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RG Kar: पीड़िता के माता-पिता चीफ जस्टिस की बेंच से स्पष्टीकरण मांगें; आगे की जांच पर एकल पीठ ने ऐसा क्यों कहा?

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता Published by: शुभम कुमार Updated Tue, 24 Dec 2024 11:46 PM IST
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सार

कलकत्ता उच्च न्यायालय की एकल पीठ ने मंगलवार को आरजी कर मामले में पीड़िता के माता-पिता को मुख्य न्यायाधीश से यह स्पष्टीकरण मांगने का आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि क्या वह उनके मामले पर सुनवाई कर सकते हैं, क्योंकि मुख्य न्यायाधीश पहले ही इस मामले की सुनवाई कर रहे हैं। 
 

Cal HC asks parents of RG Kar victim to seek clarification from CJ's bench on further probe
कलकत्ता हाईकोर्ट - फोटो : ANI
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विस्तार

कलकत्ता उच्च न्यायालय की एकल पीठ ने मंगलवार को आरजी कर मामले में पीड़िता के माता-पिता को मुख्य न्यायाधीश से यह स्पष्टीकरण मांगने का आदेश दिया। कोर्ट ने तर्क दिया कि क्या वह उनके मामले पर सुनवाई कर सकते हैं, क्योंकि मुख्य न्यायाधीश पहले ही इस मामले की सुनवाई कर रहे हैं। 
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मामले में पीड़िता के वकील ने कहा कि वे उन मुद्दों पर चर्चा करना चाहते हैं जिन पर सीबीआई ने अब तक ध्यान नहीं दिया है और उन्हें मामले की जांच से असंतोष है। 
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सीबीआई के वकील का बयान
 वहीं इस मामले में सीबीआई के वकील ने कहा कि जांच जारी है और मामले में निचली अदालत में आरोपपत्र दाखिल होने के बाद एजेंसी ने सर्वोच्च न्यायालय में तीन स्थिति रिपोर्ट दाखिल की हैं। इसको लेकर न्यायमूर्ति तीर्थंकर घोष ने कहा कि चूंकि मुख्य न्यायाधीश टी एस शिवगनम की पीठ ने इस मामले की सीबीआई जांच का आदेश दिया था, इसलिए याचिकाकर्ताओं को यह जानने की जरूरत है कि क्या इस पर मुख्य न्यायाधीश की पीठ सुनवाई कर सकती है। 

याचिकाकर्ता का आदेश
न्यायाधीश ने याचिकाकर्ताओं को निर्देश दिया कि वे पहले  मुख्य न्यायाधीश से स्पष्टीकरण प्राप्त करें, फिर मामले की सुनवाई पर आगे बढ़ें। बता दें कि मामले की अगली सुनवाई 15 जनवरी को होगी, तब तक स्पष्टीकरण लिया जाना चाहिए।  वहीं सीबीआई ने मामले के मुख्य आरोपी संजय रॉय के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया है। आरोपपत्र में कहा गया कि रॉय ने 9 अगस्त को डॉक्टर के साथ अपराध किया, जब वह अस्पताल के सेमिनार कक्ष में सो रहा था। 

डॉक्टरों ने विरोध प्रदर्शन कर सीबीआई पर लगाए आरोप
वहीं इस मामले की जांच में देरी को लेकर जूनियर डॉक्टरों ने मंगलवार को सीबीआई के साल्ट लेक स्थित कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। दावा किया जा रहा है कि ये विरोध प्रदर्शन 31 दिसंबर तक चलेग। विरोध कर रहे डॉक्टरों के आरोप की बात करें तो उन्होंने आरोप लगाया कि सीबीआई आरजी कर मामले की जांच में अनावश्यक देरी कर रही है और कोलकाता पुलिस के साथ मिलकर अपराधियों को बचा रही है। डॉक्टरों ने प्रतीकात्मक रूप से सीबीआई कार्यालय के गेट पर ताला लगा दिया और एजेंसी से जांच में तेजी लाने की मांग की। जब सुरक्षाकर्मियों ने ताला हटाया, तो डॉक्टरों और पुलिस के बीच हाथापाई हो गई। 

प्रदर्शनकारी डॉक्टर का बयान
प्रदर्शन को लेकर एक डॉक्टर ने कहा सीबीआई जिस तरह से जांच कर रही है, उससे हम उम्मीद खो रहे हैं। अगर यही चलता रहा तो बेहतर होगा कि वे कोलकाता में अपना कार्यालय बंद कर दें। इसके साथ ही एक अन्य डॉक्टर ने कहा कि इतने दिन बाद भी हमारी बहन अभया को न्याय नहीं मिला। सीबीआई अपराधियों को बचाने के लिए कोलकाता पुलिस के साथ मिलकर काम कर रही है। हमें सीबीआई नहीं चाहिए। 

सियालदह कोर्ट ने दी थी जमानत
गौरतलब है कि सियालदह कोर्ट ने 13 दिसंबर को ताला पुलिस स्टेशन के पूर्व प्रभारी अभिजीत मंडल और आरजी कर मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष को जमानत दी थी, क्योंकि सीबीआई ने 90 दिन में आरोपपत्र दाखिल नहीं किया था। बता दें कि मंडल पर एफआईआर दर्ज करने में देरी का आरोप था, जबकि घोष पर सबूतों से छेड़छाड़ का आरोप था। हालांकि, घोष को जमानत मिलने के बावजूद, वह अन्य मामलों में न्यायिक रिमांड पर होने के कारण जेल में रहेंगे।
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