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तृणमूल में रैली पर घमासान: ऋतब्रत बनर्जी गुट को हाईकोर्ट से झटका, 28 अगस्त के कार्यक्रम पर फैसला क्यों अटका?
Wed, 19 Aug 2026 05:27 PM IST
राकेश कुमार
आईएएनएस, कोलकाता।
आईएएनएस, कोलकाता।
Published by: राकेश कुमार
Updated Wed, 19 Aug 2026 05:27 PM IST
सार
28 अगस्त की रैली को लेकर तृणमूल के दोनों गुट आमने-सामने हैं। पुलिस ने किसी भी गुट को मेयो रोड पर कार्यक्रम की अनुमति नहीं दी है। अब ऋतब्रत बनर्जी के गुट की याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई होगी।
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तृणमूल में फिर आर-पार!
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
कोलकाता में तृणमूल कांग्रेस के भीतर जारी खींचतान अब कलकत्ता हाईकोर्ट पहुंच गई है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल के बागी गुट ने 28 अगस्त को रैली करने की अनुमति मांगी थी। पुलिस से अनुमति नहीं मिलने के बाद गुट ने हाईकोर्ट का रुख किया। बुधवार को हाईकोर्ट ने इस याचिका पर तुरंत सुनवाई करने से इनकार कर दिया। न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य की पीठ ने कहा कि मामले की सुनवाई तत्काल आधार पर नहीं होगी। याचिका को अगले शुक्रवार के लिए सूचीबद्ध किया गया है।
क्या 28 अगस्त की रैली को लेकर तृणमूल में फिर बढ़ेगा विवाद?
तृणमूल छात्र परिषद यानी टीएमसीपी का स्थापना दिवस 28 अगस्त को है। हर साल इस मौके पर मध्य कोलकाता के मेयो रोड स्थित महात्मा गांधी की प्रतिमा के पास रैली आयोजित की जाती है। इस बार मामला अलग है। तृणमूल कांग्रेस में दो गुट एक ही जगह पर कार्यक्रम करना चाहते हैं। एक गुट मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाला है। दूसरा गुट ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाला बागी गुट है। दोनों गुटों ने मेयो रोड पर गांधी प्रतिमा के पास कार्यक्रम आयोजित करने की इच्छा जताई थी। लेकिन कोलकाता पुलिस ने किसी भी गुट को वहां सभा करने की अनुमति नहीं दी।
ममता बनर्जी भी पहुंचीं हाईकोर्ट
पुलिस से अनुमति नहीं मिलने के बाद ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले मूल लेकिन अल्पमत गुट ने सोमवार को कलकत्ता हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। गुट ने 28 अगस्त को रैली आयोजित करने की अनुमति मांगी। न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य ने उस याचिका को स्वीकार कर लिया था और 19 अगस्त को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया था।
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अब ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने भी पुलिस की अनुमति नहीं मिलने के बाद हाईकोर्ट का रुख किया। गुट ने अपनी याचिका पर तत्काल सुनवाई की मांग की थी। हालांकि, अदालत ने इसे तत्काल सुनवाई के लिए स्वीकार नहीं किया और अगली सुनवाई शुक्रवार को तय की।
यह भी पढ़ें: महुआ के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी: बार-बार समन के बाद भी कोर्ट में पेश नहीं हुईं TMC सांसद, क्या है मामला?
विधानसभा चुनाव के बाद तीन गुटों में बंट गई तृणमूल?
हालिया पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में पार्टी की करारी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस तीन गुटों में बंट गई है। तृणमूल के लोकसभा सदस्यों में से बहुमत ने नेशनल सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया यानी एनसीपीआई का रुख कर लिया है। दूसरा गुट निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाला 'बागी लेकिन बहुमत' गुट है। बाकी सदस्य, हालांकि उनकी संख्या बहुत कम है, अब भी ममता बनर्जी के साथ हैं।
ऐसे में 28 अगस्त को टीएमसीपी के स्थापना दिवस पर होने वाला कार्यक्रम तृणमूल के भीतर शक्ति प्रदर्शन का बड़ा मौका बन गया है। फिलहाल दोनों गुटों को पुलिस से अनुमति नहीं मिली है और ऋतब्रत बनर्जी के गुट की याचिका पर तत्काल सुनवाई भी टल गई है।
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क्या 28 अगस्त की रैली को लेकर तृणमूल में फिर बढ़ेगा विवाद?
तृणमूल छात्र परिषद यानी टीएमसीपी का स्थापना दिवस 28 अगस्त को है। हर साल इस मौके पर मध्य कोलकाता के मेयो रोड स्थित महात्मा गांधी की प्रतिमा के पास रैली आयोजित की जाती है। इस बार मामला अलग है। तृणमूल कांग्रेस में दो गुट एक ही जगह पर कार्यक्रम करना चाहते हैं। एक गुट मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाला है। दूसरा गुट ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाला बागी गुट है। दोनों गुटों ने मेयो रोड पर गांधी प्रतिमा के पास कार्यक्रम आयोजित करने की इच्छा जताई थी। लेकिन कोलकाता पुलिस ने किसी भी गुट को वहां सभा करने की अनुमति नहीं दी।
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ममता बनर्जी भी पहुंचीं हाईकोर्ट
पुलिस से अनुमति नहीं मिलने के बाद ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले मूल लेकिन अल्पमत गुट ने सोमवार को कलकत्ता हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। गुट ने 28 अगस्त को रैली आयोजित करने की अनुमति मांगी। न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य ने उस याचिका को स्वीकार कर लिया था और 19 अगस्त को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया था।
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अब ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने भी पुलिस की अनुमति नहीं मिलने के बाद हाईकोर्ट का रुख किया। गुट ने अपनी याचिका पर तत्काल सुनवाई की मांग की थी। हालांकि, अदालत ने इसे तत्काल सुनवाई के लिए स्वीकार नहीं किया और अगली सुनवाई शुक्रवार को तय की।
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विधानसभा चुनाव के बाद तीन गुटों में बंट गई तृणमूल?
हालिया पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में पार्टी की करारी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस तीन गुटों में बंट गई है। तृणमूल के लोकसभा सदस्यों में से बहुमत ने नेशनल सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया यानी एनसीपीआई का रुख कर लिया है। दूसरा गुट निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाला 'बागी लेकिन बहुमत' गुट है। बाकी सदस्य, हालांकि उनकी संख्या बहुत कम है, अब भी ममता बनर्जी के साथ हैं।
ऐसे में 28 अगस्त को टीएमसीपी के स्थापना दिवस पर होने वाला कार्यक्रम तृणमूल के भीतर शक्ति प्रदर्शन का बड़ा मौका बन गया है। फिलहाल दोनों गुटों को पुलिस से अनुमति नहीं मिली है और ऋतब्रत बनर्जी के गुट की याचिका पर तत्काल सुनवाई भी टल गई है।