'महिला अफसर को स्थायी कमीशन क्यों नहीं?': सुप्रीम कोर्ट ने ICG को लगाई फटकार; दो हफ्ते में फैसला लेने का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने महिला अधिकारी प्रियंका त्यागी को स्थायी कमीशन नहीं देने पर भारतीय तटरक्षक बल (ICG) को कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने आईसीजी की नई नीति को अस्पष्ट और मनमाना बताते हुए दो सप्ताह में त्यागी के स्थायी कमीशन पर फैसला लेने को कहा।
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महिला अधिकारी को स्थायी कमीशन नहीं देने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को भारतीय तटरक्षक बल (ICG) को कड़ी फटकार लगाई। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि अदालत महिला अधिकारियों को इस तरह अपमानित नहीं होने देगी। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने आईसीजी की ओर से मंगलवार को जारी नीति को अस्पष्ट और मनमाना बताया।
प्रियंका त्यागी के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने क्या आदेश दिया?
पीठ ने आईसीजी को दो सप्ताह का समय देते हुए कहा कि वह अधिकारी प्रियंका त्यागी को स्थायी कमीशन देने पर फैसला करे। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि दो सप्ताह में फैसला नहीं लिया गया तो वह खुद उनके स्थायी रूप से सेवा में समायोजन को लेकर आदेश पारित कर सकती है। पीठ ने कहा कि अगर पुरुष अधिकारियों को स्थायी कमीशन दिया जा सकता है तो महिला अधिकारियों को इससे वंचित क्यों रखा जाए। मुख्य न्यायाधीश ने आईसीजी की ओर से पेश अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी से कहा कि दो सप्ताह में फैसला लिया जाए।
प्रियंका त्यागी की सेवा का रिकॉर्ड कितना खास है?
प्रियंका त्यागी शॉर्ट सर्विस अपॉइंटी (SSA) अधिकारी हैं और वह 14 साल से अधिक समय तक सेवा दे चुकी हैं। स्थायी कमीशन नहीं मिलने के बाद उन्हें सेवा से मुक्त किए जाने का निर्देश दिया गया था। उनके वकील सिद्धांत शर्मा ने अदालत को बताया कि त्यागी के पास सभी बलों में अपनी वरिष्ठता के हिसाब से सबसे अधिक उड़ान घंटों में से एक रिकॉर्ड है। उन्होंने डोर्नियर विमान पर करीब 4,500 घंटे उड़ान भरी है। वकील ने यह भी दावा किया कि उन्होंने समुद्र में 300 से अधिक लोगों की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
क्या प्रियंका त्यागी पहले भी सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुकी हैं?
यह पहली बार नहीं है जब त्यागी का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा है। अप्रैल 2024 में शीर्ष अदालत ने आईसीजी के रवैये पर सवाल उठाते हुए उन्हें दोबारा सेवा में शामिल करने का निर्देश दिया था। त्यागी देश के पूर्वी क्षेत्र में समुद्री गश्त के लिए तैनात डोर्नियर विमान की पहली ऑल-वुमन क्रू का हिस्सा रही थीं और विमान की कप्तान के रूप में काम कर चुकी हैं। 2024 में अदालत ने आईसीजी को त्यागी को उस पद पर दोबारा नियुक्त करने का निर्देश दिया था, जिस पद पर वह 2023 में सेवा से हटाए जाने के समय थीं।
ICG ने स्थायी कमीशन नहीं देने के पीछे क्या तर्क दिया?
आईसीजी की ओर से अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने कहा कि तटरक्षक बल की परिस्थितियों और उसके इतिहास को ध्यान में रखना होगा। उन्होंने तर्क दिया कि नौसेना की तरह आईसीजी के पास लंबे समय से महिला अधिकारियों के लिए पर्याप्त बुनियादी ढांचा उपलब्ध नहीं था। उन्होंने कहा कि महिला अधिकारियों के लिए कुछ विशेष सुविधाओं की जरूरत होती है और सभी के लिए रातोंरात नए पद या सुविधाएं तैयार नहीं की जा सकतीं। उनके अनुसार, अब आधुनिक जहाज खरीदे जा रहे हैं और सुविधाएं भी विकसित की जा रही हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने ICG के तर्क पर क्या कहा?
पीठ ने आईसीजी के बुनियादी ढांचे से जुड़े तर्कों पर सवाल उठाते हुए कहा कि अपनी ही निष्क्रियता का फायदा नहीं उठाया जा सकता। अदालत ने कहा कि इस मामले में तकनीकी आधार पर आपत्तियां स्वीकार नहीं की जाएंगी। मुख्य न्यायाधीश ने सवाल किया कि जब महिला अधिकारी लगातार 14 साल तक आईसीजी में सेवा दे रही हैं, तो फिर उन्हें स्थायी कमीशन से कैसे वंचित किया जा सकता है। न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची ने भी कहा कि महिला अधिकारी को उनके वरिष्ठ अधिकारियों की ओर से लगातार सिफारिश मिलती रही है और आईसीजी को स्थायी कमीशन के लिए उनके मामले पर विचार करना चाहिए था।
क्या सुप्रीम कोर्ट ने इसे लैंगिक समानता से जोड़ा?
अटॉर्नी जनरल ने अदालत से कहा कि मामले को केवल लैंगिक मुद्दे के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए और आईसीजी में बुनियादी ढांचे से जुड़े कई पहलुओं को ध्यान में रखना होगा। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने अपने पुराने फैसलों का भी हवाला दिया, जिनमें सेना, वायुसेना और नौसेना में महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन देने का रास्ता साफ किया गया था। अदालत ने पहले भी कहा था कि लैंगिक समानता की दिशा में आगे बढ़ते हुए महिलाओं को पीछे नहीं छोड़ा जा सकता।
अब प्रियंका त्यागी के मामले में क्या होगा?
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई दो सप्ताह के लिए टाल दी है। अब आईसीजी को इस अवधि में प्रियंका त्यागी को स्थायी कमीशन देने पर निर्णय लेना होगा। अगर आईसीजी दो सप्ताह में फैसला नहीं करता है, तो अदालत ने संकेत दिया है कि वह खुद उनके स्थायी रूप से सेवा में समायोजन को लेकर उचित आदेश पारित कर सकती है।