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बंगाल चुनाव में बाइक रैलियों पर लगेगी रोक?: कलकत्ता हाईकोर्ट ने बदले नियम, जानिए अगर आदेश न माना तो क्या होगा

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता Published by: Himanshu Singh Chandel Updated Mon, 27 Apr 2026 07:23 PM IST
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सार

कलकत्ता हाईकोर्ट ने बंगाल चुनाव में बाइक चलाने के नियमों में क्या बड़े बदलाव किये है? चुनाव आयोग द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों को लेकर हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने सिंगल बेंच के फैसले को क्यों पलटा? क्या 29 अप्रैल को मतदान के दिन समूह में बाइक चलाने पर पूरी तरह से रोक रहेगी? इस खबर में जानिए किन लोगों को मिलेगी छूट और क्या हैं नए नियम।
 

Calcutta High Court on motorcycle rally ban West Bengal election Commission pillion riding restrictions
कलकत्ता हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव को निष्पक्ष और शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराने के लिए कलकत्ता हाईकोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाया है। चुनाव आयोग ने सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मोटरसाइकिल चलाने पर कुछ पाबंदियां लगाई थीं। अब सोमवार को कलकत्ता हाईकोर्ट की एक डिवीजन बेंच (खंडपीठ) ने इस मामले में सिंगल बेंच के पहले के आदेश में कुछ बड़े बदलाव किए हैं। इस नए आदेश का सीधा असर उन राजनीतिक दलों और लोगों पर पड़ेगा, जो चुनाव के दौरान माहौल खराब करने के लिए समूह में बाइक रैलियां निकालते हैं। 
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हाईकोर्ट ने सिंगल बेंच के आदेश में क्या बदलाव किए?
 
  • कलकत्ता हाईकोर्ट की जस्टिस शंपा सरकार की अध्यक्षता वाली डिवीजन बेंच ने इस मामले की सुनवाई की।
  • बेंच ने जस्टिस कृष्णा राव के 20 अप्रैल के पुराने आदेश में संशोधन करते हुए उसमें 'समूह में बाइक चलाना' शब्द जोड़ दिया है।
  • अदालत ने सख्त निर्देश दिया है कि मतदान के दिन (29 अप्रैल) और उससे दो दिन पहले किसी भी तरह की मोटरबाइक रैली की अनुमति नहीं दी जाएगी।
  • चुनाव से ठीक पहले एक साथ कई बाइकों के समूह में चलने पर पूरी तरह से रोक रहेगी।


मतदान के दिन बाइक चलाने को लेकर क्या हैं पुराने नियम?
 
  • डिवीजन बेंच ने साफ किया है कि सिंगल बेंच के बाकी के आदेशों में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा, वे पहले की तरह ही लागू रहेंगे।
  • जस्टिस राव के पुराने आदेश के अनुसार, मतदान के दिन से 12 घंटे पहले मोटरसाइकिल पर पीछे किसी व्यक्ति को बैठाकर चलने पर रोक रहेगी।
  • हालांकि, इस नियम में आम जनता को कोई भारी परेशानी न हो, इसके लिए कुछ विशेष परिस्थितियों में छूट भी दी गई है।

बाइक पर पीछे बैठकर जाने की छूट किन लोगों को मिलेगी?
अगर कोई मेडिकल इमरजेंसी है या परिवार का कोई जरूरी कार्यक्रम है, तो बाइक पर पीछे बैठने की इजाजत होगी। स्कूली बच्चों को छोड़ने या स्कूल से लाने के जैसे जरूरी कामों के लिए भी इस नियम से छूट दी गई है। मतदान करने जाने के लिए परिवार के किसी सदस्य को सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक बाइक पर पीछे बैठाकर ले जाने की अनुमति होगी।
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डिलीवरी और ऑफिस जाने वालों पर भी लागू होगा यह नियम?
अदालत ने ओला-उबर जैसी राइड-हेलिंग सेवाओं को इस प्रतिबंध से पूरी तरह से बाहर रखा है। खाना पहुंचाने वाले (फूड डिलीवरी) और अन्य आवश्यक सेवाएं देने वाले लोगों को भी अपना काम करने की छूट होगी। इसके अलावा, जो लोग अपने दफ्तर (ऑफिस) जा रहे हैं, वे अपना वैध पहचान पत्र (आईडी कार्ड) दिखाकर आसानी से आ-जा सकते हैं।

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