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Sameer Wankhede: समीर वानखेड़े के खिलाफ CAT ने रद्द किए अनुशासनात्मक आरोप, सीबीआईसी को लगाई फटकार

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: देवेश त्रिपाठी Updated Tue, 20 Jan 2026 01:56 PM IST
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सार

मई 2023 में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने वानखेड़े के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी, जो उसी सामग्री पर आधारित थी, जो एसईटी रिपोर्ट का हिस्सा थी। वानखेड़े ने इसके खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख किया, जहां उन्हें किसी भी जबरन कार्रवाई से अंतरिम संरक्षण मिला हुआ है और मामला अभी लंबित है।

CAT quashes disciplinary charges against Sameer Wankhede reprimands CBIC malice vendetta
आईआरएस अधिकारी समीर वानखेड़े - फोटो : ANI
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विस्तार
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केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (सीएटी) की प्रधान पीठ ने सोमवार को समीर वानखेड़े को बड़ी राहत दी। सीएटी ने केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) की ओर से भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस) अधिकारी समीर वानखेड़े के खिलाफ लगाए गए अनुशासनात्मक आरोप को रद्द कर दिया। साथ ही अधिकारियों को आरोप पत्र के आधार पर आगे की कार्यवाही करने से रोक दिया। 

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न्यायमूर्ति रंजीत मोरे (अध्यक्ष) और राजिंदर कश्यप (प्रशासनिक सदस्य) की पीठ ने 18 अगस्त 2025 को लगाए गए आरोपों को रद्द करते हुए कहा कि यह कानून और नियमों के अनुरूप नहीं है। पीठ ने अपने आदेश में कहा कि आरोप पत्र को सभी परिणामी लाभों सहित निरस्त किया जाता है।
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सीएटी ने की कड़ी टिप्पणी 
सीएटी ने इस मामले में अधिकारियों के रवैये पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि समीर वानखेड़े के खिलाफ की गई कार्रवाई पक्षपात और दुर्भावना से प्रेरित नजर आती है। न्यायाधिकरण ने कहा, 'आरोप पत्र जारी करने के पीछे निहित मंशा पूर्वाग्रहपूर्ण है और इस आधार पर की जाने वाली जांच केवल एक औपचारिक दिखावा होती, जिसका परिणाम पहले से तय था। ऐसे में वानखेड़े को आगे उत्पीड़न और अपमान से बचाने के लिए हस्तक्षेप आवश्यक था।'

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न्यायाधिकरण ने सीबीआईसी के आचरण की आलोचना करते हुए इसे वानखेड़े की पदोन्नति रोकने का प्रयास बताया। आदेश में कहा गया कि घटनाक्रमों की श्रृंखला से स्पष्ट है कि आरोप पत्र का कथित आरोपों से कोई वास्तविक संबंध नहीं है और यह प्रतिशोध की भावना से प्रेरित प्रतीत होता है। इसे कानून में दुर्भावना और व्यक्तिगत प्रतिशोध के साथ शक्ति के दुरुपयोग का उदाहरण बताया।

कैसे सुर्खियों में आए समीर वानखेड़े? 

  • सीएटी ने यह भी कहा कि वह सीबीआईसी पर भारी जुर्माना लगाने का इच्छुक था, लेकिन इस उम्मीद के साथ ऐसा नहीं किया गया कि भविष्य में अपने तौर-तरीकों में सुधार करेगा और कानून के शासन का सम्मान करेगा। 
  • समीर वानखेड़े 2008 बैच के आईआरएस अधिकारी हैं।
  • वह 2020 से जनवरी 2022 तक मुंबई जोन के नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) के जोनल डायरेक्टर रहे।
  • इसी दौरान एनसीबी मुंबई ने कॉर्डेलिया क्रूज ड्रग्स मामले में कार्रवाई की थी, जिसमें अभिनेता शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान का नाम सामने आया था।

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वानखेड़े ने रिपोर्ट को CAT में दी थी चुनौती
बाद में जांच में प्रक्रियागत खामियों के आरोप लगे और एनसीबी ने एक विशेष जांच दल (एसईटी) का गठन किया, जिसने जून 2022 में अपनी रिपोर्ट सौंपी। वानखेड़े ने इस रिपोर्ट को सीएटी में चुनौती दी थी, यह कहते हुए कि जांच का नेतृत्व करने वाले अधिकारी ने स्वयं कॉर्डेलिया मामले की जांच की निगरानी की थी।

सीबीआईसी ने 18 अगस्त 2025 को आरोप पत्र जारी किया था, जिसमें आरोप लगाया गया कि एनसीबी से स्थानांतरण के बाद वानखेड़े ने एनसीबी के कानूनी सलाहकार से गोपनीय जानकारी मांगी और जांच को प्रभावित करने का प्रयास किया। सीएटी ने अपने ताजा फैसले में कहा कि यह आरोप पत्र उसी सामग्री पर आधारित है, जो प्रारंभिक जांच और लंबित आपराधिक मामले का हिस्सा है। 

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