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BSF: कैडर समीक्षा में इलेक्ट्रिकल विंग पर चली कैंची, बॉर्डर पर फ्लड लाइटिंग, भूमिगत केबल नेटवर्क होगा प्रभावित

Jitendra Bhardwaj Jitendra Bhardwaj
Updated Tue, 28 Apr 2026 08:29 PM IST
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सार

वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग ने गृह मंत्रालय द्वारा भेजे गए इंजीनियरिंग कैडर (ग्रुप 'ए-बी-सी') की समीक्षा रिपोर्ट को मंजूरी दी है। इसमें सिविल विंग के मौजूदा संख्या बल को 761 से बढ़ाकर 849 कर दिया गया है। व्यय विभाग ने 88 नए पद सृजित करने को मंजूरी दी है।

BSF Cadre Review Cuts Electrical Wing; Cable Network and Surveillance Likely to Be Hit
बीएसएफ के जवान। - फोटो : एजेंसी
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विस्तार

विपरित परिस्थितियों में भारत-पाकिस्तान और भारत-बांग्लादेश बॉर्डर की चौकसी करने वाले केंद्रीय अर्धसैनिक बल 'बीएसएफ' की इलेक्ट्रिकल विंग के पदों पर कैंची चल गई है। विंग के कार्मिकों का कहना है कि विभिन्न पदों में कटौती से बॉर्डर पर फ्लड लाइटिंग, भूमिगत केबल नेटवर्क व सर्विलांस कार्य प्रभावित हो सकता है। वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग ने गृह मंत्रालय द्वारा भेजे गए इंजीनियरिंग कैडर (ग्रुप 'ए-बी-सी') की समीक्षा रिपोर्ट को मंजूरी दी है। इसमें सिविल विंग के मौजूदा संख्या बल को 761 से बढ़ाकर 849 कर दिया गया है। व्यय विभाग ने 88 नए पद सृजित करने को मंजूरी दी है। दूसरी तरफ, इलेक्ट्रिकल विंग पहले 962 पद रहे हैं, जिन्हें कैडर समीक्षा में घटाकर 854 कर दिया गया है। कुल 108 पदों की कटौती की गई है। 
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बीएसएफ डीजी को दिए जा रहे प्रतिवेदन 
इलेक्ट्रिकल विंग के कार्मिकों ने इस कैडर समीक्षा को भेदभावपूर्ण बताया है। उनका कहना है कि इस कैडर समीक्षा रिपोर्ट को मंजूरी मिलने से बीएसएफ की एक अहम इकाई का कार्य प्रभावित हो सकता है। इस बाबत कार्मिकों द्वारा बीएसएफ के डीजी को प्रतिवेदन दिए जा रहे हैं। बीएसएफ की इलेक्ट्रिकल विंग के कार्मिक, जल्द ही इस कैडर समीक्षा को कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी कर रहे हैं। लगभग डेढ़ दशक बाद हुए इस कैडर रिव्यू के बाद विभाग के ज्यादातर अधिकारियों और कार्मिकों में रोष व्याप्त है। आरोप है कि जो अधिकारी, दिल्ली में पदस्थापित हैं, उन्होंने ये सारी कवायद केवल अपने भविष्य को ध्यान में रखते हुए अंजाम दी है। 
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इलेक्ट्रिकल इकाई के साथ अन्याय 
कार्मिकों का कहना है कि असंतुलित कैडर रिव्यू में इलेक्ट्रिकल इकाई के साथ अन्याय दिखाई दे रहा है। इतनी अहम इकाई के 108 पदों को खत्म कर दिया गया और सिविल विंग में 88 पद बढ़ा दिए गए। वास्तु विंग के साथ भी ऐसा ही हुआ है। उनके भविष्य को भी ध्यान में नहीं रखा गया। पूरी प्रक्रिया में कुछ डायरेक्ट एंट्री सिविल के अधिकारियों का ही विशेष ध्यान रखा गया है। मौजूदा परिप्रेक्ष्य में इंस्पेक्टर को सहायक कमांडेंट बनने में बड़ी दिक्कतें आ सकती हैं। 2011 में जो सहायक कमांडेंट बने हैं, वे आज भी उसी पद पर हैं। 'एसी' में 25 प्रतिशत डायरेक्ट एंट्री है। बाकी पदों को पदोन्नति से भरा जा सकता है। मुश्किल से एक दो अधिकारी ही डीसी बने हैं। उन्हें भी दस बारह साल लगे हैं।

यह भी पढ़ें - रक्षा क्षमता में होगा इजाफा: भारत को रूस से मिलेगी एस-400 मिसाइल की चौथी खेप, अमेरिकी प्रतिबंधों का होगा असर?

सिविल विंग: 761 से बढ़कर हुए 849 पद 
बीएसएफ में इंजीनियरिंग कैडर के अंतर्गत सिविल विंग के मौजूदा संख्या बल को 761 से बढ़ाकर 849 कर दिया गया है। वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग ने 88 नए पद सृजित करने को मंजूरी दी है। डीआईजी (वर्क्स), पहले सिविल विंग में यह पद नहीं था। अब डीआईजी का नया पद बनाया गया है। कमांडेंट (वर्क्स) के तीन पद थे, अब कैडर समीक्षा में इन पदों की संख्या चार हो गई है। 'सेकंड इन कमांड' (वर्क्स) के पांच पदों को बढ़ाकर 17 कर दिया गया है। यानी सीधे 12 नए पदों के सृजन को स्वीकृति दी गई है। डिप्टी कमांडेंट (वर्क्स) के 21 पदों में भी इजाफा किया गया है। इनमें एक पद की बढ़ोतरी की गई है। सहायक कमांडेंट (वर्क्स) के 102 पद थे, कैडर समीक्षा में इस संख्या बल में वृद्धि नहीं की गई है। इंस्पेक्टर (वर्क्स) के मौजूदा 114 पदों में भी बढ़ोतरी नहीं की गई। एसआई (वर्क्स) के 278 पदों में वृद्धि हुई है। इसमें 8 नए पद सृजित किए गए हैं। अब इनकी संख्या 286 हो गई है। हवलदार के 194 पदों पर कैंची चल गई है। कैडर समीक्षा में 79 पद कम किए गए हैं। अब यह संख्या 115 बची है। सिपाही के पहले 44 पद थे, जिन्हें अब बढ़ाकर 188 कर दिया गया है। यानी 144 नए पदों के सृजन को मंजूरी मिली है। 

सिविल विंग के लिए गृह मंत्रालय ने भेजी ये रिपोर्ट 
  • -डीआईजी (वर्क्स) के तीन नए पद सृजित करना 
  • -कमांडेंट (वर्क्स) के तीन पदों को 10 करना    
  • -सेकंड इन कमांड के 5 पदों को 17 करना 
  • -डिप्टी कमांडेंट के 21 पदों को 37 करना 
  • -सहायक कमांडेंट के 102 पदों को 98 करना 
  • -इंस्पेक्टर के 114 पदों को 98 करना 
  • -एसआई के 278 पदों को 286 करना 
  • -एएसआई के 41 नए पद सृजित करना  
  • -हवलदार के 194 पदों को 115 करना 
  • -सिपाही के 44 पदों को 188 करना 
नोट: सिविल विंग में मौजूदा स्वीकृत संख्या बल 761 है, जबकि ड्यूटी पर 557 कार्मिक हैं। गृह मंत्रालय ने 862 पदों को मंजूरी देने की रिपोर्ट भेजी, लेकिन व्यय विभाग ने 849 पदों की स्वीकृति दी है। 

इलेक्ट्रिकल विंग के 108 पदों में कटौती 
इस विंग में पहले 962 पद रहे हैं, जिन्हें कैडर समीक्षा में घटाकर 854 कर दिया गया है। व्यय विभाग ने 108 पदों में कटौती की है। विंग में डीआईजी (इलेक्ट्रिकल) का एक पद सृजित किया गया है। इससे पहले बीएसएफ में डीआईजी (इलेक्ट्रिकल) का कोई पद नहीं था। कमांडेंट (इलेक्ट्रिकल) का केवल एक पद है। इसमें कोई बढ़ोतरी नहीं की गई। 'सेकंड इन कमांड' (इलेक्ट्रिकल) के मौजूदा छह पदों में भी वृद्धि नहीं की गई। डिप्टी कमांडेंट (इलेक्ट्रिकल) के 12 पद हैं। इनमें एक नया पद सृजित किया गया है। अब इनकी पदों की संख्या 13 हो गई है। 
सहायक कमांडेंट (इलेक्ट्रिकल) के मौजूदा 74 पदों की संख्या में भी वृद्धि नहीं की गई। इंस्पेक्टर (इलेक्ट्रिकल) के 70 पदों की संख्या को इसी स्तर पर बनाए रखा गया है। कोई नया पद सृजित नहीं किया गया। एसआई (इलेक्ट्रिकल) के 237 पदों में कटौती कर दी गई है। अब इनमें 27 पद खत्म कर दिए गए हैं। हवलदार के 336 पद थे, जिनमें नए पदों का सृजन करने की बजाए उनमें भारी कटौती कर दी गई है। कुल 131 पद खत्म किए गए हैं। अब इनकी संख्या 205 रह गई है। सिपाही के 122 पदों में 85 नए पदों का सृजन हुआ है। अब यह संख्या 207 हो गई है। हवलदार 'जनरेटर मेकेनिक' के 67 पदों को भी घटाया गया है। अब यह संख्या 30 रह गई है। सिपाही 'जनरेटर मेकेनिक' के 37 पदों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। 

इलेक्ट्रिकल विंग के लिए गृह मंत्रालय की रिपोर्ट 
-डीआईजी (इलेक्ट्रिकल) का एक नया पद सृजित करना 
-कमांडेंट (इलेक्ट्रिकल) में एक पद सृजित कर दो करना 
-सेकंड इन कमांड के 6 पदों को 9 करना 
-डिप्टी कमांडेंट के 12 पदों को 23 करना 
-सहायक कमांडेंट के 74 पदों को 67 करना 
-इंस्पेक्टर के 70 पदों को 91 करना 
-एसआई के 237 पदों को 210 करना 
-एएसआई के 41 नए पद सृजित करना  
-हवलदार के 336 पदों को 113 करना 
-सिपाही के 122 पदों को 207 करना 
-हवलदार जनरेटर मेकेनिक के 67 पदों को 30 करना 
-सिपाही जनरेटर मेकेनिक के 37 पदों को 14 करना 

नोट: इलेक्ट्रिकल विंग में मौजूदा स्वीकृत संख्या बल 962 है, जबकि ड्यूटी पर 605 कार्मिक बताए गए हैं। इसके बावजूद गृह मंत्रालय ने 841 पद रखने की कैडर समीक्षा रिपोर्ट, व्यय विभाग के पास भेजी। व्यय विभाग ने 854 पदों को मंजूरी दी।  

सिपाही/हवलदार के पद 
हवलदार के मौजूदा 336 पदों में 180 जनरेटर आपरेटर, 156 हवलदार (लाइनमैन/वायरमैन/इलेक्ट्रिशियन) के पदों में 72 हवलदार (इलेक्ट्रिशियन)(एनडीआरएफ) के पद भी शामिल हैं। सिपाही के मौजूदा 122 पदों में 89 सिपाही (जनरेटर आपरेटर), 15 सिपाही (लाइनमैन) और 18 प्रतिनियुक्ति के लिए रिजर्व पद हैं।  

इलेक्ट्रिकल कैडर ने समीक्षा पर उठाए सवाल 
-कोई वस्तुनिष्ठ मानदंड परिभाषित नहीं 
-समीक्षा रिपोर्ट तैयार करने में मनमानी 
-इलेक्ट्रिकल कैडर को सुनवाई का अवसर नहीं 
-कार्यभार के आंकड़े प्रस्तुत करने का मौका नहीं 
-यह ऑडी अल्टरम पार्टेम का स्पष्ट उल्लंघन है 
-सिविल व इलेक्ट्रिकल इकाई का तुलनात्मक विश्लेषण नहीं 
-इससे समीक्षा रिपोर्ट एकतरफा एवं पक्षपातपूर्ण 
-एक वर्ष से निष्पक्ष कैडर समीक्षा के आवेदन की अनदेखी
-समीक्षा समिति की संरचना पक्षपातपूर्ण
-समिति में इलेक्ट्रिकल का प्रतिनिधि शामिल नहीं 
-कर्तव्य प्रकृति, जोखिम और तकनीकी जटिलता की अनदेखी 
-वेतन आयोग के सिद्धांतों की अनदेखी की गई  
-पदोन्नति से वंचित, इससे करियर और वरिष्ठता को अपूरणीय क्षति 

बीएसएफ में इलेक्ट्रिकल विंग की ड्यूटी 
-चौबीस घंटे सीमावर्ती फ्लड लाइटिंग व्यवस्था 
-निरंतर संचालन, विफलता के लिए जीरो टॉलरेंस 
-डीजल जनरेटर प्रबंधन के लिए विशेष ज्ञान 
-भूमिगत केबल नेटवर्क, इसके लिए जरुरी है विशेषज्ञता 
-पावर फैक्टर रखरखाव में पेशेवर योग्यता और निगरानी 
-उच्च वोल्टेज स्विचगियर संचालन में मानव जीवन को खतरा 
-सीमा पर बने बंकर में लाइट का इंतजाम 
-बीएसएफ में बढ़ते सर्विलांस उपकरणों की देखरेख 
-लड़ाई के समय इलेक्ट्रिकल सप्लाई 
-सभी बीओपी पर सोलर स्कीम लागू हो रही है 

राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े पहलू 
  • -राष्ट्रीय सीमाओं पर सुरक्षा प्रणालियों को विद्युत अवसंरचना द्वारा सीधे बिजली मिलती है। निर्बाध बिजली आपूर्ति राष्ट्रीय सुरक्षा का दायित्व है।
  • -उच्च स्तरीय निगरानी प्रणालियां, विद्युत इंजीनियरों द्वारा बनाए रखी जाने वाली स्थिर बिजली आपूर्ति पर पूरी तरह निर्भर हैं।
  • -सीमावर्ती प्रतिष्ठानों में बिजली की विफलता सीमा सुरक्षा को सीधे प्रभावित करती है।
  • -करियर में प्रगति से वंचित करना गंभीर रूप से मनोबल में गिरावट पैदा करता है, जिससे कर्मचारियों के नौकरी छोड़ने और लापरवाही का जोखिम बढ़ जाता है। 
  • -सुरक्षा बिजली प्रणालियों को बनाए रखने के लिए विद्युत इंजीनियर, रात भर निरंतर काम करते हैं। 

पदोन्नति के रास्ते हो जाते हैं बंद 
  • -वित्त मंत्रालय की अनिवार्य शर्त के अनुसार, मौजूदा कर्मचारियों पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए। इलेक्ट्रिकल विंग में 108 पदों को समाप्त करने से पदोन्नति के रास्ते बंद हो जाते हैं।
  • -विद्युत विभाग को निशाना बनाना: कुल मिलाकर मामूली बदलावों के बावजूद, विद्युत विभाग पर ही पदों की कटौती का 100% भार पड़ा।
  • -आधुनिकीकरण के साथ असंगतता: उच्च तकनीक वाली स्मार्ट फेंसिंग को अपनाते हुए तकनीकी पदों में कटौती करना विरोधाभासी है।
  • -अपूरणीय हानि, यदि अब पदों को समाप्त कर दिया जाता है तो वरिष्ठता और पदोन्नति के अधिकार स्थायी रूप से समाप्त हो जाएंगे।
  • -सुविधा का संतुलन, यथास्थिति बनाए रखने से विभाग को कोई हानि नहीं होगी। यथास्थिति न रखने से उप-कैडर ध्वस्त हो जाएगा।
  • -वित्त मंत्रालय की अपनी शर्त 4(i) का उल्लंघन हस्तक्षेप के लिए एक मजबूत मामला बनाता है। 

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