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गुजरात में भारत की दूसरी बीएसएल-4 लैब का शिलान्यास: अमित शाह बोले- विदेश पर निर्भरता खत्म होगी

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गांधीनगर। Published by: निर्मल कांत Updated Tue, 13 Jan 2026 10:47 PM IST
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सार

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने गुजरात में देश की दूसरी बीएसएल-4 प्रयोगशाला की आधारशिला रखी। इस सुविधा के बाद भारत खतरनाक वायरस के परीक्षण के लिए विदेश पर निर्भर नहीं रहेगा। यह प्रयोगशाला युवा वैज्ञानिकों के लिए नए अवसर पैदा करेगी। पढ़िए पूरी रिपोर्ट-

BSL-4 lab will end India's dependence on foreign countries for testing dangerous viruses: Shah
गृह मंत्री अमित शाह ने गांधीनगर में बीएसएल-4 प्रयोगशाला की आधारशिला रखी - फोटो : एक्स/अमित शाह
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विस्तार
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केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने मंगलवार को गांधीनगर में गुजरात जैव प्रौद्योगिकी (बायोटेक्नोलॉजी) अनुसंधान केंद्र की बीएसएल-4 जैव-संरक्षण (बायोकंटेनमेंट) प्रयोगशाला की आधारशिला रखी। उन्होंने कहा कि इस सुविधा के बाद भारत को खतरनाक वायरस के नमूनों के परीक्षण के लिए विदेश पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
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शाह ने बताया कि इस प्रयोगशाला के सक्रिय होने के बाद नमूनों का परीक्षण तेजी से किया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि भारत में 1.4 अरब की जनसंख्या होने के बावजूद अब तक केवल पुणे के राष्ट्रीय वायरोलॉजी संस्थान में एक ही बीएसएल-4 प्रयोगशाला थी, जिसके कारण नमूने सैकड़ों किलोमीटर दूर भेजने पड़ते थे।
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उन्होंने बताया कि गुजरात पहला ऐसा राज्य बन गया है, जिसने अत्यधिक संक्रामक और जानलेवा वायरस के लिए आवश्यक उच्चतम स्तर की जैव सुरक्षा वाली बीएसएल-4 प्रयोगशाला स्थापित की है। यह देश में दूसरी बीएसएल-4 प्रयोगशाला है, लेकिन राज्य सरकार की ओर से बनाई जाने वाली पहली प्रयोगशाला है। इसके निर्माण का श्रेय गुजरात को जाता है।

शाह ने कहा, भारत की जैव सुरक्षा के लिए यहां 362 करोड़ रुपये की लागत से 11 हजार वर्ग मीटर क्षेत्र में एक मजबूत किला बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत में स्वास्थ्य सुरक्षा, जैव सुरक्षा और जैव क्षेत्र के विकास का नया युग शुरू हुआ है।

'स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए मजबूत सुरक्षा कवच बनेगा'
गृह मंत्री ने कहा कि यह सुविधा आने वाले दिनों में भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए मजबूत सुरक्षा कवच के रूप में उभरेगी। उन्होंने कहा कि यह पहल प्रधानमंत्री मोदी के दृष्टिकोण पर आधारित है, जिसमें विज्ञान और तकनीक केवल अनुसंधान तक सीमित नहीं रहे, बल्कि देश के समग्र विकास का आधार बने।

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'बायोटेक्नोलॉजी क्षेत्र में काम करने वाले युवाओं को मिलेंगे अवसर'
उन्होंने कहा कि पुणे के राष्ट्रीय वायरोलॉजी संस्थान के बाद यह भारत की दूसरी उच्च-स्तरीय प्रयोगशाला है। शाह ने बताया कि कई वर्षों तक भारत इस क्षेत्र में दुनिया में पीछे रहा। लेकिन बीएसएल-4 बायोकंटेनमेंट सुविधा से बायोटेक्नोलॉजी क्षेत्र में काम करने वाले युवाओं को नए अवसर मिलेंगे और भारत इस क्षेत्र में आगे बढ़ सकेगा।

'बीमारियों पर अध्ययन करने के लिए विश्व स्तरीय व्यवस्था'
शाह ने कहा कि इस सुविधा में वैज्ञानिक सुरक्षित माहौल में अत्यधिक संक्रामक और जानलेवा वायरस पर शोध कर सकेंगे। उन्होंने बताया कि डेनमार्क और अन्य देशों की बीएसएल प्रयोगशालाओं का अध्ययन कर इस सुविधा को विकसित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस प्रयोगशाला में जानवरों से इंसानों में फैलने वाली बीमारियों का अध्ययन करने के लिए विश्व स्तरीय व्यवस्था की जाएगी। शाह ने बताया कि 60 से 70 फीसदी बीमारियां जानवरों से इंसानों में फैलती हैं, इसलिए भारत ने 'वन हेल्थ मिशन' शुरू किया है।

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