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TMC सरकार में धांधली: क्या आपदा प्रबंधन के नाम पर बंगाल में हुआ करोड़ों का घोटाला? CAG की रिपोर्ट में खुलासा
Mon, 27 Jul 2026 09:49 AM IST
Pavan
पीटीआई, कोलकाता
पीटीआई, कोलकाता
Published by: Pavan
Updated Mon, 27 Jul 2026 09:49 AM IST
सार
कैग की रिपोर्ट में पश्चिम बंगाल की पूर्व सरकार पर आपदा प्रबंधन के दावों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने और राहत वितरण में अनियमितताओं के आरोप लगाए गए हैं। रिपोर्ट में लाभार्थियों की सूची में दोहराव, संदिग्ध भुगतान और निगरानी व्यवस्था की खामियां बताई गई हैं।
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ममता बनर्जी, पूर्व सीएम, पश्चिम बंगाल
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट में पश्चिम बंगाल की पूर्व सरकार की चक्रवात अम्फान राहत योजना को लेकर कई गंभीर अनियमितताओं की ओर इशारा किया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अम्फान से हुए नुकसान का आकलन कई मामलों में बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया। साथ ही राहत वितरण में गड़बड़ियां, लाभार्थियों की सूची में दोहराव और भुगतान प्रक्रिया में खामियां भी सामने आईं। प्रिंसिपल अकाउंटेंट जनरल (ऑडिट-II) मनीष कुमार ने कहा कि कैग ने राज्य सरकार को अम्फान राहत व्यवस्था में सुधार के लिए छह प्रमुख सिफारिशें दी हैं। उन्होंने कहा कि जिलों से आने वाली नुकसान की रिपोर्ट को अधिक सटीक और पारदर्शी बनाने की जरूरत है, ताकि आपदा प्रबंधन और राहत कार्य बेहतर तरीके से किए जा सकें।
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कैग ने क्या-क्या सिफारिशें कीं?
मनीष कुमार के मुताबिक, रिपोर्ट में कहा गया है कि:
उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने दावा किया है कि उसने इन व्यवस्थाओं को मजबूत किया है, लेकिन कैग केवल सरकारी दावे पर भरोसा नहीं करेगा। ऑडिट टीम मौके पर जाकर जांच करेगी कि वास्तव में सुधार लागू किए गए हैं या नहीं। इसके बाद सरकार की ओर से भेजी गई कार्रवाई रिपोर्ट का भी सत्यापन किया जाएगा।
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नुकसान के दावों पर उठे सवाल
मनीष कुमार ने बताया कि रिपोर्ट में आवास, कृषि, मत्स्य पालन, पशुपालन और पेयजल जैसे विभिन्न क्षेत्रों में नुकसान के आकलन की समीक्षा की गई। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार ने आवास क्षेत्र में लगभग 24 लाख मकानों के क्षतिग्रस्त होने का दावा करते हुए करीब 18,000 करोड़ रुपये की सहायता मांगी थी। हालांकि, केंद्र सरकार की जांच टीम को पक्के मकानों को बड़े पैमाने पर नुकसान के पर्याप्त सबूत नहीं मिले। इसके बाद नुकसान के आकलन में कमी की गई।
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राज्य ने मांगे थे 35,018 करोड़ रुपये
कैग के अनुसार, पश्चिम बंगाल सरकार ने राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष (एनडीआरएफ) से 35,018 करोड़ रुपये की सहायता की मांग की थी। लेकिन केंद्र सरकार की जांच और मूल्यांकन के बाद एनडीआरएफ ने केवल 2,707 करोड़ रुपये की सहायता की सिफारिश की।
जवाबदेही सुनिश्चित करने पर जोर
मनीष कुमार ने कहा कि कैग का उद्देश्य केवल कमियां बताना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि सरकार उन कमियों को दूर करे। इसलिए राज्य सरकार से कार्रवाई रिपोर्ट मांगी गई है और उसके बाद ऑडिट टीम फील्ड में जाकर यह जांच करेगी कि सिफारिशों को वास्तव में लागू किया गया है या नहीं। उन्होंने कहा कि यही सरकारी जवाबदेही की प्रक्रिया है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि राहत राशि सही लोगों तक पहुंचे और सरकारी धन का सही उपयोग हो।
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कैग ने क्या-क्या सिफारिशें कीं?
मनीष कुमार के मुताबिक, रिपोर्ट में कहा गया है कि:
- आपदा से हुए नुकसान का सही और वैज्ञानिक तरीके से आकलन किया जाए।
- राहत सहायता के लिए एक समान और व्यापक आवेदन प्रक्रिया लागू की जाए।
- लाभार्थियों के चयन की प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष हो, क्योंकि कई मामलों में एक ही व्यक्ति का नाम दो बार पाया गया।
- राहत राशि जारी करने से पहले संबंधित अधिकारियों द्वारा रिकॉर्ड की अनिवार्य जांच की जाए।
- राहत सामग्री के भंडारण और वितरण की निगरानी व्यवस्था को मजबूत किया जाए।
- जिन मामलों में अनियमित या संदिग्ध भुगतान हुआ है, उनकी जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने दावा किया है कि उसने इन व्यवस्थाओं को मजबूत किया है, लेकिन कैग केवल सरकारी दावे पर भरोसा नहीं करेगा। ऑडिट टीम मौके पर जाकर जांच करेगी कि वास्तव में सुधार लागू किए गए हैं या नहीं। इसके बाद सरकार की ओर से भेजी गई कार्रवाई रिपोर्ट का भी सत्यापन किया जाएगा।
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नुकसान के दावों पर उठे सवाल
मनीष कुमार ने बताया कि रिपोर्ट में आवास, कृषि, मत्स्य पालन, पशुपालन और पेयजल जैसे विभिन्न क्षेत्रों में नुकसान के आकलन की समीक्षा की गई। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार ने आवास क्षेत्र में लगभग 24 लाख मकानों के क्षतिग्रस्त होने का दावा करते हुए करीब 18,000 करोड़ रुपये की सहायता मांगी थी। हालांकि, केंद्र सरकार की जांच टीम को पक्के मकानों को बड़े पैमाने पर नुकसान के पर्याप्त सबूत नहीं मिले। इसके बाद नुकसान के आकलन में कमी की गई।
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राज्य ने मांगे थे 35,018 करोड़ रुपये
कैग के अनुसार, पश्चिम बंगाल सरकार ने राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष (एनडीआरएफ) से 35,018 करोड़ रुपये की सहायता की मांग की थी। लेकिन केंद्र सरकार की जांच और मूल्यांकन के बाद एनडीआरएफ ने केवल 2,707 करोड़ रुपये की सहायता की सिफारिश की।
जवाबदेही सुनिश्चित करने पर जोर
मनीष कुमार ने कहा कि कैग का उद्देश्य केवल कमियां बताना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि सरकार उन कमियों को दूर करे। इसलिए राज्य सरकार से कार्रवाई रिपोर्ट मांगी गई है और उसके बाद ऑडिट टीम फील्ड में जाकर यह जांच करेगी कि सिफारिशों को वास्तव में लागू किया गया है या नहीं। उन्होंने कहा कि यही सरकारी जवाबदेही की प्रक्रिया है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि राहत राशि सही लोगों तक पहुंचे और सरकारी धन का सही उपयोग हो।