कलस्कर ने हाईकोर्ट में अपील दायर की थी। उसने अपील पर अंतिम सुनवाई और फैसले तक जमानत देने की मांग की थी।
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मामले में कोर्ट ने क्या कहा था?
इस दौरान जस्टिस अजय गडकरी और जस्टिस रणजीत सिंह भोंसले की खंडपीठ ने रिहाई का आदेश देते हुए शरद कलस्कर को 50 हजार रुपये का जमानत बांड भरने का निर्देश दिया था। अदालत ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की उस मांग को भी खारिज कर दिया, जिसमें जमानत आदेश को चार हफ्ते तक रोकने की मांग की गई थी। जस्टिस गडकरी ने कहा, जब हम पहले ही याचिकाकर्ता कलस्कर की हमलावर के रूप में पहचान पर संदेह जता चुके हैं, तो इस आदेश पर रोक लगाने का सवाल ही नहीं उठता।
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अप्रैल में पहले आरोपी शरद को मिली थी जमानत
वहीं, अप्रैल महीने में बॉम्बे हाई कोर्ट ने 29 अप्रैल को 2013 में तर्कवादी नरेंद्र दाभोलकर की हत्या मामले में दोषी ठहराए गए शरद कलस्कर को जमानत दी। अदालत ने हमलावर के रूप में उनकी पहचान को लेकर संदेह जताया था। जबकि, पिछले साल अदालत ने वाम नेता गोविंद पंसारे की हत्या के मामले में भी कलस्कर को जमानत दी थी।
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नरेंद्र दाभोलकर कौन थे और कैसे हत्या हुई थी?
67 साल के दाभोलकर अंधविश्वास के खिलाफ काम करने वाले प्रमुख कार्यकर्ता थे। उन्होंने महाराष्ट्र अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति की स्थापना की थी। 20 अगस्त 2013 को पुणे में मोटरसाइकिल पर आए दो हमलावरों ने उन्हें गोली मार दी थी। 2014 में बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश के बाद जांच अपने हाथ में लेने वाली सीबीआई ने सचिन अंदुरे और शरद कलस्कर को इस अपराध का आरोपी बताया था। साल 2024 में एक विशेष अदालत ने इस मामले में शरद कलस्कर और सचिन अंदुरे को दोषी ठहराया। अदालत ने हत्या के लिए उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई थी। शरद कलस्कर ने हाईकोर्ट में अपील दायर की थी। उसने अपील पर अंतिम सुनवाई और फैसले तक जमानत देने की मांग की थी।
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मामले में कोर्ट ने क्या कहा था?
इस दौरान जस्टिस अजय गडकरी और जस्टिस रणजीत सिंह भोंसले की खंडपीठ ने रिहाई का आदेश देते हुए शरद कलस्कर को 50 हजार रुपये का जमानत बांड भरने का निर्देश दिया था। अदालत ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की उस मांग को भी खारिज कर दिया, जिसमें जमानत आदेश को चार हफ्ते तक रोकने की मांग की गई थी। जस्टिस गडकरी ने कहा, जब हम पहले ही याचिकाकर्ता कलस्कर की हमलावर के रूप में पहचान पर संदेह जता चुके हैं, तो इस आदेश पर रोक लगाने का सवाल ही नहीं उठता।