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Cabinet: पेपर लीक कानून में संशोधन को केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी, सोमवार को संसद में पेश हो सकता है विधेयक

Fri, 24 Jul 2026 03:16 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: हिमांशु सिंह चंदेल Updated Fri, 24 Jul 2026 03:16 PM IST
सार

Cabinet Approves Amendments to Anti-Paper Leak: केंद्रीय मंत्रिमंडल ने एंटी-पेपर लीक कानून यानी सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 में संशोधन को मंजूरी दे दी है। सूत्रों के अनुसार, संशोधन विधेयक को सोमवार को संसद में विचार और पारित करने के लिए पेश किया जा सकता है। सरकार का मकसद परीक्षाओं में गड़बड़ियों पर रोक लगाने के लिए कानून को और मजबूत करना है। आइए, विस्तार से पूरे मामले को समझते हैं...

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Cabinet Approves Amendments to Anti-Paper Leak Law Bill Likely to Be Tabled in Parliament on Monday
पेपर लीक पर सरकार का बड़ा एक्शन - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

देश में लगातार सामने आए पेपर लीक के मामलों के बीच केंद्र सरकार परीक्षा प्रणाली को और सख्त बनाने की तैयारी में है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पेपर लीक और परीक्षा में धांधली करने वालों के खिलाफ कड़ी सजा का प्रावधान करने वाले नए विधेयक को मंजूरी दे दी है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, इस विधेयक को अगले सप्ताह संसद में विचार और पारित कराने के लिए पेश किया जा सकता है। सरकार का मानना है कि नए प्रावधानों से सार्वजनिक परीक्षाओं में गड़बड़ियों पर प्रभावी रोक लगेगी और छात्रों का परीक्षा व्यवस्था पर भरोसा मजबूत होगा।
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यह फैसला ऐसे समय आया है जब एक दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि सरकार पेपर लीक की घटनाओं से निपटने के लिए और मजबूत कानूनी उपायों पर विचार करेगी। उन्होंने कहा था कि सरकार छात्रों के भविष्य की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। सूत्रों के मुताबिक, प्रस्तावित कानून में पेपर लीक और परीक्षा धोखाधड़ी में शामिल लोगों के लिए मौजूदा व्यवस्था से अधिक कड़ी सजा का प्रावधान किया जाएगा। इसके साथ ही दोषियों के खिलाफ तेजी से कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए विशेष तंत्र तैयार किए जाएंगे, जिनमें फास्ट ट्रैक अदालतों की व्यवस्था भी शामिल हो सकती है।
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नए विधेयक में क्या बदलाव होने की उम्मीद?

सरकारी सूत्रों के अनुसार, नए विधेयक का उद्देश्य परीक्षा से जुड़े अपराधों के खिलाफ कानूनी ढांचे को और मजबूत करना है। इसमें पेपर लीक के मामलों में सजा बढ़ाने के साथ-साथ आरोपियों के खिलाफ तेजी से मुकदमा चलाने की व्यवस्था की जा सकती है। इसके लिए फास्ट ट्रैक अदालतों जैसी विशेष व्यवस्था का प्रस्ताव भी शामिल होने की संभावना है। सरकार का मानना है कि त्वरित सुनवाई और कड़ी सजा से संगठित तरीके से पेपर लीक करने वाले गिरोहों पर प्रभावी रोक लगाई जा सकेगी।

मौजूदा कानून में क्या प्रावधान?

देश में पहले से ही सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 लागू है। यह कानून जून 2024 से प्रभावी है और संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी), कर्मचारी चयन आयोग (एसएससी), राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए), बैंकिंग भर्ती एजेंसियों तथा अन्य केंद्रीय संस्थाओं की सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक और नकल जैसी गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए बनाया गया था। इस कानून के तहत संगठित पेपर लीक से जुड़े अपराधों को संज्ञेय, गैर-जमानती और गैर-समझौतायोग्य बनाया गया है। अपराध की गंभीरता के आधार पर तीन से 10 साल तक की जेल और संगठित अपराध के मामलों में एक करोड़ रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है। अनुचित गतिविधियों में शामिल सेवा प्रदाताओं पर भी कार्रवाई और परीक्षा की लागत वसूलने का प्रावधान है।

पीएम मोदी ने देर रात जारी वीडियो संदेश में क्या कहा था?

  • पेपर लीक कोई मामूली विषय नहीं है।
  • यह लाखों छात्रों और उनके अभिभावकों के लिए बेहद पीड़ादायक मामला है।
  • शुक्रवार को होने वाली केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में पेपर लीक के खिलाफ और सख्त कदमों पर फैसला लिया जाएगा।
  • उन्होंने कहा कि सरकार परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।
  • पिछले ढाई महीनों में पेपर लीक रोकने के लिए कई वैध और ठोस कदम उठाए गए हैं।
  • पेपर लीक के मामलों में शामिल आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
  • गिरफ्तार आरोपी फिलहाल जेल में हैं।
  • सरकार पेपर लीक करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई जारी रखेगी।
  • छात्रों के भविष्य की रक्षा करना सरकार की प्राथमिकता है।

सरकार ने अब नया कदम क्यों उठाया?

यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब नीट पेपर लीक के कथित मामले को लेकर राजनीतिक विवाद लगातार बना हुआ है। संसद में भी विपक्ष परीक्षा में कथित अनियमितताओं पर चर्चा और जवाबदेही की मांग करता रहा है। इसी दौरान 'कॉकरोच जनता पार्टी' युवाओं के आंदोलन के रूप में सामने आई, जिसने प्रमुख प्रतियोगी परीक्षाओं, खासकर नीट में कथित पेपर लीक के मुद्दे को उठाया। बाद में इस आंदोलन ने परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही तय करने और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की भी मांग की। ऐसे माहौल में सरकार परीक्षा प्रणाली में भरोसा बहाल करने के लिए कानून को और सख्त बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। हालांकि, प्रस्तावित विधेयक के अंतिम प्रावधान संसद में पेश होने के बाद ही स्पष्ट होंगे।
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