ऑपरेशन सिंदूर में भारत का कमाल: चार दिन के संघर्ष में हर मोर्चे पर दबदबा; CDS अनिल चौहान ने किया बड़ा खुलासा
सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सेना ने पूरे चार दिनों तक एस्केलेशन मैट्रिक्स पर नियंत्रण रखा और बेहतर युद्ध स्थिति समझ के साथ बढ़त बनाए रखी। जानिए सीडीएस ने और क्या बताया...
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चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान ने कहा है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सशस्त्र बलों ने बेहतर स्थिति समझ और युद्धक्षेत्र की पारदर्शिता के दम पर पूरे संघर्ष में एस्केलेशन मैट्रिक्स पर नियंत्रण बनाए रखा। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना ने चार दिनों तक हर स्तर पर बढ़त बनाए रखी। यह बयान उन्होंने दिल्ली के मानेकशॉ सेंटर में आयोजित कलाम एंड कवच डिफेंस कॉन्क्लेव के दौरान दिया।
'हर स्तर पर भारत ने बनाए रखा नियंत्रण'
सीडीएस जनरल चौहान ने कहा "हमने पूरे चार दिनों तक एस्केलेशन मैट्रिक्स पर दबदबा बनाए रखा क्योंकि हमारी स्थितिजन्य समझ बेहद मजबूत थी। हमें यह पूरी जानकारी थी कि हमने क्या लक्ष्य साधा है और आगे क्या स्थिति बन रही है।" उन्होंने आगे कहा कि भारतीय सेनाओं के पास न केवल अपनी स्थिति की बल्कि सीमा पार की गतिविधियों की भी बेहतर समझ थी, जिससे हर स्तर पर रणनीतिक बढ़त हासिल हुई।
VIDEO | Delhi: CDS Gen Anil Chauhan says, "When we talk about jointness, we are actually talking about creating structures for multi-domain operations. Theatre commands are essentially the end state of this jointness and integration. This is slightly different from when we talk… pic.twitter.com/TLTJXHgMbp
— Press Trust of India (@PTI_News) May 14, 2026
आधुनिक युद्ध प्रणाली, ड्रोन और तकनीक आधारित लड़ाई पर बात करते हुए सीडीएस ने कहा कि देशों को लंबे समय तक चलने वाले युद्धों से बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज के समय में संघर्ष शुरू करना आसान हो गया है, लेकिन उससे बाहर निकलना बेहद चुनौतीपूर्ण है। उन्होंने कहा "हमें लंबे युद्ध के जाल में नहीं फंसना चाहिए। जब आप सैन्य कार्रवाई करते हैं तो उसके बाद निकलने की रणनीति भी स्पष्ट होनी चाहिए।" सीडीएस ने जोर देते हुए कहा कि किसी भी सैन्य अभियान के लिए स्पष्ट राजनीतिक और सैन्य उद्देश्य होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जैसे ही लक्ष्य प्राप्त हो जाए, संघर्ष को अनावश्यक रूप से जारी नहीं रखना चाहिए।
थिएटर कमांड से बदलेगी सेना की संरचना
जनरल अनिल चौहान ने कहा है कि जब हम 'जॉइंटनेस' की बात करते हैं, तो इसका मतलब केवल सेनाओं का एक साथ काम करना नहीं है, बल्कि मल्टी-डोमेन ऑपरेशंस के लिए मजबूत संरचनाएं तैयार करना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि थिएटर कमांड इसी संयुक्तता का अंतिम स्वरूप है, जहां तीनों सेनाएं एकीकृत होकर काम करेंगी।
सीडीएस चौहान ने बताया कि यह प्रक्रिया आत्मनिर्भर भारत की अवधारणा से अलग है। आत्मनिर्भरता का उद्देश्य पूरे देश को मजबूत बनाना है, जबकि थिएटर कमांड का संबंध सीधे सैन्य ढांचे और संचालन क्षमता से है। उन्होंने कहा कि थिएटर कमांड बनने के बाद सेना में फोर्स जनरेशन (बल तैयार करना) और फोर्स एप्लीकेशन (बल का उपयोग) के बीच स्पष्ट अंतर तय होगा। यह बदलाव देश की सुरक्षा रणनीति पर सीधा असर डालेगा और भविष्य में युद्ध और रक्षा प्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाएगा। जनरल चौहान ने यह भी कहा कि रक्षा मंत्रालय के सचिव और सैन्य मामलों के विभाग की भूमिकाएं इसमें स्पष्ट रूप से निर्धारित होंगी, ताकि पूरी प्रणाली सुचारू रूप से काम कर सके। उन्होंने जोर देकर कहा कि थिएटर कमांड का उद्देश्य भारत की सैन्य क्षमता को अधिक एकीकृत, तेज और प्रभावी बनाना है, जिससे देश की सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत होगी।
ऑपरेशन सिंदूर का पृष्ठभूमि
ऑपरेशन सिंदूर को 7 मई को पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में शुरू किया गया था। इस दौरान भारतीय सेना ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले किए थे। इसके बाद पाकिस्तान की ओर से भी जवाबी कार्रवाई की गई, जिसे भारतीय सेना ने प्रभावी तरीके से नाकाम किया। लगभग 88 घंटे तक चले इस सैन्य संघर्ष के बाद 10 मई की शाम दोनों देशों के बीच सहमति बनने पर हालात शांत हुए।