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राष्ट्रपति का IIS प्रशिक्षुओं को मंत्र: कहा- सोशल मीडिया पर लोगों की चिंताओं सुनकर जवाब भी दें; और क्या कहा?
Wed, 19 Aug 2026 06:27 PM IST
Devesh Tripathi
पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: Devesh Tripathi
Updated Wed, 19 Aug 2026 06:27 PM IST
सार
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भारतीय सूचना सेवा के प्रशिक्षु अधिकारियों से संवाद को एकतरफा न रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि डिजिटल माध्यमों के जरिए सरकारी सूचनाएं पहुंचाने के साथ जनता की समस्याओं और प्रतिक्रियाओं को समझना भी जरूरी है। गलत सूचनाओं के तेजी से प्रसार के बीच उन्होंने प्रमाणिक और समयबद्ध जानकारी उपलब्ध कराने पर जोर दिया।
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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बुधवार को भारतीय सूचना सेवा (आईआईएस) के अधिकारियों से कहा कि वे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल केवल लोगों को जानकारी देने और उनसे जुड़ने के लिए ही नहीं, बल्कि उनकी चिंताओं को सुनने और उनका जवाब देने के लिए भी करें। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया ने नागरिकों के सूचना प्राप्त करने, साझा करने और उस पर प्रतिक्रिया देने के तरीके को पूरी तरह बदल दिया है।
राष्ट्रपति ने यहां राष्ट्रपति भवन में उनसे मुलाकात करने आए भारतीय सूचना सेवा के अधिकारी प्रशिक्षुओं से कहा, "आपको सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल केवल लोगों को जानकारी देने और उनसे जुड़ने के लिए नहीं, बल्कि उनकी चिंताओं को सुनने, समझने और उनका जवाब देने के लिए भी करना चाहिए।"
'तथ्यों और गलत सूचनाओं के बीच करना होगा अंतर'
उन्होंने कहा कि अधिकारी यह सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे कि सरकार की नीतियों, कार्यक्रमों और पहलों की जानकारी लोगों तक स्पष्ट, सटीक और समय पर पहुंचे। मुर्मू ने कहा, "इसके साथ ही आपकी एक समान रूप से महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सुनने की भी है। आपको लोगों की चिंताओं, उनकी आकांक्षाओं और उनकी प्रतिक्रिया को समझने का प्रयास करना चाहिए। आपको यह सुनिश्चित करना होगा कि जनसंचार लोगों की जरूरतों के अनुरूप और नागरिक-केंद्रित हो।"
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राष्ट्रपति ने कहा कि लगातार जटिल होते सूचना के माहौल में अधिकारियों को तथ्यों और गलत सूचनाओं के बीच अंतर करना होगा। उन्होंने कहा, "संकट के समय आपको जिम्मेदारी के साथ जवाब देना चाहिए। ऐसे समय में जब गलत सूचना बहुत तेजी से फैलती है, आपको यह सुनिश्चित करना चाहिए कि नागरिकों को प्रामाणिक जानकारी आसानी से और समय पर उपलब्ध हो।"
'नागरिकों के साथ लगातार बनाए रखें संवाद'
नागरिकों के साथ लगातार संवाद बनाए रखने के महत्व पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि संचार के माध्यम ऐसे होने चाहिए, जिनसे सार्थक दोतरफा संवाद संभव हो सके। उन्होंने कहा कि ऐसे माहौल में जहां सूचना तुरंत फैलती है, संचार में सटीकता, विश्वसनीयता और जनहित को हमेशा मार्गदर्शक बनाया जाना चाहिए।
मुर्मू ने कहा, "आपको नवीनतम तकनीकी उपकरणों का जिम्मेदारी के साथ इस्तेमाल करना चाहिए। आपको यह सुनिश्चित करना चाहिए कि नवाचार नैतिक मूल्यों, सही मानवीय निर्णय और जवाबदेही को ध्यान में रखते हुए किया जाए।" राष्ट्रपति ने कहा कि जैसे-जैसे भारत 2047 की ओर बढ़ रहा है, भारतीय सूचना सेवा के अधिकारियों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाएगी।
आईएसएस के अधिकारी प्रशिक्षुओं से क्या बोलीं राष्ट्रपति?
उन्होंने कहा, "एक जागरूक नागरिक विकास और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में सक्रिय रूप से भाग लेने में सक्षम होता है। मैं आपको भारत की समृद्ध विविधता को ध्यान में रखते हुए सहानुभूति और संवेदनशीलता के साथ संवाद करने के लिए प्रोत्साहित करती हूं।" भारतीय सांख्यिकी सेवा (आईएसएस) के अधिकारी प्रशिक्षुओं से भी राष्ट्रपति ने मुलाकात की। उन्होंने कहा कि उनका काम अर्थव्यवस्था और समाज के विभिन्न क्षेत्रों में साक्ष्य आधारित नीतियां बनाने में मदद करेगा।
मुर्मू ने कहा, "आपको हमेशा याद रखना चाहिए कि हर आंकड़े के पीछे वास्तविक लोग और उनका जीवन होता है। आपको नागरिकों, शोधकर्ताओं और नीति-निर्माताओं के लिए आंकड़ों को अधिक सुलभ बनाना चाहिए। आधुनिक, विश्वसनीय और तकनीक-सक्षम सांख्यिकीय व्यवस्था बनाने में आपका योगदान विकसित भारत की यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा।" उन्होंने कहा कि विश्वसनीय आंकड़े बेहतर शासन की नींव हैं।
दिया क्या गुरुमंत्र?
राष्ट्रपति ने कहा, "आज की डेटा आधारित दुनिया में सार्वजनिक नीतियों की गुणवत्ता काफी हद तक सटीक, समय पर और विश्वसनीय आंकड़ों की उपलब्धता पर निर्भर करती है। भारतीय सांख्यिकी सेवा आधिकारिक आंकड़े तैयार करने, उनका विश्लेषण करने और उनकी व्याख्या करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। ये आंकड़े ऐसे फैसलों का आधार बनते हैं, जिनका असर हमारे करोड़ों नागरिकों के जीवन पर पड़ता है।"
उन्होंने कहा कि देश की सांख्यिकीय व्यवस्था डिजिटल तकनीकों और आंकड़े जुटाने तथा उनके विश्लेषण के नए तरीकों के जरिये महत्वपूर्ण बदलाव के दौर से गुजर रही है। राष्ट्रपति ने कहा कि मशीन लर्निंग और अन्य उभरती तकनीकों के बढ़ते इस्तेमाल से अधिक समय पर और विस्तृत जानकारी तैयार करने की नई संभावनाएं सामने आ रही हैं।
उन्होंने कहा, "इसके साथ ही इन बदलावों से आप पर सांख्यिकीय शुचिता, निष्पक्षता, गोपनीयता और पेशेवर उत्कृष्टता बनाए रखने की अधिक जिम्मेदारी आती है।" राष्ट्रपति ने कहा कि भारतीय सूचना सेवा और भारतीय सांख्यिकी सेवा दोनों का साझा उद्देश्य शासन की गुणवत्ता को मजबूत करना और देश के लोगों की सेवा करना है। उन्होंने कहा, "प्रभावी संचार और विश्वसनीय जानकारी एक जीवंत और उत्तरदायी लोकतंत्र के आवश्यक आधार हैं।"
मुर्मू ने अधिकारियों से अपने फैसलों में विवेकपूर्ण रहने, व्यवहार में संवेदनशीलता रखने और ईमानदारी बनाए रखने को कहा। राष्ट्रपति ने कहा, "आपको सौंपी गई जिम्मेदारी के साथ लोगों की निष्पक्षता, विनम्रता और समर्पण के साथ सेवा करने की बड़ी जिम्मेदारी जुड़ी है। आपका ज्ञान और कौशल मूल्यवान होगा, लेकिन अंततः आपका चरित्र, प्रतिबद्धता और नागरिकों के प्रति संवेदनशीलता ही आपके योगदान को परिभाषित करेगी।"
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राष्ट्रपति ने यहां राष्ट्रपति भवन में उनसे मुलाकात करने आए भारतीय सूचना सेवा के अधिकारी प्रशिक्षुओं से कहा, "आपको सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल केवल लोगों को जानकारी देने और उनसे जुड़ने के लिए नहीं, बल्कि उनकी चिंताओं को सुनने, समझने और उनका जवाब देने के लिए भी करना चाहिए।"
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'तथ्यों और गलत सूचनाओं के बीच करना होगा अंतर'
उन्होंने कहा कि अधिकारी यह सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे कि सरकार की नीतियों, कार्यक्रमों और पहलों की जानकारी लोगों तक स्पष्ट, सटीक और समय पर पहुंचे। मुर्मू ने कहा, "इसके साथ ही आपकी एक समान रूप से महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सुनने की भी है। आपको लोगों की चिंताओं, उनकी आकांक्षाओं और उनकी प्रतिक्रिया को समझने का प्रयास करना चाहिए। आपको यह सुनिश्चित करना होगा कि जनसंचार लोगों की जरूरतों के अनुरूप और नागरिक-केंद्रित हो।"
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राष्ट्रपति ने कहा कि लगातार जटिल होते सूचना के माहौल में अधिकारियों को तथ्यों और गलत सूचनाओं के बीच अंतर करना होगा। उन्होंने कहा, "संकट के समय आपको जिम्मेदारी के साथ जवाब देना चाहिए। ऐसे समय में जब गलत सूचना बहुत तेजी से फैलती है, आपको यह सुनिश्चित करना चाहिए कि नागरिकों को प्रामाणिक जानकारी आसानी से और समय पर उपलब्ध हो।"
'नागरिकों के साथ लगातार बनाए रखें संवाद'
नागरिकों के साथ लगातार संवाद बनाए रखने के महत्व पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि संचार के माध्यम ऐसे होने चाहिए, जिनसे सार्थक दोतरफा संवाद संभव हो सके। उन्होंने कहा कि ऐसे माहौल में जहां सूचना तुरंत फैलती है, संचार में सटीकता, विश्वसनीयता और जनहित को हमेशा मार्गदर्शक बनाया जाना चाहिए।
मुर्मू ने कहा, "आपको नवीनतम तकनीकी उपकरणों का जिम्मेदारी के साथ इस्तेमाल करना चाहिए। आपको यह सुनिश्चित करना चाहिए कि नवाचार नैतिक मूल्यों, सही मानवीय निर्णय और जवाबदेही को ध्यान में रखते हुए किया जाए।" राष्ट्रपति ने कहा कि जैसे-जैसे भारत 2047 की ओर बढ़ रहा है, भारतीय सूचना सेवा के अधिकारियों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाएगी।
आईएसएस के अधिकारी प्रशिक्षुओं से क्या बोलीं राष्ट्रपति?
उन्होंने कहा, "एक जागरूक नागरिक विकास और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में सक्रिय रूप से भाग लेने में सक्षम होता है। मैं आपको भारत की समृद्ध विविधता को ध्यान में रखते हुए सहानुभूति और संवेदनशीलता के साथ संवाद करने के लिए प्रोत्साहित करती हूं।" भारतीय सांख्यिकी सेवा (आईएसएस) के अधिकारी प्रशिक्षुओं से भी राष्ट्रपति ने मुलाकात की। उन्होंने कहा कि उनका काम अर्थव्यवस्था और समाज के विभिन्न क्षेत्रों में साक्ष्य आधारित नीतियां बनाने में मदद करेगा।
मुर्मू ने कहा, "आपको हमेशा याद रखना चाहिए कि हर आंकड़े के पीछे वास्तविक लोग और उनका जीवन होता है। आपको नागरिकों, शोधकर्ताओं और नीति-निर्माताओं के लिए आंकड़ों को अधिक सुलभ बनाना चाहिए। आधुनिक, विश्वसनीय और तकनीक-सक्षम सांख्यिकीय व्यवस्था बनाने में आपका योगदान विकसित भारत की यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा।" उन्होंने कहा कि विश्वसनीय आंकड़े बेहतर शासन की नींव हैं।
दिया क्या गुरुमंत्र?
राष्ट्रपति ने कहा, "आज की डेटा आधारित दुनिया में सार्वजनिक नीतियों की गुणवत्ता काफी हद तक सटीक, समय पर और विश्वसनीय आंकड़ों की उपलब्धता पर निर्भर करती है। भारतीय सांख्यिकी सेवा आधिकारिक आंकड़े तैयार करने, उनका विश्लेषण करने और उनकी व्याख्या करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। ये आंकड़े ऐसे फैसलों का आधार बनते हैं, जिनका असर हमारे करोड़ों नागरिकों के जीवन पर पड़ता है।"
उन्होंने कहा कि देश की सांख्यिकीय व्यवस्था डिजिटल तकनीकों और आंकड़े जुटाने तथा उनके विश्लेषण के नए तरीकों के जरिये महत्वपूर्ण बदलाव के दौर से गुजर रही है। राष्ट्रपति ने कहा कि मशीन लर्निंग और अन्य उभरती तकनीकों के बढ़ते इस्तेमाल से अधिक समय पर और विस्तृत जानकारी तैयार करने की नई संभावनाएं सामने आ रही हैं।
उन्होंने कहा, "इसके साथ ही इन बदलावों से आप पर सांख्यिकीय शुचिता, निष्पक्षता, गोपनीयता और पेशेवर उत्कृष्टता बनाए रखने की अधिक जिम्मेदारी आती है।" राष्ट्रपति ने कहा कि भारतीय सूचना सेवा और भारतीय सांख्यिकी सेवा दोनों का साझा उद्देश्य शासन की गुणवत्ता को मजबूत करना और देश के लोगों की सेवा करना है। उन्होंने कहा, "प्रभावी संचार और विश्वसनीय जानकारी एक जीवंत और उत्तरदायी लोकतंत्र के आवश्यक आधार हैं।"
मुर्मू ने अधिकारियों से अपने फैसलों में विवेकपूर्ण रहने, व्यवहार में संवेदनशीलता रखने और ईमानदारी बनाए रखने को कहा। राष्ट्रपति ने कहा, "आपको सौंपी गई जिम्मेदारी के साथ लोगों की निष्पक्षता, विनम्रता और समर्पण के साथ सेवा करने की बड़ी जिम्मेदारी जुड़ी है। आपका ज्ञान और कौशल मूल्यवान होगा, लेकिन अंततः आपका चरित्र, प्रतिबद्धता और नागरिकों के प्रति संवेदनशीलता ही आपके योगदान को परिभाषित करेगी।"