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बिना बीमा पेट्रोल नहीं: सुप्रीम कोर्ट का केंद्र सरकार को सख्त आदेश, दिल्ली से शुरू होगा पायलट प्रोजेक्ट

Wed, 19 Aug 2026 06:14 PM IST
राकेश कुमार पीटीआई, नई दिल्ली।
पीटीआई, नई दिल्ली। Published by: राकेश कुमार Updated Wed, 19 Aug 2026 06:14 PM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को वैध बीमा के बिना वाहनों को पेट्रोल पंपों पर ईंधन न देने वाली व्यवस्था का पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने को कहा है। इसकी शुरुआत दिल्ली से हो सकती है। केंद्र को 21 अगस्त को समयसीमा के साथ ठोस प्रस्ताव पेश करना है।
 

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Supreme Court Fuel Insurance Pilot Project Central Government
बिना बीमा ईंधन नहीं! - फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

बिना वैध बीमा के वाहन चलाने वालों पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्ती दिखाई है। कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा है कि वह ऐसे पायलट प्रोजेक्ट को लागू करे, जिसमें वैध बीमा नहीं होने पर पेट्रोल पंपों से वाहन को ईंधन ही न मिले। कोर्ट ने कहा कि इसकी शुरुआत दिल्ली से की जा सकती है।
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बुधवार को यह मामला जस्टिस संजय करोल और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की पीठ के सामने आया। केंद्र की ओर से पेश वकील ने चार अगस्त के सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला दिया। उन्होंने बताया कि पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय को इस व्यवस्था को लेकर कुछ चिंताएं हैं। इस पर पीठ ने साफ कहा, 'आपको इसे लागू करना होगा।' कोर्ट ने कहा कि पायलट प्रोजेक्ट दिल्ली से शुरू किया जा सकता है।
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केंद्र के वकील ने बताया कि इसके लिए तेल विपणन कंपनियों को पेट्रोल पंप डीलरों के साथ बैठक करनी होगी। इस पर कोर्ट ने कहा, 'आप पायलट प्रोजेक्ट शुरू करें।' सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से एक ठोस प्रस्ताव पेश करने को भी कहा है। इसमें चार अगस्त के फैसले में दिए गए निर्देशों को लागू करने की समयसीमा बतानी होगी। मामले की अगली सुनवाई 21 अगस्त को होगी।
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चार अगस्त के फैसले में क्या कहा था?
सुप्रीम कोर्ट ने चार अगस्त को दिए अपने फैसले में बिना तीसरे पक्ष के बीमा के सड़कों पर चल रहे बड़ी संख्या में वाहनों पर गंभीर चिंता जताई थी। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को निर्देश दिया था कि एक पायलट प्रोजेक्ट तैयार किया जाए। इसमें वाहनों को मिलने वाले ईंधन को उनके वैध बीमा की स्थिति से जोड़ा जाए। यानी अगर किसी वाहन का वैध बीमा नहीं है, तो पेट्रोल पंप पर उसे ईंधन न दिया जाए। वाहन मालिक को पहले वैध बीमा कराना होगा। इसके बाद ही उसे ईंधन मिल सकेगा।

यह भी पढ़ें: 'महिला अफसर को स्थायी कमीशन क्यों नहीं?': सुप्रीम कोर्ट ने ICG को लगाई फटकार; दो हफ्ते में फैसला लेने का आदेश


बिना बीमा वाहनों की पहचान में मिलेगी मदद
सुप्रीम कोर्ट ने इस व्यवस्था के दो बड़े फायदे बताए थे। पहला, इससे बिना बीमा या बिना पंजीकरण वाले वाहनों की पहचान करने में मदद मिलेगी। दूसरा, वाहन मालिकों पर वैध बीमा कराने का दबाव बनेगा। शीर्ष अदालत ने कहा था कि इस तरह के प्रोजेक्ट से मोटर वाहन अधिनियम की धारा 146 के प्रावधानों का जमीन पर पालन सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। इसके लिए एएनपीआर यानी ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन कैमरों का इस्तेमाल किया जा सकता है।

टोल प्लाजा पर भी ऑटोमैटिक व्यवस्था के निर्देश
चार अगस्त के फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय राजमार्गों पर होने वाली सड़क दुर्घटनाओं का भी संज्ञान लिया था। कोर्ट ने टोल प्लाजा पर लगने वाली लंबी कतारों के असर पर भी ध्यान दिया था। कोर्ट ने कुछ कॉरिडोर पर पायलट प्रोजेक्ट लागू करने का निर्देश दिया था। इसमें टोल प्लाजा पर वाहनों को रोकने के बजाय टोल प्वाइंट से गुजरने वाले वाहनों की ऑटोमैटिक पहचान की व्यवस्था करने की बात कही गई थी।
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