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CAPF कैडर अफसरों को मिलेगी राहत: गृह मंत्री ने दी फाइल को मंजूरी, डीओपीटी के बाद वित्त मंत्रालय पर टिकी नजरें

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Wed, 19 Aug 2026 06:52 PM IST
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Relief for CAPF cadre officers: Home Minister approves the file; all eyes now on the Finance Ministry
सीएपीएफ - फोटो : एएनआई

केंद्रीय अर्धसैनिक बलों 'सीएपीएफ' के कैडर अधिकारियों को अब राहत मिल सकती है। गृह मंत्री अमित शाह ने विभिन्न बलों से प्राप्त हुए प्रपोजल वाली फाइल को मंजूरी दे दी है। गृह मंत्रालय की आतंरिक वित्तीय डिवीजन भी उक्त प्रपोजल पर राजी हो गई। इसके बाद वह फाइल डीओपीटी के पास भेजी गई। वहां से भी इस फाइल को हरी झंडी मिल गई है। अब वह फाइल वित्त मंत्रालय के पास है। सूत्रों का कहना है कि अब अगले माह तक सीएपीएफ के 13 हजार से ज्यादा कैडर अधिकारियों को राहत की खबर मिल सकती है। 

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एक दशक से लड़ रहे अदालती लड़ाई 
बता दें कि केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने 17 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में अपने शपथ पत्र में कहा था कि कैडर रिव्यू का समीक्षा कर ली गई है। उस पर आंतरिक वित्तीय डिवीजन भी सहमत है। गृह मंत्री की सहमति से अब उसे डीओपीटी की मंजूरी के लिए भेज दिया गया है। पदोन्नति के मोर्चे पर पिछड़े कैडर अफसर करीब एक दशक से दिल्ली हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट में अपनी हितों की लड़ाई लड़ रहे हैं। सीआरपीएफ, बीएसएफ, एसएसबी, सीआईएसएफ और आईटीबीपी की तरफ से गृह मंत्रालय को मई और जुलाई के बीच कैडर रिव्यू प्रपोजल प्राप्त हुआ था। 27 जुलाई से 3 अगस्त तक सभी बलों का प्रपोजल डीओपीटी को भेजा गया। केंद्रीय गृह मंत्रालय में सुप्रीम कोर्ट के 23 मई 2025 के फैसले के अनुसार, कैडर का संतुलित ढांचा सुनिश्चित करने के लिए सीएपीएफ में डेपुटेशन के मुद्दे की जांच की गई है। इसमें कानूनी एवं नीतिगत पहलुओं, जैसे कि कानूनी जरूरतों और डीओपीटी की गाइडलाइंस के साथ तालमेल बिठाने की जटिलताओं व प्रक्रियाओं पर विस्तार से विचार किया गया।
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वित्त मंत्रालय का व्यय विभाग देगा मंजूरी 
विश्वस्त सूत्रों का कहना है कि केंद्रीय वित्त मंत्रालय के तहत आने वाले व्यय विभाग से भी कैडर अफसरों की फाइल को मंजूरी मिल जाएगी। वजह, ये मामला अब काफी लंबा खिंच चुका है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, इस मामले को लेकर काफी संजीदा हैं। वे चाहते हैं कि कैडर अफसरों की मांगों पर गौर किया जाए। सीएपीएफ ने जिस तरीके से नक्सलवाद का खात्मा करने में अहम भूमिका अदा की है, जम्मू कश्मीर में आतंकवाद पर नकेल कसी गई है और अब उत्तर पूर्व में शांति स्थापित करने में भी सीएपीएफ दो कदम आगे चल रही है, इनके मद्देनजर गृह मंत्री इन बलों के अफसरों और जवानों से खासे प्रभावित हैं। वे सार्वजनिक तौर पर कह चुके हैं कि सीएपीएफ कार्मिकों के हितों के लिए कई योजनाएं तैयार की जा रही हैं। ऐसे में वित्त मंत्रालय का व्यय विभाग भी सीएपीएफ कैडर अफसरों की फाइल को मंजूरी देने में देर नहीं लगाएगा। अब ओजीएएस और एनएफएफयू जैसे लंबित पड़े मुद्दों के सुलझने की उम्मीद है। 
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गृह सचिव ने अपने शपथ पत्र में क्या कहा है 
केंद्रीय गृह सचिव गोविन्द मोहन द्वारा जो अनुपालन शपथ-पत्र दाखिल किया गया है, उसमें लिखा है कि सर्वोच्च न्यायालय के 23.05.2025 को पारित आदेश के आलोक में, शपथकर्ता ने न्यायालय के निर्णय को अक्षरशः और उसकी मूल भावना के अनुरूप लागू करने के लिए कई सक्रिय कदम उठाए हैं। शपथकर्ता यानी गृह सचिव, सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार इस प्रक्रिया को पूरा करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे। यह मामला सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्सेज (सीएपीएफ) को 'ऑर्गनाइज्ड ग्रुप 'ए' सर्विसेज' (ओजीएएस) घोषित करने और इसके परिणामस्वरूप कैडर की समीक्षा एवं भर्ती नियमों में संशोधन से जुड़ा है। 26.12.2025 और 03.02.2026 के पत्रों के माध्यम से, सभी केंद्रीय बलों को को निर्देश दिए गए थे कि वे अपने मौजूदा ग्रुप 'ए' कैडर की व्यापक समीक्षा करें। उसके बाद गृह मंत्रालय को विस्तृत कैडर समीक्षा प्रस्ताव सौंपा जाए। गृह सचिव ने अपने शपथ पत्र में कहा कि कैडर रिव्यू का समीक्षा कर ली गई है। उस पर आतंरिक वित्तीय डिवीजन भी राजी हो गई है। गृह मंत्री की सहमति से उसे डीओपीटी के पास भेजा गया है। 

कैडर अफसरों को नेतृत्व का अवसर नहीं 
सर्वोच्च अदालत ने 23 मई 2025 को अपने फैसले में कहा था कि आईपीएस अधिकारियों के चलते सीएपीएफ के कैडर अधिकारी, पदोन्नति में पिछड़ जाते हैं। उन्हें नेतृत्व का अवसर नहीं मिल पाता। इन बलों में केवल एनएफएफयू (नॉन फंक्शनल फाइनेंशियल अपग्रेडेशन) के लिए नहीं, बल्कि सभी कार्यों के लिए 'ओजीएएस पैटर्न' लागू किया जाए। शीर्ष अदालत ने सरकार को 'एसएजी' (वरिष्ठ प्रशासनिक ग्रेड) स्तर तक के पदों पर आईपीएस अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति को अगले दो साल में धीरे-धीरे कम करने का निर्देश दिया था। इन बलों में आईपीएस के चलते कैडर अधिकारियों की पदोन्नति में ठहराव देखने को मिल रहा है। सर्वोच्च अदालत ने केंद्रीय बलों में आईपीएस की प्रतिनियुक्ति को धीरे-धीरे कम करने की बात कही थी। हालांकि इस फैसले के बाद केंद्रीय बलों में डीआईजी के पदों पर आईपीएस की नियुक्ति बढ़ती चली गई।

सीएपीएफ बिल के विरोध में कैडर अफसर 
28 अक्तूबर 2025 को सर्वोच्च अदालत में कैडर अधिकारियों को 'सुप्रीम' जीत मिली थी। सर्वोच्च अदालत द्वारा रिव्यू पिटीशन को डिसमिस किए जाने के बाद केंद्र सरकार को तगड़ा झटका लगा। इससे पहले कैडर अधिकारियों को सुप्रीम कोर्ट में जीत हासिल हुई थी, लेकिन केंद्र सरकार, उस फैसले के खिलाफ रिव्यू पिटीशन में चली गई। पूर्व चीफ जस्टिस भूषण रामकृष्ण गवई ने खुद को इस केस की सुनवाई से अलग कर लिया था। तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश गवई के स्थान पर जस्टिस सूर्यकांत ने जस्टिस उज्जल भुइयां के साथ मिलकर इस मामले की सुनवाई की। सीएपीएफ के कैडर अधिकारियों को यह डर सता रहा था कि रिव्यू पिटीशन डिसमिस होने के बाद सरकार उन्हें पदोन्नति एवं आर्थिक फायदे देगी या नहीं। वजह, इससे पहले भी कैडर अधिकारी, सर्वोच्च अदालत में जीत हासिल कर चुके थे, लेकिन उन्हें पदोन्नति में फायदा नहीं मिला। इस साल सरकार ने सीएपीएफ बिल भी पास करा लिया था, जिसका कैडर अधिकारियों ने बड़े स्तर पर विरोध किया था। 

कैडर अफसरों को मिलेंगे बेहतर अवसर 
कैडर रिव्यू प्रपोजल को मंजूरी मिलने के बाद सीएपीएफ के अफसरों को पदोन्नति और नेतृत्व क्षमता के बेहतर अवसर मिलेंगे। संभव है कि डीआईजी और आईजी स्तर पर अधिकांश जिम्मेदारियां, कैडर अफसरों को दी जाएं। कैडर प्रपोजल में सहायक कमांडेंट से लेकर एडीजी तक के पदों के बारे में विस्तृत प्रोग्रेसिव योजना शामिल की गई है। एक बटालियन, सेक्टर और जोन में कैडर अफसरों के पद बढ़ सकते हैं। यहां पर देखने वाली बात ये है कि कैडर प्रपोजल में सरकार, नए सीएपीएफ एक्ट को किस तरह से लागू करती है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि अगले दो वर्षों में केंद्रीय बलों में सीनियर एडमिनिस्ट्रेटिव ग्रेड पर आईपीएस की प्रतिनियुक्ति को कम किया जाए। हालांकि नए सीएपीएफ एक्ट के बाद केंद्रीय बलों में करीब चार दर्जन आईपीएस अफसरों ने प्रतिनियुक्ति पर ज्वाइन किया है।


सीआरपीएफ कैडर रिव्यू प्रपोजल पर अलग राय 
एडीजी-4
आईजी-16
डीआईजी-
सीओ-180
टूआईसी-490
डीसी-346
एसी-37
कुल पद 1117
नोट: सूत्रों का कहना है कि कुछ इसी तरह का प्रपोजल कैडर रिव्यू कमेटी की तरफ से सीआरपीएफ मुख्यालय को भेजा गया था। बाद में गृह मंत्रालय को भेजे गए प्रपोजल में करीब आधे पद कम किए गए हैं।

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