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RG Kar Case: पीड़िता के डिनर करने से लेकर अंतिम संस्कार तक क्या हुआ? अब CBI-SIT करेगी जांच; हाईकोर्ट का फैसला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
Published by: नवीन पारमुवाल
Updated Thu, 21 May 2026 04:43 PM IST
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सार
कलकत्ता हाईकोर्ट ने आरजी कर मेडिकल कॉलेज मामले में सबूत मिटाने और मामले को दबाने के आरोपों की जांच के लिए सीबीआई की तीन सदस्यीय एसआईटी बनाने का निर्देश दिया है।
आरजी कर केस में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
RG Kar Case News: कलकत्ता हाईकोर्ट ने आरजी कर मेडिकल कॉलेज की ट्रेनी डॉक्टर के साथ हुए दुष्कर्म और हत्या के मामले में बड़ा आदेश दिया है। अदालत ने सबूतों को मिटाने और मामले को दबाने के आरोपों की जांच के लिए सीबीआई की तीन सदस्यीय विशेष जांच टीम यानी एसआईटी गठित करने का निर्देश दिया है।
कलकत्ता हाईकोर्ट की खंडपीठ ने गुरुवार को इस मामले की सुनवाई करते हुए सीबीआई को एसआईटी बनाने का आदेश दिया। न्यायमूर्ति शम्पा सरकार और न्यायमूर्ति तीर्थंकर घोष की पीठ ने कहा कि सीबीआई के संयुक्त निदेशक (पूर्व) इस टीम का नेतृत्व करेंगे। टीम के अन्य दो सदस्यों के नाम अदालत के आदेश के 48 घंटों के भीतर तय किए जाएंगे। अदालत ने इस घटना के सामाजिक प्रभाव को देखते हुए यह फैसला लिया है।
सबूत मिटाने के आरोपों की होगी जांच
यह एसआईटी उन आरोपों की जांच करेगी जिनमें कहा गया है कि घटना के तुरंत बाद सबूतों को नष्ट किया गया और मामले को दबाने की कोशिश की गई। जांच टीम उस समय से अपनी पड़ताल शुरू करेगी जब ट्रेनी डॉक्टर ने 9 अगस्त 2024 की रात को अस्पताल में खाना खाया था। इसके बाद से लेकर अगले दिन शाम को उनके अंतिम संस्कार तक की पूरी कड़ी को जोड़ा जाएगा।
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मृतक डॉक्टर के माता पिता ने कोर्ट में याचिका दायर कर दावा किया था कि उनकी बेटी के साथ हुई दरिंदगी में एक से अधिक व्यक्ति शामिल थे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया था कि प्रशासन ने शुरू से ही मामले को दबाने का प्रयास किया। अदालत ने एसआईटी को निर्देश दिया है कि वह 25 जून तक अपनी विस्तृत रिपोर्ट पेश करे। इसी दिन मामले की अगली सुनवाई होगी।
अस्पताल में हुई थी दरिंदगी
आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में अगस्त 2024 में एक पोस्ट ग्रेजुएट ट्रेनी डॉक्टर के साथ दुष्कर्म के बाद उसकी हत्या कर दी गई थी। इस घटना के बाद पूरे देश के डॉक्टर सड़कों पर उतर आए थे और बंगाल सरकार की काफी आलोचना हुई थी। इस मामले में पुलिस ने नागरिक स्वयंसेवक संजय राय को गिरफ्तार किया था जिसे बाद में कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई है।
यह भी पढ़ें: RG Kar Case: आरजी कर पीड़िता के पड़ोसी के घर तोड़फोड़, गवाह संजीव मुखर्जी ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया
कलकत्ता हाईकोर्ट की खंडपीठ ने गुरुवार को इस मामले की सुनवाई करते हुए सीबीआई को एसआईटी बनाने का आदेश दिया। न्यायमूर्ति शम्पा सरकार और न्यायमूर्ति तीर्थंकर घोष की पीठ ने कहा कि सीबीआई के संयुक्त निदेशक (पूर्व) इस टीम का नेतृत्व करेंगे। टीम के अन्य दो सदस्यों के नाम अदालत के आदेश के 48 घंटों के भीतर तय किए जाएंगे। अदालत ने इस घटना के सामाजिक प्रभाव को देखते हुए यह फैसला लिया है।
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सबूत मिटाने के आरोपों की होगी जांच
यह एसआईटी उन आरोपों की जांच करेगी जिनमें कहा गया है कि घटना के तुरंत बाद सबूतों को नष्ट किया गया और मामले को दबाने की कोशिश की गई। जांच टीम उस समय से अपनी पड़ताल शुरू करेगी जब ट्रेनी डॉक्टर ने 9 अगस्त 2024 की रात को अस्पताल में खाना खाया था। इसके बाद से लेकर अगले दिन शाम को उनके अंतिम संस्कार तक की पूरी कड़ी को जोड़ा जाएगा।
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अस्पताल में हुई थी दरिंदगी
आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में अगस्त 2024 में एक पोस्ट ग्रेजुएट ट्रेनी डॉक्टर के साथ दुष्कर्म के बाद उसकी हत्या कर दी गई थी। इस घटना के बाद पूरे देश के डॉक्टर सड़कों पर उतर आए थे और बंगाल सरकार की काफी आलोचना हुई थी। इस मामले में पुलिस ने नागरिक स्वयंसेवक संजय राय को गिरफ्तार किया था जिसे बाद में कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई है।
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