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Bengal: 'परिणाम भुगतने ही होंगे', कोर्ट ने शादी का वादा कर दुष्कर्म करने के मामले में दोषसिद्धि को बरकरार रखा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता।
Published by: निर्मल कांत
Updated Sun, 08 Feb 2026 03:52 PM IST
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सार
Bengal: कलकत्ता हाईकोर्ट ने विवाह का झूठा वादा कर संबंध बनाने के मामले में दोषी की अपील खारिज कर सजा को बरकरार रखा। कोर्ट ने कहा कि धोखे से ली गई सहमति को वैध सहमति नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि शुरू से गलत मंशा रखने वाले दोषी को अपने कृत्य का परिणाम भुगतना होगा। क्या है पूरा मामला, पढ़ें रिपोर्ट-
कलकत्ता हाई कोर्ट
- फोटो : एएनआई (फाइल)
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विस्तार
कलकत्ता हाईकोर्ट ने विवाह का झूठा वादा कर दुष्कर्म करने वाले दोषी की अपील याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि इस तरह की सहमति को सहमति नहीं माना जा सकता। आरोपी को अपने गलत कृत्य का परिणाम भुगतना होगा।
आरोपी को 2014 में मुर्शिदाबाद जिले के कंदी सत्र अदालत ने भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 376 के तहत दोषी ठहराया था। उसे सात साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई थी। उसके खिलाफ एक जनवरी 2006 को शिकायत दर्ज कराई गई थी। शिकायत में कहा गया था कि आरोपी ने विवाद का झूठा वादा कर महिला से संबंध बनाए।
मामला क्या हुआ था?
हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि आरोपी की शुरुआत से से ही मंशा सही नहीं थी। गरीब लड़की आरोपी के बहकावे में आ गई और उसकी वासना का शिका बनी। आरोपी ने यह कहकर विवाद का वादा किया था कि अगर वह उसे बच्चा देगी तो वह उससे विवाह करेगा। जब पीड़िता आरोपी से विवाद के लिए अपने परिवार के पास गई, तो आरोपी ने इनकार कर दिया। उस समय आरोपी पहले से ही एक अन्य महिला से शादीशुदा था। इसके बाद बुरवान थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई। पीड़िता उस समय आरोपी के बच्चे की गर्भवती थी।
जज ने याचिका को खारिज करते हुए क्या कहा?
ये भी पढ़ें: बंगाल एसआईआर : मतदाताओं की सुनवाई की समयसीमा खत्म, अंतिम तारीख बढ़ाने को लेकर असमंजस
दोषी के वकील ने क्या दलील दी थी?
दोषी के वकील ने अदालत से उसे बरी करने की मांग की। उनका कहना था कि शिकायतकर्ता 20 से 21 साल की बालिग थी और उसने स्वेच्छा से संबंध बनाए थे, इसलिए इसे दुष्कर्म नहीं माना जाना चाहिए। वकील ने यह भी दलील दी कि महिला को आरोपी की शादीशुदा स्थिति की जानकारी थी। वहीं, अभियोजन पक्ष के वकील ने इस मांग का विरोध किया। उन्होंने कहा कि आरोपी कभी भी पीड़िता से विवाह करना नहीं चाहता था और उसने केवल अपनी वासना पूरी करने के लिए विवाह का झूठा वादा किया था।
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आरोपी को 2014 में मुर्शिदाबाद जिले के कंदी सत्र अदालत ने भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 376 के तहत दोषी ठहराया था। उसे सात साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई थी। उसके खिलाफ एक जनवरी 2006 को शिकायत दर्ज कराई गई थी। शिकायत में कहा गया था कि आरोपी ने विवाद का झूठा वादा कर महिला से संबंध बनाए।
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मामला क्या हुआ था?
हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि आरोपी की शुरुआत से से ही मंशा सही नहीं थी। गरीब लड़की आरोपी के बहकावे में आ गई और उसकी वासना का शिका बनी। आरोपी ने यह कहकर विवाद का वादा किया था कि अगर वह उसे बच्चा देगी तो वह उससे विवाह करेगा। जब पीड़िता आरोपी से विवाद के लिए अपने परिवार के पास गई, तो आरोपी ने इनकार कर दिया। उस समय आरोपी पहले से ही एक अन्य महिला से शादीशुदा था। इसके बाद बुरवान थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई। पीड़िता उस समय आरोपी के बच्चे की गर्भवती थी।
जज ने याचिका को खारिज करते हुए क्या कहा?
- जस्टिस चैताली चटर्जी (दास) ने हालिया फैसले में आरोपी की अपील को खारिज करते हुए कहा कि इसमें कोई दम नहीं है।
- कोर्ट ने कहा कि जिस सहमति को शुरू से ही वादा पूरा न करने की मंशा से हासिल किया गया हो और लड़की को विवाद का झूठा भरोसा देकर शारीरिक संबंध बनाए गए हों, उसे सहमति नहीं माना जा सकता। यह पूरी तरह गलतफहमी में ली गई सहमति है।
- जज ने कहा कि आरोपी को अपने इस गंभीर अपराध का परिणाम भुगतना ही होगा, क्योंकि शुरू से ही उसकी मंशा गलत थी।
ये भी पढ़ें: बंगाल एसआईआर : मतदाताओं की सुनवाई की समयसीमा खत्म, अंतिम तारीख बढ़ाने को लेकर असमंजस
दोषी के वकील ने क्या दलील दी थी?
दोषी के वकील ने अदालत से उसे बरी करने की मांग की। उनका कहना था कि शिकायतकर्ता 20 से 21 साल की बालिग थी और उसने स्वेच्छा से संबंध बनाए थे, इसलिए इसे दुष्कर्म नहीं माना जाना चाहिए। वकील ने यह भी दलील दी कि महिला को आरोपी की शादीशुदा स्थिति की जानकारी थी। वहीं, अभियोजन पक्ष के वकील ने इस मांग का विरोध किया। उन्होंने कहा कि आरोपी कभी भी पीड़िता से विवाह करना नहीं चाहता था और उसने केवल अपनी वासना पूरी करने के लिए विवाह का झूठा वादा किया था।
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