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CAPF: पूर्व कैडर अफसर बोले- हमें पॉलिसी मेकिंग में करो शामिल, अपने से दूर न करे सरकार

Jitendra Bhardwaj Jitendra Bhardwaj
Updated Fri, 20 Mar 2026 08:58 PM IST
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CAPF: Former Cadre Officers Say Include Us in Policymaking Government Should Not Alienate Us
सीएपीएफ के पूर्व अधिकारी। - फोटो : अमर उजाला
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केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) बिल, 2026, जिसे पिछले सप्ताह ही कैबिनेट ने अपनी मंजूरी दी है, सरकार अब इसे संसद में पेश किए जाने की तैयारी कर रही है। सीएपीएफ के पूर्व कैडर अफसरों का कहना है कि 23 मई 2025 को सुप्रीम कोर्ट से जीतने के बाद भी कैडर अफसरों को नाइंसाफी झेलनी पड़ रही है। वजह, सरकार ने इस फैसले को लागू नहीं किया। अवमानना केस की सुनवाई के दौरान सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में बताया कि वह इस मामले में वैधानिक हस्तक्षेप के लिए बिल ला रही है। 

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सहायक कमांडेंट को पहली पदोन्नति के लिए 15 साल का इंतजार करना पड़ता है। इस बिल से कैडर अधिकारियों के हित प्रभावित होंगे। उनकी पदोन्नति में और ज्यादा देरी होगी। कैडर अफसरों की मांग है कि उन्हें पॉलिसी मेकिंग में शामिल किया जाए। उन्हें सरकार अपने से दूर न करे।  इन सब मुद्दों को लेकर शुक्रवार को पूर्व कैडर अफसरों ने नई दिल्ली स्थित प्रेस क्लब में अपना पक्ष रखा। 
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सभी केंद्रीय सेवाओं में यह नियम बनाया गया था कि अगर तय समय पर पदोन्नति नहीं मिले तो उसका वेतन 'एनएफएफयू' दे दिया जाए। ये नियम केंद्रीय सुरक्षा बलों में लागू नहीं किया गया। इसके लिए बहुत से प्रतिवेदन दिए गए, लेकिन सरकार ने नहीं सुनी। नतीजा, दिल्ली हाईकोर्ट में जाना पड़ा। वहां से कैडर अफसरों के हक में फैसला आया। सरकार ने नहीं माना तो मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। सरकार को छह माह में फैसला लागू करने के लिए कहा गया। इसके बावजूद सरकार ने इसे लागू नहीं किया। यह बिल सुप्रीम कोर्ट के आदेश को समाप्त करने के लिए लाया गया है।  
-एमएस मल्ही, पूर्व आईजी बीएसएफ 

शाहबानो केस में सुप्रीम कोर्ट ने एक महिला के अधिकारों के लिए फैसला दिया था, लेकिन सरकार ने उसे पलट दिया। कैडर अफसरों के केस में ऐसा ही हो रहा है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लागू नहीं किया जा रहा। 17 साल के बाद जीती गई कानूनी लड़ाई को सरकार हराने का काम कर रही है। अगर ये कानून लागू होता है तो उससे कैडर अफसरों के करियर में अवसर प्रभावित होंगे। यह तर्क देना कि आईपीएस प्रतिनियुक्ति से समन्वय में सुधार होगा। इससे इंटेलिजेंस बढ़ेगी। अगर दिल्ली हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट का फैसला देखेंगे तो उसमें इन तर्कों को रिजेक्ट कर दिया गया है। दस माह बाद भी कोर्ट का फैसला लागू नहीं हो रहा। इस बिल के द्वारा सरकार एक बिरादरी का पक्ष ले रही है। 
-एसके सूद, पूर्व एडीजी बीएसएफ 

हमारी बात सुननी चाहिए। हमें टेस्ट तो करो। हम एक अनुशासित बल के सदस्य हैं। राष्ट्र की सेवा में पूरा जीवन लगाया है। गोलियों के बीच नौकरी की है। हम यह सोचते रहे कि दिल्ली में जो लोग बैठे हैं, वे हमारा ख्याल रखेंगे। ऐसा कुछ नहीं हुआ, जो भी सर्विस रूल बने, वे हमारे लिए नहीं थी। शीर्ष पद भी हमें नहीं मिल सके। हम कुछ नहीं मांग रहे। हमारी मांग है कि कैडर अफसरों को पॉलिसी मेकिंग में शामिल करो। हमें अपने से दूर मत करो। रैंक हमारे लिए कोई मतलब नहीं रखता, जब तक हमें पॉलिसी बनाने में शामिल नहीं किया जाएगा। उन्होंने बिना नाम लिए आईपीएस अफसरों से कहा, आप हमें छोटा भाई समझें। 
-विकास चंद्रा, पूर्व आईजी बीएसएफ 

जो यह नेरेटिव बनाया जा रहा है कि समन्वय और नेतृत्व के चलते आईपीएस को सीएपीएफ में ला रहे हैं। पंजाब में जब पांच बजे थाने बंद हो जाते थे तो उनका नेतृत्व कहां था। जम्मू कश्मीर में पुलिस बाहर निकल नहीं पाती थी तब उनका समन्वय कहां था। पंजाब पुलिस को खड़ा करने में सीएपीएफ का हाथ है। सर्वोच्च न्यायालय के न्याय को खत्म करने का प्रयास किया जा रहा है। शाहबानो 2 मत करो। हमें स्वाभिमान का सम्मान चाहिए।  
-केके शर्मा, पूर्व आईजी सीआरपीएफ 


सरकार की विभिन्न कमेटियां, जिनमें मुरली मनोहर जोशी की कमेटी भी शामिल है, ने कहा था कि कैडर अफसरों को उनके अनुभव के आधार पर शीर्ष तक पहुंचने दें। ओजीएएस का निर्णय सुप्रीम कोर्ट ने दिया। उससे पहले हाईकोर्ट ने दिया था। आईपीएस एसोसिएशन ने भी अपना पक्ष रक्षा। इसके बाद ही सर्वोच्च न्यायालय ने कैडर अफसरों के पक्ष में फैसला दिया। कम से कम इस बिल को पहले स्टेंडिंग कमेटी के पास भी भेज दिया जाता। 
-एसके चौधरी, पूर्व एडीजी आईटीबीपी  
 
सरकार हर मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला पलट रही है। ओपीएस का दिल्ली हाईकोर्ट ने दिया, लेकिन सरकार सुप्रीम कोर्ट में चली गई। सरकार ने इस फैसले को लागू नहीं किया। सौ दिन की छुट्टी भी जवानों को नहीं मिल रही। हम लोग, सीएपीएफ के सभी जवानों की बात कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने ओजीएएस के मामले में फैसला दिया, सरकार उसके भी खिलाफ हो गई।    
इसके लिए इन बलों का शीर्ष नेतृत्व जिम्मेदार है। 

-सर्वेश त्रिपाठी, पूर्व एसी सीआरपीएफ 

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