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बांग्लादेश भेजे गए बंगाली भाषी लोगों की भारत वापसी: केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को बताया, याचिकाओं का निपटारा
Wed, 19 Aug 2026 05:39 PM IST
Devesh Tripathi
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Devesh Tripathi
Updated Wed, 19 Aug 2026 05:39 PM IST
सार
केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि नागरिकता को लेकर संदेह के चलते पश्चिम बंगाल से बांग्लादेश भेजे गए कुछ बंगाली भाषी लोगों को विशेष परिस्थितियों में भारत वापस लाया गया है। इस जानकारी के बाद शीर्ष अदालत ने केंद्र की संबंधित याचिकाओं का निपटारा कर दिया, हालांकि कानूनी प्रश्न पर कोई अंतिम राय नहीं दी।
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बंगाली भाषी लोगों को वापस लाया गया भारत
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
केंद्र सरकार ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि पश्चिम बंगाल से नागरिकता के संदेह में बांग्लादेश भेजे गए कुछ बंगाली भाषी लोगों को वापस भारत लाया गया है। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने इस घटनाक्रम का संज्ञान लिया। इसके बाद उसने कुछ बंगाली भाषी लोगों को वापस भारत लाने के कलकत्ता हाईकोर्ट के निर्देशों को चुनौती देने वाली केंद्र की याचिकाओं का निपटारा कर दिया।
बांग्लादेश भेजे गए कुछ लोगों की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता संजय हेगड़े ने पीठ को बताया कि सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के हस्तक्षेप से तत्काल समस्या का समाधान हो गया है। हेगड़े ने कहा, "मैं उनके (सॉलिसिटर जनरल) हस्तक्षेप के लिए उन्हें धन्यवाद देना चाहता हूं। मामला अपने आप सुलझ गया है। वे सभी वापस आ गए हैं।"
सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार ने क्या दिया था जवाब?
पीठ ने इस बयान को रिकॉर्ड करते हुए कहा कि उसे बताया गया है कि "विशेष मामले के तौर पर प्रतिवादियों को वापस लाया गया है।" अदालत ने कहा कि संबंधित लोग भारत लौट चुके हैं, इसलिए कार्यवाही को लंबित रखने का कोई कारण नहीं है। इसके बाद पीठ ने याचिकाओं का निपटारा कर दिया। हालांकि, पीठ ने स्पष्ट किया कि मामले में शामिल कानूनी सवाल को खुला रखा गया है।
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22 मई को केंद्र ने पीठ को बताया था कि उसने पहले बांग्लादेश भेजे गए कुछ लोगों को भारत वापस लाने और इसके बाद भारतीय नागरिकता के उनके दावे की जांच करने का फैसला किया है। सॉलिसिटर जनरल ने कहा था कि मामले के विशेष तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए और इसे अन्य मामलों में लागू होने वाली मिसाल नहीं मानते हुए सरकार ने उन्हें वापस लाने का फैसला किया है।
कई बांग्ला-भाषी लोगों को भेजा था बांग्लादेश
मेहता ने कहा था, "सरकार उन्हें वापस लाएगी और उसके बाद उनकी स्थिति की जांच करेगी। इसके परिणाम के आधार पर हम आगे की कार्रवाई करेंगे।" सुप्रीम कोर्ट केंद्र की उस याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें कलकत्ता हाईकोर्ट के 26 सितंबर 2025 के आदेश को चुनौती दी गई थी। हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार के सुनाली खातून और अन्य लोगों को बांग्लादेश भेजने के फैसले को रद्द करते हुए इसे "अवैध" बताया था।
पिछले साल 3 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट ने "मानवीय आधार" पर खातून और उनके आठ वर्षीय बच्चे को भारत में प्रवेश की अनुमति दी थी। उन्हें इससे कुछ महीने पहले बांग्लादेश भेज दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार को नाबालिग की देखभाल करने का निर्देश दिया था। साथ ही बीरभूम जिले के मुख्य चिकित्सा अधिकारी को गर्भवती खातून को सभी जरूरी चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था। इसमें मुफ्त प्रसव की सुविधा भी शामिल थी।
क्या है पूरा मामला?
पिछले साल 26 सितंबर को हाईकोर्ट ने पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले की निवासी खातून और स्वीटी बीबी तथा उनके परिवारों को "अवैध प्रवासी" बताते हुए बांग्लादेश भेजने के केंद्र के फैसले को रद्द कर दिया था। हाईकोर्ट ने केंद्र को निर्देश दिया था कि बांग्लादेश भेजे गए छह नागरिकों को एक महीने के भीतर भारत वापस लाना सुनिश्चित किया जाए। अदालत ने आदेश पर अस्थायी रोक लगाने की सरकार की अपील भी खारिज कर दी थी। हाईकोर्ट ने शेख की ओर से दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर दो आदेश पारित किए थे। शेख ने दावा किया था कि उनकी बेटी, उनके पति दानेश शेख और पांच वर्षीय बेटे को दिल्ली में हिरासत में लेकर बांग्लादेश भेज दिया गया था।
इसी बीरभूम इलाके से आमिर खान की ओर से दायर एक अन्य याचिका में भी इसी तरह का दावा किया गया था। इसमें कहा गया था कि उनकी बहन स्वीटी बीबी और उनके दो बच्चों को दिल्ली पुलिस ने उसी इलाके से हिरासत में लिया और पड़ोसी देश बांग्लादेश भेज दिया।बांग्लादेश भेजे गए इन लोगों को बाद में कथित तौर पर वहां की पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था।
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बांग्लादेश भेजे गए कुछ लोगों की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता संजय हेगड़े ने पीठ को बताया कि सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के हस्तक्षेप से तत्काल समस्या का समाधान हो गया है। हेगड़े ने कहा, "मैं उनके (सॉलिसिटर जनरल) हस्तक्षेप के लिए उन्हें धन्यवाद देना चाहता हूं। मामला अपने आप सुलझ गया है। वे सभी वापस आ गए हैं।"
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सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार ने क्या दिया था जवाब?
पीठ ने इस बयान को रिकॉर्ड करते हुए कहा कि उसे बताया गया है कि "विशेष मामले के तौर पर प्रतिवादियों को वापस लाया गया है।" अदालत ने कहा कि संबंधित लोग भारत लौट चुके हैं, इसलिए कार्यवाही को लंबित रखने का कोई कारण नहीं है। इसके बाद पीठ ने याचिकाओं का निपटारा कर दिया। हालांकि, पीठ ने स्पष्ट किया कि मामले में शामिल कानूनी सवाल को खुला रखा गया है।
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22 मई को केंद्र ने पीठ को बताया था कि उसने पहले बांग्लादेश भेजे गए कुछ लोगों को भारत वापस लाने और इसके बाद भारतीय नागरिकता के उनके दावे की जांच करने का फैसला किया है। सॉलिसिटर जनरल ने कहा था कि मामले के विशेष तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए और इसे अन्य मामलों में लागू होने वाली मिसाल नहीं मानते हुए सरकार ने उन्हें वापस लाने का फैसला किया है।
कई बांग्ला-भाषी लोगों को भेजा था बांग्लादेश
मेहता ने कहा था, "सरकार उन्हें वापस लाएगी और उसके बाद उनकी स्थिति की जांच करेगी। इसके परिणाम के आधार पर हम आगे की कार्रवाई करेंगे।" सुप्रीम कोर्ट केंद्र की उस याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें कलकत्ता हाईकोर्ट के 26 सितंबर 2025 के आदेश को चुनौती दी गई थी। हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार के सुनाली खातून और अन्य लोगों को बांग्लादेश भेजने के फैसले को रद्द करते हुए इसे "अवैध" बताया था।
पिछले साल 3 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट ने "मानवीय आधार" पर खातून और उनके आठ वर्षीय बच्चे को भारत में प्रवेश की अनुमति दी थी। उन्हें इससे कुछ महीने पहले बांग्लादेश भेज दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार को नाबालिग की देखभाल करने का निर्देश दिया था। साथ ही बीरभूम जिले के मुख्य चिकित्सा अधिकारी को गर्भवती खातून को सभी जरूरी चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था। इसमें मुफ्त प्रसव की सुविधा भी शामिल थी।
क्या है पूरा मामला?
पिछले साल 26 सितंबर को हाईकोर्ट ने पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले की निवासी खातून और स्वीटी बीबी तथा उनके परिवारों को "अवैध प्रवासी" बताते हुए बांग्लादेश भेजने के केंद्र के फैसले को रद्द कर दिया था। हाईकोर्ट ने केंद्र को निर्देश दिया था कि बांग्लादेश भेजे गए छह नागरिकों को एक महीने के भीतर भारत वापस लाना सुनिश्चित किया जाए। अदालत ने आदेश पर अस्थायी रोक लगाने की सरकार की अपील भी खारिज कर दी थी। हाईकोर्ट ने शेख की ओर से दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर दो आदेश पारित किए थे। शेख ने दावा किया था कि उनकी बेटी, उनके पति दानेश शेख और पांच वर्षीय बेटे को दिल्ली में हिरासत में लेकर बांग्लादेश भेज दिया गया था।
इसी बीरभूम इलाके से आमिर खान की ओर से दायर एक अन्य याचिका में भी इसी तरह का दावा किया गया था। इसमें कहा गया था कि उनकी बहन स्वीटी बीबी और उनके दो बच्चों को दिल्ली पुलिस ने उसी इलाके से हिरासत में लिया और पड़ोसी देश बांग्लादेश भेज दिया।बांग्लादेश भेजे गए इन लोगों को बाद में कथित तौर पर वहां की पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था।